झाबुआ

कोठारी परिवार के भाई-बहन के बेटों ने 16 उपवास की तपस्या पूर्ण की , किया पारणा

झाबुआ। जैन धर्म में तपस्या और आत्मसंयम का विशेष महत्व माना गया है। वर्तमान भौतिकवादी दौर में जहां युवा मोबाइल और खान-पान में व्यस्त रहते हैं, वहीं कोठारी परिवार और संघवी के दो युवाओं ने अपने दादा-दादी एवं माता-पिता के धार्मिक संस्कारों से प्रेरित होकर 16 उपवास की कठिन तपस्या पूर्ण कर धर्म आराधना का […]

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झाबुआ। जैन धर्म में तपस्या और आत्मसंयम का विशेष महत्व माना गया है। वर्तमान भौतिकवादी दौर में जहां युवा मोबाइल और खान-पान में व्यस्त रहते हैं, वहीं कोठारी और संघवी परिवार के दो युवाओं ने अपने दादा-दादी एवं माता-पिता के धार्मिक संस्कारों से प्रेरित होकर 16 उपवास की कठिन तपस्या पूर्ण कर धर्म आराधना का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया ।


शहर के तेरापंथ समाज के श्रद्धानिष्ठ श्रावक स्व. पूनम कोठारी के छोटे पुत्र वैभव कोठारी के पुत्र कल्प कोठारी एवं उनकी बड़ी पुत्री मोनिका नितेश संघवी के छोटे पुत्र पर्व संघवी ने एक साथ 16 उपवास की तपस्या प्रारंभ की। विशेष बात यह रही कि तपस्या शुरू होने के बाद करीब 4-5 उपवास तक दोनों परिवारों को एक-दूसरे की तपस्या की जानकारी नहीं थी। चूंकि बच्चे 5 उपवास या 8 या 11 या 16 उपवास करेंगे, इसको लेकर संशय था लेकिन बच्चों ने संयम रखते हुए 16 उपवास की तपस्या पूर्ण की। वैभव कोठारी का परिवार झाबुआ में निवास करता है, जबकि मोनिका का विवाह नितेश संघवी से हुआ व परिवार ताल में रहता है ।


कल्प ने दूसरी बार और पर्व ने पहली बार 16 उपवास की तपस्या की
लगभग 16 वर्षीय कल्प कोठारी इससे पूर्व भी 9 एवं 11 उपवास की तपस्या कर चुके हैं। उन्होंने अब दूसरी बार 16 उपवास की कठिन तपस्या पूर्ण की। वहीं 17 वर्षीय पर्व संघवी ने पहली बार इतनी बड़ी तपस्या कर धर्म के प्रति अपनी श्रद्धा और आत्मसंयम का परिचय दिया। पर्व ने इस तपस्या का श्रेय अपने माता-पिता को दिया।
दोनों परिवारों में धार्मिक संस्कारों का विशेष वातावरण रहा है। कल्प के पिता वैभव कोठारी भी धार्मिक प्रवृत्ति के हैं और वर्ष में कई महीनों तक एकासन तप करते हैं। माता सोनिया कोठारी भी समय-समय पर उपवास, आयंबिल सहित विभिन्न तप आराधनाएं करती हैं। इसी प्रकार पर्व के पिता नितेश संघवी भी धर्म और गुरु के प्रति विशेष श्रद्धा रखते हैं तथा समय-समय पर उपवास, एकासन आदि तप करते हैं। माता मोनिका संघवी के जीवन में भी एकासन, उपवास, आयंबिल एवं सामायिक जैसी धार्मिक आराधनाएं नियमित रूप से शामिल हैं । इस प्रकार परिवार में धार्मिक संस्कारों के कारण ही दोनों युवाओं ने तपस्या पूर्ण की ।
28 जुलाई से शुरू की थी तपस्या
कल्प कोठारी और पर्व संघवी ने 28 जुलाई से 16 उपवास की तपस्या प्रारंभ की और क्रमशः तप आराधना करते हुए 12 अगस्त को 16 उपवास पूर्ण किए। इसके बाद 13 अगस्त को दोनों ने अपने-अपने परिवारजनों की उपस्थिति में पारणा किया। कल्प कोठारी ने झाबुआ में माता-पिता एवं परिवारजनों की उपस्थिति में पारणा किया, जबकि पर्व संघवी ने ताल में माता-पिता एवं परिवारजनों की उपस्थिति में पारणा किया। परिवारजनों एवं समाजजनों ने दोनों युवाओं की तपस्या की अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।

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