झाबुआ

बिना वैध गायनाकोलॉजिस्ट के 8 माह से उपचार….! स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील करने के बजाय दिए 3 दिन….

सोनोग्राफी यूनिट सील, दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर पंजीयन निरस्त करने की चेतावनी; कार्रवाई पर उठे सवाल।झाबुआ – जिले के लाबाना हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद सोनोग्राफी यूनिट को सील कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल में कार्यरत गायनाकोलॉजिस्ट का मध्यप्रदेश […]

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झाबुआ – जिले के लाबाना हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद सोनोग्राफी यूनिट को सील कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल में कार्यरत गायनाकोलॉजिस्ट का मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में वैध पंजीयन उपलब्ध नहीं था, इसके बावजूद पिछले लगभग आठ माह से मरीजों का उपचार किए जाने का मामला सामने आया है ।

स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर अस्पताल का पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी । इधर इस कार्रवाई को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि बिना वैध पंजीयन के लंबे समय तक उपचार किया जाता रहा, तो केवल तीन दिन का समय देना और अस्पताल को तत्काल सील नहीं करना उचित है या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच होना चाहिए। नागरिकों का मानना है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और ऐसे मामलों में सख्त एवं पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है । इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की गठित टीम द्वारा समय-समय पर इस तरह के हास्पीटल का निरीक्षण और जांच भी की गई होगी तो फिर यह कैसे संभव हुआ कि बिना वैध गायनोकालाजिस्ट के , इस हास्पीटल में आठ माह से इलाज किया जा रहा । इसके अलावा भी हास्पीटल प्रारंभ के समय भी स्वास्थ्य विभाग ने किन दस्तावेज के आधार पर अनुमति दी । आखिर आठ माह से स्वास्थ्य विभाग किस कुंभकरणीय नींद में था इसको लेकर भी चौराहो पर चर्चाओं का दौर जारी है । इसके अलावा भी अस्पताल के संबंध में पूर्व में भी जिला प्रशासन और कलेक्टर को शिकायतें दी गई थीं। अब स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है। यदि जांच में नियमों का गंभीर उल्लंघन सिद्ध होता है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है ।

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