झाबुआ

आओ पता लगाएं – स्वास्थ्य विभाग में वह कौन रंगा बिल्ला (सप्लायर) है जो विभाग के बजट को दीमक की तरह खोखला कर रहे है …?

झाबुआ। आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा हर वर्ष लाखों-करोड़ों रुपए का बजट उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य जिलेवासियों को आवश्यक दवाइयां, उपकरण एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग में सामग्री खरीदी और सप्लाई व्यवस्था को लेकर रंगा बिल्ला सप्लायर की […]

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झाबुआ। आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा हर वर्ष लाखों-करोड़ों रुपए का बजट उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य जिलेवासियों को आवश्यक दवाइयां, उपकरण एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग में सामग्री खरीदी और सप्लाई व्यवस्था को लेकर रंगा बिल्ला सप्लायर की जोड़ी लगातार चर्चाओ  में है ।
विभाग से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कुछ चुनिंदा सप्लायर लंबे समय से विभाग में सक्रिय हैं। इनमें दो सप्लायरों की आपसी नजदीकी को लेकर विभागीय गलियारों में कथित तौर पर ‘रंगा-बिल्ला’ की जोड़ी की चर्चा हो रही है। आरोप है कि ये सप्लायर विभाग के बजट से होने वाली खरीदी में लगातार लाभ उठा रहे हैं । सूत्रों के अनुसार, इनमें से एक सप्लायर की विभाग में सक्रियता कोरोना काल से ही बताई जा रही है। यह भी कहना है कि आमजन की स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च होने वाले बजट का बड़ा हिस्सा सामग्री खरीदी के माध्यम से खर्च किया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जेम पोर्टल के माध्यम से की जा रही खरीदी में वास्तविक आवश्यकता, गुणवत्ता और बाजार दरों का कितना ध्यान रखा जा रहा है । वही यदि खरीदी की जांच की जाए तो विभागीय खरीदी में इन रंगा बिल्ला की फर्मो के बिल ही नजर आयेंगे ।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक पूर्व के महीनों अथवा वर्षों में करोड़ों रुपए की सामग्री खरीदी को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी थी। सूत्रों का दावा है कि उक्त टेंडर को मंजूरी दिलाने के लिए एक अधिकारी को कथित तौर पर लाखों रुपए की पेशकश किए जाने की चर्चा भी सामने आई थी। हालांकि इसकी पुष्टि किसी आधिकारिक जांच या दस्तावेज से नहीं हुई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि उक्त सामग्री खरीदी वास्तव में किसी प्रक्रिया के तहत हुई, किस दर पर हुई, किन फर्मों को काम मिला और खरीदी गई सामग्री की गुणवत्ता एवं आवश्यकता का परीक्षण किस स्तर पर किया गया। यदि इतनी बड़ी राशि की खरीदी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच से कई सवालों का जवाब सामने आ सकता है ।

स्वास्थ्य विभाग को मिलने वाला सरकारी बजट आमजन की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए होता है। यदि खरीदी प्रक्रिया में अनियमितता, मिलीभगत या आवश्यकता से अधिक खरीदी के आरोप सही पाए जाते हैं तो इसका सीधा असर मरीजों और जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ सकता है। अब जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग की पिछले कुछ वर्षों की प्रमुख सामग्री खरीदी, टेंडर प्रक्रिया, सप्लायरों की पात्रता, भुगतान, सामग्री की गुणवत्ता और वास्तविक उपयोग की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि किन फर्मों को कितने मूल्य के कार्य दिए गए और सरकारी धन से खरीदी गई सामग्री का उपयोग कहां-कहां किया गया ।

आने वाली खबर में EPF राशि घोटाले को लेकर बडी खबर…।

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