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झाबुआ

पेटलावद की फर्म गोपाल हार्डवेयर द्वारा 50 से 200 प्रतिशत लाभ अर्जित करने को लेकर, आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा इंकमटैक्स विभाग और जीएसटी विभाग को शिकायती आवेदन देने की बात कही

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झाबुआ – जिले की एक फर्म गोपाल हार्डवेयर पेटलावद द्वारा मनमाने दामों पर सामग्री सप्लाई कर , शासन को लूटने का प्रयास किया है और करीब 50 प्रतिशत से लेकर 200 प्रतिशत तक सामग्री पर लाभ कमाया है । वही बिलों में जीएसटी नंबर भी नजर नहीं आ रहा है और बिलों में सामग्री पर जीएसटी की दर भी नजर नहीं आ रही है जो इंकमटैक्स और जीएसटी विभाग के लिए जांच का विषय है ।

पेटलावद की फर्म गोपाल हार्डवेयर द्वारा  सरकारी विभाग में सामग्री बाजार भाव से अधिक दर में सप्लाई कर, 50 से 200 प्रतिशत  तक लाभ कमाया है । जहां बात करें चूना की तो , इस फर्म द्वारा 30 रू प्रति किलो चूना दिया हैं जबकि  चूना बाजार में मात्र 10 रू प्रति किलो की दर से उपलब्ध है जो लाभ करीब 200 प्रतिशत से अधिक है । वही इस फर्म द्वारा बाईडीग वायर 120 रू प्रति किलो की दर से सप्लाई किया है जबकि यह सामग्री बाजार में 80  रू प्रति किलो की दर से उपलब्ध है इसमें लाभ करीब 50 प्रतिशत है । वही इस फर्म द्वारा जीपी बाल्टी 350 रू प्रति नंग की दर से सप्लाई की है जबकि बाजार में रू 200 प्रति नंग की दर से उपलब्ध है । इस सामग्री में भी करीब 75 प्रतिशत की दर से लाभ अर्जित किया । वही टेप 30 मीटर रू 500 प्रति नंग की दर से दी है जबकि बाजार भाव मात्र रू 200 है इसमे करीब 150 प्रतिशत की दर से लाभ कमाया है । वही बिल में  कई सामग्री की मात्रा तक नहीं दर्शाई गई । मात्र सामग्री और राशि। इसके अलावा भी कई अन्य सामग्री के दाम भी बाजार भाव से बहुत अधिक है इस फर्म ने मनमाने दामों में सामग्री सप्लाई कर, शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया और स्वयं ने आर्थिक लाभ कमाया है । इसके अलावा इस फर्म के बिलों में जीएसटी को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है । और न ही जीएसटी कटौत्रे को लेकर कोई जानकारी बिल में है याने सामग्री पर जीएसटी किस दर से लगाया है । बिल‌ में सिर्फ टिन नंबर नजर आ रहे हैं । इस फर्म द्वारा सरकारी विभाग में सामग्री मनमाने दामों पर दी है और भूगतान भी लिया है । जहां एक ओर अन्य विभागों में फर्मो द्वारा 10 से 20 प्रतिशत लाभ अर्जित किया जाता है वहीं इस फर्म द्वारा 50 से 200 प्रतिशत लाभ अर्जित किया जाता है । क्या यह फर्म इस लाभ पर इंकमटैक्स फाइल कर रहा है या नहीं । बिलों के आधार पर लाभ की गणना की जाए , तो क्या यह फर्म ने इंनकम टैक्स भी इस लाभ पर दिया है या नहीं । वही जीएसटी विभाग भी इन बिलों को लेकर जांच करें , तो एक बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है । वही इस फर्म की इसी लाभ अर्जित करने वाली कार्यप्रणाली और जीएसटी की जांच को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता ने दोनों विभाग को शिकायती आवेदन देने का मन बनाया है और इस फर्म द्वारा इस लाभ अर्जित करने वाली कार्यप्रणाली की जांच और जीएसटी रिटर्न की जांच को लेकर आवेदन देने की बात कही है । देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या आवेदक इन्कमटैक्स विभाग और जीएसटी विभाग को शिकायती आवेदन देता है या नहीं…. ।

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