झाबुआ

झाबुआ पुलिस की जांच आश्वासन तक सिमटी, प्रभारी मंत्री सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिले परिजन

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झाबुआ। काकनवानी निवासी रोहित पंचाल की मौत के करीब 15 दिन गुजर जाने के बाद भी परिजन न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर है। पंचाल समाज और उसके परिजन इस मामले में दोषियों को सजा दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे है। परंतु अब तक झाबुआ पुलिस की जांच संदेह के घेरे में होकर सिर्फ आश्वासन तक सिमटी नज़र आ रही है। पुलिस जहां कुछ रिपोर्टों के आने में समय लगने की बात कह रही हैं, तो वहीं रोहित को न्याय दिलाने की मांग को लेकर समाज जनों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। इसी को लेकर पंचाल समाज और परिजनों का संघर्ष अब तेज हो रहा है।

प्रभारी मंत्री से मिले समाजजन, ज्ञापन एसपी को भेजा

शुक्रवार को मृतक रोहित के भाई नटवर और परिजन अनिल, शांतिलाल पंचाल आदि ने समाज के जिलाध्यक्ष जगदीश पंचाल के नेतृत्व में इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने की मांग को लेकर भाजपा कार्यालय पर प्रभारी मंत्री कुंवर विजय शाह से मुलाकात की। इस दौरान प्रभारी मंत्री ने पूरे मामले में एसपी देवेंद्र पाटीदार से बातचीत का भरोसा दिलाया और कहा कि पंचाल समाज के इस युवा को न्याय जरूर मिलेगा। जिस दौरान भाजपा कार्यकारिणी
सदस्य गगन पंचाल, विनोद पंचाल, बाबूलाल पंचाल आदि भी मौजूद रहे।

कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया ने सोशल मीडिया पर पुलिस को घेरा

आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ से विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया से पंचाल समाज के प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत करवाया। उन्होंने प्रतिनिधि मंडल की बात को गंभीरता से सुना। उन्होंने तत्काल पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया में जोरदार तरीके से उठाया। डॉ. विक्रांत भूरिया ने परिजनों को रोहित पंचाल को न्याय दिलाने की इस लड़ाई को सड़क से विधानसभा तक लड़ने का भरोसा दिलाया। उन्होंने झाबुआ पुलिस से फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर जांच करवाने की मांग भी की है। डॉ. विक्रांत भूरिया का कहना है कि यदि इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिलना पड़ेगा, तो वह स्वयं समाज के साथ जाकर रोहित को न्याय दिलाएंगे।

जांच चल रही है, रिपोर्ट्स शीघ्र बुलवाएंगेः एएसपी महोबिया
थांदला थानांतर्गत एक कार्यक्रम में शामिल होने आए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिपाल महोबिया से मृतक रोहित के परिजन और समाजजन शुक्रवार को मिले। इस दौरान एएसपी महोबिया ने जांच अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली। इस दौरान थांदला एसडीओपी राजेश सुलिया ने बताया कि कुछ रिपोर्ट्स आना बाकी है। इनका विश्लेषण कर वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लेंगे। तब एएसपी महोबिया ने जांच अधिकारी और महिला थाना प्रभारी नेहा बिरला को जांच में तेजी लाने और शीघ्र रिपोर्ट्स मंगवाने के निर्देश दिए। एएसपी महोबिया ने समाजजन को आश्वस्त किया कि रिपोर्ट्स आने के बाद जल्द ही पूरे मामले से समाजजन को अवगत करवाएंगे।

यह है मामला
आपको बता दें 24 जून की शाम को रोहित पंचाल अपने घर से बुलेट लेकर घूमने के लिए निकले थे। जिसके बाद जुलावनिया पेट्रोल पंप से 200 रूपए का पेट्रोल भरवाते हुए उनका सीसीटीवी फुटेज मिला। इसके कुछ घंटों बाद मेघनगर थानांतर्गत रंभापुर व मदरानी के बीच पाट नदी के पुल के नीचे उनका शव पुलिस ने बरामद किया था। पुलिस के ढ़ीले रवैये के चलते कुछ सबूत परिजनों ने एकत्रित किए। घटना स्थल का मुआयना करने और शरीर पर दिख रही चोट के आधार पर परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया। करीब 4 दिनों तक किसी तरह की जांच नहीं होने पर संपूर्ण पंचाल समाज झाबुआ में एकत्रित हुआ। 30 जून को एसपी देवेंद्र पाटीदार को ज्ञापन देकर इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की गई। एसपी देवेंद्र पाटीदार ने मामले में थांदला एसडीओपी राजेश सुलिया के नेतृत्व में जांच टीम बनाई और 7 दिन में मामले का निराकरण करने का आश्वासन दिया था। जिसके 5 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्यवाही देखने को नहीं मिली है।

परिजनों का आरोप- मेघनगर टीआई के ढ़ीले रवैये से सबूत खत्म हुए

मृतक रोहित के भाई नटवर व परिजन अनिल पंचाल सहित लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में मेघनगर टीआई दिनेश शर्मा की लेटलतीफी के चलते कई सबूत खत्म हो गए। साथ ही उनका आरोप है कि इन्होंने बिना जांच के ही पहले दिन से इस पूरे मामले को आत्महत्या बताने की कोशिश की। 4 दिनों तक जांच प्रभावित की और सबूतों को नष्ट होने का मौका मिल गया। जब परिजनों ने पूरे मामले में ब्लड सैंपल, टायर के निशान, पुल से कुछ दूरी पर घटना घटित होने के कई सबूत एकत्रित किए और पुलिस को दिए, तब जाकर पुलिस इस मामले में हत्या के एंगल पर जांच करने को तैयार हुई।

कुछ सवाल अब भी अनसुलझे

  1. यदि रोहित को उसी जगह आत्महत्या करना होती, तो वह काकनवानी से थांदला, मेघनगर होते हुए करीब 30 किमी तक क्यों घूमा ?
  2. कैपरी-टीशर्ट पहनकर कोई व्यक्ति गांव या शहर में स्थानीय स्तर पर घूमता है। उसने इतना लंबा सफऱ तय क्यों किया?
  3. यदि उसे आत्महत्या करना थी, तो पेट्रोल पंप पर गाड़ी में पेट्रोल क्यों भरवाया? वह काकनवानी से मदरानी होकर सीधे घटनास्थल पर जा सकता था। उसने इतनी दूरी क्यों तय की?
  4. घटना स्थल से कुछ दूरी पर मिले टायर के निशान और ब्लड किसका है? यदि वह खून रोहित का हैं, तो उसके साथ घटना कारित करने वाले व्यक्ति अब तक पकड़े क्यों नहीं गए?
  5. यदि उसने पुल से कूद कर आत्महत्या की, तो बुलेट की चाबी टेढ़ी कैसे हो गई? वह तो किसी तरह की झड़प के दौरान ही डेढ़ी हो सकती है?
  6. पुलिस ने रोहित की कदकाठी की डमी को पुल से फेंककर अब तक घटना का रिक्रिएशन क्यों नहीं किया?
  7. पुलिस ने पीएम रिपोर्ट और विसरा रिपोर्ट्स पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेना अब तक उचित क्यों नहीं समझा?
  8. पुलिस ने मेघनगर टीआई दिनेश शर्मा और रंभापुर चौकी प्रभारी संजय बघेल को इस लेटलतीफी और संदिग्ध जांच के लिए उनकी भूमिका अब तक तय क्यों नहीं की?
  9. घटना स्थल के आसपास की टॉवर लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्य को इकट्ठा करने में देरी क्यों हो रही?
  10. घटना वाले दिन की एफएसएल अधिकारी के बिना जांच के आत्महत्या बताने की जल्दबाज़ी क्यों?

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