नागदा में तपस्वी प्रिया गांधी ने पूर्ण की 31 उपवास की मासक्षमण तपस्या, निकला वरघोड़ा
नागदा में तपस्वी ने पूर्ण की 31 उपवास की मासक्षमण तपस्या, निकला वरघोड़ामेन बाजार से होते हुए बद्रीविशाल धर्मशाला पहुंचा तपस्वी का वरघोड़ा, धार्मिक सभा में जैन समाजजनों ने की तप अनुमोदना नागदा। जैन धर्म में तपस्या को आत्मशुद्धि, संयम और आत्मबल का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। इसी भावना को साकार करते हुए नागदा […]
नागदा। जैन धर्म में तपस्या को आत्मशुद्धि, संयम और आत्मबल का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। इसी भावना को साकार करते हुए नागदा नगर में प.पू. चिद्रव्रता श्रीजी म.सा. की सुशिष्या साधवी श्री अर्हमव्रता श्रीजी म.सा. आदि ठाणा 4 का चातुर्मास काल में प्रेरणा पाकर श्रीमती प्रिया जितेश गांधी ने 31 उपवास की मासक्षमण तपस्या पूर्ण की। तपस्या पूर्ण होने के अवसर पर जैन समाज द्वारा तप अनुमोदना कार्यक्रम अंतर्गत तप की अनुमोदना की ।
सुबह करीब 9 बजे तपस्वी का पार्श्व प्रधान पाठशाला भवन से वरघोड़ा प्रारंभ हुआ और नागदा के मुख्य बाजार से होते हुए बद्रीविशाल धर्मशाला पहुंचा। वरघोड़ा के प्रथम में जैन समाज की महिलाएं ड्रेस कोड में धार्मिक गीतों पर नृत्य करते हुए तपस्वी की जयकारों के साथ अनुमोदना करती रही । बाद में बैंड-बाजा व ढोल पर श्रावक समाज झूमता हुआ निकला और समापन पश्चात धार्मिक सभा के रूप में तब्दील हुआ। कार्यक्रम में जैन समाज के श्रद्धालु, परिवारजन एवं समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और तपस्वी की तपस्या की अनुमोदना करते हुए मोतियों की माला पहनाकर , शाल ओढ़ाकर और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया । साधु भगवंतों की प्रेरणा से बढ़ता गया तप का संकल्प धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए तपस्वी के पति जितेश गांधी ने बताया कि प्रारंभ में प्रिया गांधी तपस्या को लेकर विचार कर रही थीं। तभी साध्वी श्री प.पू. चिद्रव्रता श्रीजी म.सा. की सुशिष्या सा. अर्हमव्रता श्रीजी म.सा. आदि ठाणा 4 साधु भगवंतों की प्रेरणा और आशीर्वाद से उनके मन में तप करने का संकल्प मजबूत हुआ। यह भी बताया कि तैले तप से तपस्या की शुरुआत करते हुए 11 उपवास के बाद पारणा करने का विचार था। इसके बाद संकल्प बढ़कर 16 उपवास, फिर 21 उपवास तक पहुंचा। अंततः तपस्वी ने मनोबल, आत्मविश्वास और साधु भगवंतों की प्रेरणा के बल पर 31 उपवास की मासक्षमण तपस्या पूर्ण की। उन्होंने कहा कि यह तपस्या केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि परिवार और समाज के लिए भी प्रेरणादायी है। जैन समाजजनों ने तपस्वी के तप की अनुमोदना करते हुए उनके तपोबल की सराहना की ।
साध्वी श्री ने बताई तपस्या की महत्ता कार्यक्रम के दौरान साध्वी श्री अर्हमव्रता श्री जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन धर्म में तपस्या का विशिष्ट महत्व है तप केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और कर्मों की निर्जरा का साधन है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जब अपनी इच्छाओं, स्वाद और भौतिक सुख-सुविधाओं पर संयम स्थापित करता है, तभी वास्तविक तप की भावना विकसित होती है। तपस्या के दौरान आने वाली कठिनाइयों को मनोबल, श्रद्धा और संयम के साथ स्वीकार करना साधक को आत्मिक रूप से मजबूत बनाता है। साध्वी श्री ने कहा कि तपस्या में शरीर से अधिक मन की दृढ़ता आवश्यक होती है। तपस्वी द्वारा लंबे समय तक किए गए उपवास श्रद्धा, संयम और आत्मबल का परिचायक हैं। उन्होंने उपस्थित समाजजनों से भी तप, त्याग, संयम और धार्मिक जीवन की प्रेरणा लेने का आह्वान किया । साध्वी श्री जी ने बताया कि तप का अर्थ सिर्फ अनुमोदना कर , स्वामीवात्सल्य में शामिल होना नहीं बल्कि तप की तप से अनुमोदना करना चाहिए । जैसे प्रिया गांधी ने आहार संयम किया , उसी तरह श्रावक को 30 दिन तक एक वस्तु का त्याग कर या 30 दिन तक सामायिक, नवकारसी आदि का संकल्प लेना चाहिए , तब ही तप की सच्ची अनुमोदना होगी । मासक्षमण तपस्या पूर्ण कार्यक्रम के दौरान जैन समाज एवं परिवारजनों ने तपस्वी प्रिया जितेश गांधी की 31 उपवास की तपस्या की अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की ।
तपस्वी ने तप अनुमोदना कार्यक्रम पश्चात साध्वी श्री अर्हमव्रता श्री जी से आशीर्वाद प्राप्त कर , समाजजनों की उपस्थिति में परिवारजन के हाथों से पारणा किया । इस तप अनुमोदना कार्यक्रम में नागदा के अलावा दिल्ली , इंदौर , उज्जैन , रतलाम , मंदसौर , झाबुआ , उन्हैल आदि अनेक स्थानों से श्रावक व परिवारजन सम्मिलित हुए ।