झाबुआ। जैन श्वेतांबर श्री संघ झाबुआ की वरिष्ठ धर्मनिष्ठ सुश्राविका, तपस्वीरत्ना एवं नवकार आराधिका स्वर्गीय श्रीमती लीलाबाई शांतिलाल भंडारी (जीजी) का विगत दिनों 95 वर्ष की आयु में देवलोक गमन हो गया। उनके निधन से जैन समाज में शोक की लहर व्याप्त है। समाजजनों ने उन्हें एक आदर्श साधिका, तपस्विनी एवं धर्म आराधना के प्रति समर्पित व्यक्तित्व बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की ।जानकारी अनुसार स्व. लीलाबाई भंडारी साधु-साध्वी भगवंतों की वेयावच्च सेवा में सदैव अग्रणी रहती थीं। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन को धर्म, तप, जप और आराधना के लिए समर्पित कर दिया था। पुण्य सम्राट श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी महाराज साहेब की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उन्होंने अनेक कठिन और विशिष्ट तपों की आराधना कर धार्मिक क्षेत्र में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। स्व. भंडारी ने अपने जीवनकाल में 9 बार श्री सिद्धाचल गिरिराज की नवाणु यात्रा, मासक्षमण, 3 वर्षीतप, 500 आयंबिल, बीसस्थानक तप, सिद्धितप, आगम तप, गणधर तप, श्रेणी तप तथा उपधान तप जैसी कठिन साधनाएं संपन्न कीं। इसके अलावा उन्होंने 40 बार नवपद एवं वरण की ओलीजी तप की आराधना की तथा लगातार 55 वर्षों तक नवकार महामंत्र का जाप और आराधना की। पुण्य सम्राट की निश्रा में उन्होंने 5 बार छरि पालित संघ आयोजन का लाभ भी प्राप्त किया। समाजजनों ने बताया कि स्व. लीलाबाई भंडारी ने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को धर्ममय बनाते हुए तप, त्याग और साधना के माध्यम से अनंत पुण्य का संचय किया। अंतिम समय तक वे नवकार महामंत्र की आराधना में लीन रहीं और उसी का जाप करते हुए उन्होंने अपनी नश्वर देह का त्याग किया। उनके आध्यात्मिक जीवन और धर्म साधना को देखते हुए समाज में उन्हें “पुण्यश्लोका” के रूप में सम्मानपूर्वक स्मरण किया जा रहा है । परिवार की आधारशिला थीं लीलाबेन भंडारी स्व. लीलाबेन भंडारी केवल धर्म आराधना और तपस्या के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनुशासित जीवन एवं पारिवारिक मूल्यों के लिए भी जानी जाती थीं। वे अत्यंत अनुशासनप्रिय, सरल एवं स्नेहशील व्यक्तित्व की धनी थीं। परिवारजनों के अनुसार उन्होंने पूरे परिवार को एक माला के मोतियों की तरह प्रेम, संस्कार और आपसी सद्भाव के सूत्र में पिरोकर रखा। उनके मार्गदर्शन, संयमित जीवनशैली और पारिवारिक एकता के प्रति समर्पण ने आने वाली पीढ़ियों को भी संस्कारवान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धर्म, परिवार और समाज के प्रति उनका समर्पित जीवन सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा । जैन श्वेतांबर श्री संघ की ओर से वरिष्ठ समाजसेवी निर्मल मेहता, प्रकाश कटारिया, पूर्व संघ अध्यक्ष संजय मेहता, उपाध्यक्ष तेजप्रकाश कोठारी, अनिल राठौर, मुकेश रुनवाल, नरेन्द्र संघवी, मुकेश लोढ़ा, सचिव रत्नदीप सकलेचा, कोषाध्यक्ष उल्लास जैन, जयेश संघवी, रचित कटारिया, अंकित छाजेड़, निशान शाह, प्रतीक मोदी, प्रतीक मुथा, मनोज नाकोड़ा, हेमेंद्र संघवी, संजय जगावत सहित संघ के पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों एवं बड़ी संख्या में समाजजनों ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
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पुण्यश्लोका तपस्वी लीलाबेन भंडारी का देवलोक गमन, जैन समाज ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
55 वर्षों तक नवकार आराधना करने वाली लीलाबेन भंडारी को श्रद्धांजलि
तप, त्याग और साधना की प्रतिमूर्ति थीं लीलाबेन भंडारी
नवकार महामंत्र का जाप करते हुए पंचतत्व में विलीन हुईं लीलाबेन भंडारी