JHबुआ में सवाल— जब शराब और मादक पदार्थों की तस्करी जारी है, तो कार्रवाई कितनी प्रभावी?
झाबुआ। जिले में एक ओर पुलिस और प्रशासन “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान चलाकर लोगों को नशे के दुष्परिणाम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर नशे के कारोबार पर जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी कार्रवाई हुई है?
सवाल उठ रहे हैं…
क्या अभियान के दौरान जिले में मादक पदार्थों और अवैध शराब के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर बड़े मामलों में कार्रवाई हुई? कितने प्रकरण दर्ज हुए? कितनी मात्रा में नशीले पदार्थ और अवैध शराब जब्त की गई? और कितने बड़े तस्कर सलाखों के पीछे पहुंचे?
गुजरात सीमा पर भी उठ रहे सवाल
झाबुआ की सीमा गुजरात से जुड़ी हुई है। ऐसे में यह भी चर्चा का विषय है कि गुजरात की ओर जाने वाली अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग ने कितनी संयुक्त कार्रवाई की? क्या सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार सख्त चेकिंग की जा रही है या अभियान केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित है?
जनता चाहती है परिणाम
विशेषज्ञों का मानना है कि नशामुक्त समाज के लिए जागरूकता आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ अवैध कारोबार करने वालों पर कठोर कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है। जनता अब केवल शपथ और रैलियों से आगे बढ़कर ठोस परिणाम देखना चाहती है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि नशे के खिलाफ चल रहे इस अभियान में आने वाले दिनों में पुलिस और आबकारी विभाग कितनी प्रभावी कार्रवाई कर पाते हैं और जिले को वास्तव में नशामुक्त बनाने की दिशा में कितनी सफलता मिलती है।