झाबुआ – जिले के कई अधिकारी या कर्मचारी के भ्रष्टाचार अथवा आर्थिक नियमितताओं को लेकर प्रकरण लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू में जांच हेतु वर्षों से लंबित पड़े हैं व जिला स्तर से भी इन मामलों को लेकर जांच कहां तक पहुंची है यह बताना तो मुश्किल है लेकिन अब तक इन कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई देखने को नहीं मिली है यह चिंतन का विषय है
जिले के किसी विभाग के कर्मचारीयो के विरुद्ध जांच के प्रकरण जिला स्तर पर चल रहे है व विभिन्न स्तरो पर जांच भी हो रही है किन्तु अब तक इन अधिकारी/कर्मचारीयो की (15-15 वर्षों से पदस्थ होकर भी वर्तमान में कार्यरत हैं । इनमे से संभवतः कुछ को तो पदस्थापना स्थान से नही हटाया गया है । तो एकाध रिटायर भी हो गया तथा एकाध का जीवन भी समाप्त हो गया। किंतु अब तक जांच पूरी नहीं हुई । तत्कालीन समय में निष्पक्ष जांच नहीं होने से मामला आज भी अधर में लटका हुआ । इनमे से कई पर लोकायुक्त में प्रकरण जांच में चल रहे हैं उनमें से एक प्रकरण में वर्ष 2017 से लोकायुक्त मे प्रकरण दर्ज है इनमे एक ही विभाग के तीन कर्मचारी है । वही दूसरा का वर्ष 2020 से लोकायुक्त में प्रकरण जांच में है वहीं एक अन्य कर्मचारी पर वर्ष 2021-22 से लोकायुक्त में प्रकरण चल रहा है तथा इसमे वर्ष 2014-15 एवं 2016-17 में हुए अवैधानिक स्थानांतरण में भ्रष्टाचार को लेकर प्रकरण है । वही एक अन्य अधिकारी पर दर्ज प्रकरण में 2022-23 में विभागीय खरीदी अंतर्गत 35 लाख का घोटाला अंतर्गत फर्जी बिल लगाये गए। वही अन्य प्रकरण में वर्ष 2016 से लोकायुक्त में दर्ज प्रकरण अंतर्गत वर्ष 2004-05 से 2013-14 तक अवैधानिक नियुक्तीया करने पर राशि वसूली को लेकर जांच लंबित है। संभवतः ईओडब्ल्यू में भी जांच चल रही है फिर भी यह व्यक्ति अन्य जिले में पदस्थापना लेकर कार्य भी किया और संभवतः ईश्वर के चरणों में स्थान भी मिल गया । वही तीन कर्मचारीयों पर वर्ष 2022 मे प्रकरण दर्ज हुआ । जिसमें वर्ष 2008-09 से 22-23 तक अवैधानिक रूप से कांटीजेंसी पदो पर नियुक्तीया पर तीन तीन-लाख रुपये अनुकंपा नियुक्तीया करने हेतु, वर्ष 2019 में स्थानांतरण नीति के विरुद्ध स्थानांतरण के नाम पर 50-50 हजार रु वसूली की लेकर जाँच चल रही है । वर्ष 2012-13 से 2022-23 तक 300 से अधिक पदो पर कांटीजेंसी पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर भ्रष्टाचार को लेकर जांच लंबित है वही मेघनगर ब्लाक अंतर्गत 23 कांटीजेसी कर्मचारी की सेवा समाप्त करने व पुनः 50-50 हजार रु राशि लेकर फिर से नौकरी पर रखने को लेकर जांच अब तक चल रही है। इस तरह अनेक जांचो में एक ही विभाग के कई कर्मचारी लिप्त होकर,लाखों करोड़ों रुपए कांटीजेंसी पदों पर नियुक्ति को लेकर हज्म कर गए हैं । सूत्रों का कहना है कि विभिन्न प्रकरण में जांच दल आता है लेकिन उन्हें गबन व वित्तीय अनियमितता से संबंधित रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं या फिर जांच दल भी आर्थिक रूप से प्रभावित होता होगा , अन्यथा इतने वर्षों बीत जाने के बाद भी जांच पूर्ण नहीं होना भी जांच का विषय है यदि इन कर्मचारियों की संपत्ति, बैंक खातों और अन्य संपत्ति कार जीप आदि की जांच की जावे तो सबकुछ पता चल सकता है । इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति कैसे अर्जित की जा रही है उसकी भी जांच होना चाहिए । सूत्रों का कहना है एक ही विभाग के कई कर्मचारी जिन पर विभिन्न मामलों में जांच चल रही है। उनमें किसी के पास 3- 4 मकान या भूमि है और कई चार पहिया वाहन भी है और आलिशान बंगला भी है । आने वाली खबरों में इन अधिकारी / कर्मचारी के नाम और विभाग का नाम के साथ ही किन किन वर्षो में लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में जांच चल रही है और लंबित है इसका खुलासा करेंगे ।
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