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झाबुआ

आखिर क्यों ….सीएमएचओ तत्कालीन प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी (कटारा) पेटलावद की जानकारी देने से कतरा रहे हैं…. ?

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झाबुआ —- सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दायर एक आवेदन में तत्कालीन प्रभारी खण्ड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डा. सुरेश कटारा के कार्यकाल से जुड़ी वित्तीय जानकारी, करीब एक वर्ष बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है और आवेदक ने इस जानकारी हेतु प्रथम अपील भी दायर की है । जनचर्चा है कि आखिर क्यों सीएमएचओ  तत्कालीन बीएमओ पेटलावद की जानकारी देने में कतरा रहा है जांच का विषय है

जानकारी अनुसार 3 मार्च 2025 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नाम सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत तत्कालीन प्रभारी बीएमओ पेटलावद डा सुरेश कटारा के कार्यकाल को लेकर जानकारी मांगी गई थी और आवेदन में स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि प्रभारी बीएमओ पेटलावद डा. कटारा को किस दिनांक से बीएमओ का प्रभार सौंपा गया था तथा उस दिनांक से लेकर उनके प्रभार मुक्त होने तक के कार्यकाल में की गई समस्त सामग्री खरीदी, बिलों के भुगतान, अन्य व्ययों से संबंधित बिल एवं भुगतान वाउचर की सत्य प्रतिलिपियां उपलब्ध कराई जाने को लेकर आवेदन दिया गया। इस आवेदन में इसमें विशेष रूप से सामग्री क्रय के बिल, भुगतान की स्वीकृति, वाउचर तथा अन्य वित्तीय दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां शामिल हैं। लेकिन सीएमएचओ द्वारा आवेदन के करीब 6 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। तब आवेदक द्वारा प्रथम अपील के तहत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को करीब 5 बीत जाने के बाद भी जानकारी देना उचित नहीं समझा गया है आखिर क्यों सीएमएचओ तत्कालीन बीएमओ पेटलावद के कार्यकाल की जानकारी देने में आनाकानी कर रहे हैं क्या इस कार्यकाल में कोई बड़ा खेल हुआ है या फिर सीएमएचओ द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम का मज़ाक़ बनाया जा रहा है आवेदक द्वारा कई बार मौखिक रूप से सीएमएचओ से मिलकर जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही गई । लेकिन विभागीय अधिकारी को इस अधिनियम को लेकर कोई जागरूकता नहीं है या फिर जानकर अनजान बन रहा है । या फिर तत्कालीन बीएमओ पेटलावद और सीएमएचओ की कोई मिलीभगत तो नहीं….. संपूर्ण कार्य प्रणाली जांच का विषय है

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