Connect with us

झाबुआ

जिले में किराए के लाइसेंस या बिना फार्मासिस्ट के, कई मेडिकल स्टोर का संचालन जारी….

Published

on

झाबुआ – जिले में स्वास्थ्य विभाग और ड्रग इंस्पेक्टर की अनदेखी के चलते कई मेडिकल स्टोर्स किराये के लाइसेंस पर संचालित हो रहे हैं। जिले के पेटलावद, मेघनगर ,थांदला, राणापूर , कालीदेवी आदि अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मेडिकल स्टोर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, जहां पंजीकृत फार्मासिस्ट की मौजूदगी ही नहीं है। हैरानी की बात तो यह है कि इन मेडिकल दुकानों का संचालन ऐसे लोग कर रहे हैं जिनके पास न कोई मेडिकल डिग्री है, न फार्मेसी की औपचारिक शिक्षा।

किराए के लाइसेंस पर मेडिकल स्टोर का संचालन

झाबुआ जिले में अवैध रूप से किराए के फार्मासिस्ट लाइसेंस पर मेडिकल स्टोर चल रहे हैं । ऐसे मेडिकल स्टोर की संख्या शहर के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है । बिना किसी मेडिकल डिग्री के  अल्पशिक्षित स्टाफ इन मेडिकल स्टोर का संचालन कर रहे हैं या दवाइयां का विक्रय धड़ल्ले से कर रहे हैं  । जो आम जनता की स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है । यह सब कुछ स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से हो रहा है, जो समय-समय पर जांच करने के लिए बाध्य तो हैं लेकिन लिपापोती में व्यस्त रहते हैं । वही मेडिकल स्टोर संचालक और विभाग की आपसी तालमेल से सब कुछ संभव हो रहा है ।

बिना फार्मासिस्ट मेडिकल स्टोर चलाया तो 3 महीने की सजा

नियमानुसार मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट का रहना अनिवार्य है लेकिन यदि समय समय पर जांच की जाए , तो शायद ही उपलब्ध होंगे । वही फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 42 के अनुसार, केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट ही डॉक्टर की पर्ची पर दवाइयां विक्रय कर सकता है। नियम तो यह भी कहता है कि किसी गैर-पंजीकृत व्यक्ति द्वारा दवा वितरण करते पाए जाने पर 3 महीने की जेल या 2 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। इतना ही नहीं, एम.पी. स्टेट फार्मेसी काउंसिल द्वारा ऐसे फार्मासिस्ट का पंजीयन निरस्त किया जा सकता है। लेकिन सख्त कानून होने के बावजूद कारवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूर्ण हो रही है।

नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निरस्त की कारवाई की जाना है

8 अक्टूबर को म.प्र. फार्मेसी काउंसिल, भोपाल ने सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देशित किया था कि मेडिकल पर फार्मासिस्ट की मौजूदगी अनिवार्य है। आदेश में साफ कहा गया था कि नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। लेकिन आदेश जारी हुए हफ्तों बीत चुके हैं,लेकिन सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जा रही है । वही धरातल पर कुछ ओर ही नजारा देखने को मिल रहा है। वही कारवाई के अभाव में जिले में अवैध रूप से संचालित मेडिकल स्टोर्स की संख्या बढ़ती जा रही है।

आदेशों की अवहेलना

जब देशभर में जहरीले कफ सिरप से 25 बच्चों की मौत के बाद सरकार सजग हो रही है, तब झाबुआ में जिम्मेदार अधिकारी अब भी नींद में हैं। वही नियमों के तहत मेडिकल स्टोर संचालक को बिना प्रिस्क्रिप्शन के दवाई नहीं दिए जाने को लेकर भी आदेश दिए गए है । बिना फार्मासिस्ट मेडिकल स्टोर का संचालन नहीं किए जाने को लेकर नियम है फिर भी इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है और एक तरह से माना जाए तो आदेशों की अवहेलना हो रही है चूंकि संबंधित विभाग मात्र खानापूर्ति में लगा है ।

प्रशासन किसी दुघर्टना का इंतजार कर रहा है

वर्तमान कार्यप्रणाली से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन किसी  दुर्घटना का इंतज़ार कर रहा है? या फिर कोई मासूम इन मेडिकल स्टोर्स की लापरवाही का शिकार हो, तब जाकर जांच होगी…? प्रशासन को चाहिए कि सरकार के निर्देशों का कड़ाई से पालन करवाया जाए।  मेडिकल स्टोर की लगातार जांच हो , ड्रग इंस्पेक्टरों की जवाबदेही तय हो और आमजन को सुरक्षित और प्रमाणित सेवाएं उपलब्ध कराई जाए ।

देश दुनिया की ताजा खबरे सबसे पहले पाने के लिए लाइक करे प्रादेशिक जन समाचार फेसबुक पेज

प्रादेशिक जन समाचार स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा मंच है यहाँ विभिन्न टीवी चैनेलो और समाचार पत्रों में कार्यरत पत्रकार अपनी प्रमुख खबरे प्रकाशन हेतु प्रेषित करते है।

Advertisement

Subscribe Youtube

Advertisement

सेंसेक्स

Trending

कॉपीराइट © 2025. प्रादेशिक जन समाचार

error: Content is protected !!