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झाबुआ

निजी स्कूल का कारनामा…… रिजल्ट घोषित किया ही नहीं और पूरक परीक्षा आयोजित… यह कैसी शिक्षा प्रणाली..?

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झाबुआ —- जिले में निजी स्कूल संचालक की मनमानी का आलम यह है कि स्कूल द्वारा बच्चों का रिजल्ट घोषित किया ही नहीं और स्कूल संचालक द्वारा पूरक परीक्षा भी आयोजित कर ली । साथ ही साथ ना तो रिजल्ट को लेकर अप्रूवल लिया गया और नहीं प्रवेश उत्सव को लेकर कोई सजगता देखी जा रही है । उल्टा शासन के नियमों का मजाक बनाया जा रहा है… यह कैसी शिक्षा प्रणाली ।

शहर के मध्य संचालित निजी स्कूल संचालक की मनमानी कहे या फिर शिक्षा विभाग की गैर जिम्मेदाराना कार्य प्रणाली, निजी स्कूल संचालक द्वारा शासन के नियमों के विपरित कार्य कर, शिक्षा का मज़ाक़ बनाया जा रहा है । इस निजी स्कूल स्कूल संचालक की मनमानी का आलम यह है कि कक्षा पहली से सातवीं तक बोर्ड परीक्षा को छोड़कर, रिजल्ट घोषित करने के पूर्व ही पूरक परीक्षा आयोजित कर ली गई है । मप्र बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों को  संकुल से 25-27 मार्च तक रिजल्ट घोषित हेतु अप्रूवल लेना पड़ता है लेकिन इस निजी स्कूल संचालक द्वारा कोई अप्रूवल लिया ही नहीं गया है । साथ ही संभवतः कक्षा पहली से सातवीं तक बोर्ड को छोड़कर , 31 मार्च तक रिजल्ट घोषित किया जाना चाहिए था । लेकिन इस निजी स्कूल संचालक ने इस नियम का उल्लघंन किया है ।  वही मध्य प्रदेश बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में 1 अप्रैल से 5 अप्रैल तक प्रवेश उत्सव मनाया जाना चाहिए । लेकिन इस निजी स्कूल संचालक ने अभी तो रिजल्ट घोषित ही नहीं किया है सूत्रों का कहना है कि शहर की यह नामी स्कूल 5 अप्रैल तक रिजल्ट घोषित करेगा और उसके बाद नवीन सत्र प्रारंभ करेगा  ।‌ यह निजी स्कूल संचालक, नियमों से परे जाकर, जहां रिजल्ट घोषित किया जाकर,  पूरक परीक्षाएं आयोजित की जाना चाहिए । वहीं इस निजी स्कूल संचालक की मनमानी यह है कि स्कूल द्वारा पहले पूरक परीक्षा  1 व  2 अप्रैल को आयोजित की व 5 अप्रैल को रिजल्ट घोषित करेगा । शहर के कई पालकगण इस कार्यप्रणाली से अंचभित भी है और कह रहे हैं यह कैसी शिक्षा प्रणाली…..? जहां जिलेभर में निजी व शासकीय स्कूलों में प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है वही इस निजी स्कूल में रिजल्ट पूर्व, पूरक परीक्षाएं आयोजित कर , एक नई परिपाटी प्रारंभ की है जो गहन चिंतन का विषय है  । इस तरह की मनमानी तब ही संभव है जब शिक्षा विभाग के आला अधिकारी इन पर पूर्ण रूप से मेहरबान है या फिर समय-समय पर निरीक्षण नहीं करते है ।‌  कारण चाहे जो भी हो,  लेकिन इस तरह निजी स्कूलों की मनमानी से शिक्षा के स्तर पर भी प्रभाव पड़ता है । क्या शासन प्रशासन और शिक्षा विभाग इस तरह के निजी स्कूलों की कार्य प्रणाली को लेकर कोई जांच पड़ताल करेगा या फिर यह निजी स्कूल मध्य प्रदेश शासन के नियमों का माखोल उड़ाता रहेगा..?

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