झाबुआ जिले में सोनोग्राफी सेंटर पर रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता पर उठे सवाल….
विजिटिंग रेडियोलॉजिस्ट और डिजिटल सिग्नेचर से रिपोर्टिंग की व्यवस्था की जांच की जरूरत; पिटोल सहित विभिन्न क्षेत्रों के सेंटर जांच के दायरे मेंझाबुआ। जिले में 25 से अधिक सोनोग्राफी सेंटर एवं अस्पतालों में सोनोग्राफी की सुविधा संचालित होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में इन केंद्रों पर नियमानुसार योग्य एवं पंजीकृत रेडियोलॉजिस्ट अथवा […]
झाबुआ। जिले में स्वास्थ्य विभाग की लचीली कार्य प्रणाली के कारण निजी अस्पताल और क्लीनीक संचालक मनमानी कर रहे हैं जिसका ताजा उदाहरण है कि जिला चिकित्सालय से मात्र 300 मीटर की दूरी पर लबाना हास्पीटल की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत हुई , लेकिन शिकायत को नजरअंदाज किया गया । वही इसी हास्पीटल में बिना वैध पंजीयन केगायनाकोलॉजिस्ट द्वारा आठ माह से उपचार किया जा रहा था। वही सोनोग्राफी सेंटर को भी सील किया गया ।
जिले में 25 से अधिक सोनोग्राफी सेंटर एवं अस्पतालों में सोनोग्राफी की सुविधा संचालित होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में इन केंद्रों पर नियमानुसार योग्य एवं पंजीकृत रेडियोलॉजिस्ट अथवा संबंधित विशेषज्ञ की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से उन सेंटरों की जांच की आवश्यकता बताई जा रही है, जहां रेडियोलॉजिस्ट नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते और विजिटिंग के आधार पर सेवाएं दी जाती हैं। तथा जिन निजी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट है उनका पंजीकरण जिले में है या नहीं…जांच का विषय है… बताया जा रहा है कि जिले के कुछ अस्पतालों एवं सोनोग्राफी सेंटरों पर रेडियोलॉजिस्ट विजिटिंग के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं कुछ स्थानों पर अन्य जिलों में कार्यरत रेडियोलॉजिस्ट द्वारा डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से सोनोग्राफी रिपोर्ट तैयार किए जाने की चर्चा है। ऐसे मामलों में यह जांच का विषय है कि संबंधित विशेषज्ञ की वैध पंजीयन स्थिति क्या है, वह किस सेंटर के लिए अधिकृत हैं तथा सोनोग्राफी सेंटर पर उनकी वास्तविक एवं निर्धारित उपस्थिति किस प्रकार सुनिश्चित की जा रही है साथ ही इन रेडियोलॉजिस्ट/ सोनोलॉजिस्ट का जिले में पंजीयन को लेकर भी जांच की आवश्यकता है । वही एक ऐसा रेडियोलॉजिस्ट है जो सरकारी नौकरी पर जिला चिकित्सालय में पदस्थ है । लेकिन इनका नाम प्राइवेट हॉस्पिटल सेंटर पर नाम दर्शाया गया है जो कि नियमानुसार गलत है । पिटोल सहित कई क्षेत्रों में जांच की मांग झाबुआ शहर के अलावा पिटोल, मेघनगर, राणापुर, पेटलावद सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में निजी अस्पतालों में सोनोग्राफी सेंटर संचालित हैं। पिटोल क्षेत्र में संचालित उन सभी अस्पतालों एवं सेंटरों की विशेष रूप से जांच किए जाने की आवश्यकता बताई जा रही है, जहां सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध है। जांच के दौरान यह देखा जाना आवश्यक है कि संबंधित सेंटर के पास वैध पंजीयन एवं आवश्यक अनुमतियां हैं या नहीं, वहां अधिकृत चिकित्सक की सेवाएं किस प्रकार उपलब्ध हैं तथा सोनोग्राफी करने एवं रिपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित हो रही है या नहीं। चूंकि सूत्रों का कहना है क रिकॉर्ड और डिजिटल सिग्नेचर की भी हो जांच जानकारों के अनुसार यदि किसी सेंटर पर अन्य जिले के रेडियोलॉजिस्ट की सेवाएं ली जा रही हैं तो संबंधित चिकित्सक का पंजीयन, सेंटर के साथ उनका अधिकृत संबंध, विजिटिंग का रिकॉर्ड, सोनोग्राफी की वास्तविक जांच किसके द्वारा की गई तथा रिपोर्ट पर डिजिटल सिग्नेचर किस परिस्थिति में किए गए—इन सभी बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है । साथ ही रेडियोलॉजिस्ट/ सोनोलॉजिस्ट का जिले में पंजीयन आवश्यक है । साथ ही सोनोग्राफी सेंटरों के रिकॉर्ड, मशीनों के उपयोग का विवरण, रिपोर्ट, चिकित्सक की उपस्थिति एवं संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जिले में संचालित सभी सेंटर निर्धारित नियमों एवं शर्तों का पालन कर रहे हैं या नहीं। स्वास्थ्य विभाग से पारदर्शी जांच की अपेक्षा सोनोग्राफी सीधे मरीजों के स्वास्थ्य और उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जांच है। ऐसे में जिले में संचालित प्रत्येक सोनोग्राफी सेंटर की नियमानुसार जांच कर यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि वहां योग्य एवं अधिकृत विशेषज्ञ की सेवाएं उपलब्ध हैं या नहीं। यदि जांच में किसी सेंटर पर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि सभी सेंटर नियमों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसकी स्थिति सार्वजनिक किए जाने से आम मरीजों में भी विश्वास बढ़ेगा। लेकिन सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के जांच दल और इन सेंटरों की मिलीभगत से ही कई हास्पीटलो में स्थाई रूप से रेडियोलॉजिस्ट/सोनोलॉजिस्ट नहीं है । क्या स्वास्थ्य विभाग इन हास्पीटल की मनमानी को लेकर कोई जांच करेगा…. या फिर जांच दल और इनकी जोड़ी यूं ही कार्य करती रहेगी….?
देश दुनिया की ताजा खबरे सबसे पहले पाने के लिए लाइक करे प्रादेशिक जन समाचार फेसबुक पेज
प्रादेशिक जन समाचार स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा मंच है यहाँ विभिन्न टीवी चैनेलो और समाचार पत्रों में कार्यरत पत्रकार अपनी प्रमुख खबरे प्रकाशन हेतु प्रेषित करते है।