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झाबुआ

झाबुआ बीईओ जय नारायण बैरागी की मनमानी से शिक्षक परेशांन*

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जुनियर को बना दिया प्रभारी प्राचार्य, क्या प्राचार्य बीईओ के दबाव में कर रहा है कार्य…?

आदेश जारी करना उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता बावजूद उसके फरफान जारी किया गया। 

बीईओ झाबुआ की हो जाए उच्च स्तरीय जांच तो खुलेंगे कई राज.?

झाबुआ। विकास खंड अधिकारी झाबुआ के जय नारायण बैरागी अपने मनमाने रवैये के लिए जाने जाते है। अपने पद का दुरूपयोग करते हुए विटामिन एम की खुराक पर भरोसा करते है। हाल ही मे जिला मुख्यालय की रातितलाई स्कूल मे प्रभारी प्राचार्य का प्रभार देने मे नियमो का उलंघन करते हुए अनुभवहिंन शिक्षिका को प्रभारी बना दिया। इस तरह बीईओ पर कई गंभीर आरोप कनिष्ठ कर्मचारी दबी जुबा से लगा रहे है।

दबी जुबा में शिक्षा जगत के जुड़े शिक्षक कह रहे.!

विकास खंड अधिकारी झाबुआ के बीईओ जय नारायण बैरागी के फैसले शिक्षकों को रास नहीं आ रहे है। शिक्षक दबी जुबान में कह रहे हैं की सिनीयर को तवज्जो देने के बजाय जूनियर को नियम विरुध आदेश जारी किये जा रहे है। विश्वसनीय विभागीय सूत्रों के मुताबिक झाबुआ विकास खंड अधिकारी जय नारायण बैरागी की कार्यप्रणाली शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है। इस तरह दबी जुबा में शिक्षा जगत के जुड़े शिक्षक कह रहे हैं। विभाग समय रहते सजग नहीं हुआ तो अलीराजपुर जिले के कट्टीवाड़ा व उदयगढ़ के बीईओ की कार्यप्रणाली पूरे प्रदेश भर में सुर्खियां मे रही थी, कही ऐसा ही झाबुआ जिला मुख्यालय पर  बैरागी की कार्य प्रणाली के चलते दोहराया जा सकता है। क्योंकि बैरागी मुख्यालय पर शुरू से ही अंगद की पेड़ की तरह फेविकोल के मजबूत जोड़ के समान चिपके हुए हैं। जन चर्चा है की यह बीईओ का पद भी उन्होंने विटामिन एम की खुराक देकर हासिल किया है। पूर्व मे इनकी जगह बीईओ दिपेश सोलंकी पदस्थ रहे जो मात्र 59 दिन ही सेवा दे पाए और उन्हे प्रशासनिक आदेश के कारण थादला जाना पड़ा। बड़े स्तर तक जुगाड़ रखने वाले बैरागी ने मुख्यालय पर पदस्थ रहने का जुगाड़ कर लिया, शिक्षक नाम में छापने की शर्त पर कह रहे हैं कि यदि प्रशासन को इनका प्रमोशन करना था तो अन्य स्थान पर पदस्थ किया जा सकता था। इनके पक्षपात पूर्ण कार्यप्रणाली के चलते शिक्षा जगत से जुड़े शिक्षक आये दिन परेशांन है।

*जुनियर को बनाया प्रभारी प्रचार्या*

पीएम श्री एकीकृत शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रातीतलाई झाबुआ मे बीईओ बैरागी का हस्त्तक्षप नियमो को तार-तार करने  वाला है। अधीनस्थ योग्य शिक्षक को प्रभार देने के बजाय अपने चहेते शिक्षक जो की जी हुजूरी करते नहीं थकते उन्हे प्रभारी प्राचार्य बना कर बैठा दिया गया।
इस तरह के आदेश जारी करना उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता बावजूद उसके फरफान जारी किया गया। नियम के मुताबिक यह आदेश सहायक आयुक्त के जरिए जारी होना था, लेकिन अपनी रोटियां सेंकने के माहिर झाबुआ बीईओ जयनारायण बैरागी अपने आप को कम नहीं आकते है। प्रशासनिक स्तर से कुछ ही समय बाद रातीतलाई स्कूल में प्राचार्य की नियुक्ति प्रशासनिक स्तर से हो गई थी,जिसके कारण जयनारायण बैरागी बीईओ की उम्मीदों पर पानी फिर गया।

*अधीनस्थ कर्मचारियों से पक्षपात*

बीईओ बैरागी पद पर बैठते ही अपनी मनमानी ओर अधिनस्थो को परेशांन करने का रुख ले लिया। ऐसे पक्षपात रवैये से संस्थाओ मे शिक्षक दो हिस्सों मे बट चुके है। यहाँ बीईओ का फैसला शिक्षकों को रास नहीं आ रहा है। मामले मे शिक्षक दबी जुबान में इनकी कार्य शैली पर सवालिया उंगलीया उठाने मे लगे है। जिला मुख्यालय की शालाओ मे सिनियर शिक्षको को तव्वजो नहीं दी जाती है। शिक्षक इतने परेशांन है की पर्सनल सोशल मीडिया पर इनकी करतुतो को बया कर अपनी भडास निकाल रहे है।

जुगाड़ू पहुँच रखने वाला बीईओ..?

बैरागी विभाग मे अलग अलग जगहो पर पदस्थ रहकर अपनी करतातानी दिखता रहा है। जुगाड़ू होने के कारण वर्षों से कुंडली मार कर इधर उधर पदस्थ रहा है। बीईओ के पूर्व ए.ओ. व सी.ओ., के पद पर भी पदस्थ रहे है। बैरागी अपने मनमाने फरमान जारी करने मे माहिर माने जाते है। जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी तक अपनी लंबी पहुँच रखने वाले जुगाड़ू बीईओ की कार्य शैली से अधीनस्थ शिक्षक व शिक्षिकाएं परेशांन है।

*विटामिन एम की खुराक का खेल*

मुख्यालय स्थित पीएम श्री एकीकृत शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रातीतलाई झाबुआ के शिक्षक फिलहाल में बीईओ के प्रभारी प्राचार्य के आदेश जारी होते ही दो भागों में बट गए हैं। ऐसे तो प्रभारी प्राचार्य का महत्व तब खत्म हो गया, जब प्रशासनिक स्तर पर चली प्रक्रिया के चलते प्राचार्य नियुक्ति का फरमान कार्यालय पहुँचा। जिसके कारण बीईओ व नम्रता जैन जिसको प्रभारी प्राचार्य बनाया उसकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। शिक्षक दबी जुबान में कह रहे हैं कि सीनियर शिक्षक को शुरू से ही तवज्जो ना देते हुए जूनियर शिक्षक को क्यों प्रभारी प्राचार्या का दायित्व सोपा गया, जो विभागीय प्राचार्य आने के बाद भी जूनियर शिक्षक प्रभारी प्राचार्य के दायित्व का निर्वहन कर रहा है। जबकि प्राचार्य संस्था पर उपलब्ध नहीं हो तो सीनियरटी के आधार पर  अन्य शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य का दायित्व का पालन करना होता है, लेकिन यहां साहब के अपने निजी नियम कानून लगा रखे है, जिसके चलते अपना फरमान जारी कर अयोग्य शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य बना दिया गया। जिससे ऐसा लगता है कि यहां सीनियर शिक्षकों की कोई वैल्यू ही नहीं है, शिक्षकों को ऐसा लगने लगा है, सब कुछ विटामिन एम की खुराक का खेल है। सिनियरिटी विटामिन एम की खुराक के आगे शून्य है। विभाग को इनके मनमाने रवैये से जारी हुए सारे आदेशों की उच्च स्तरीय जांच की जाए तो सारे कारनामो से परते खुल जाएगी.?

*नियम कायदों को ताक में रखकर मनमानी गतिविधियों को अंजाम*

सोशल मीडिया से प्राप्त वायरल आदेश के फोटो को लेकर कई बाते सुनने मे आ रही है। उनके अधिकार क्षेत्र में यह आदेश नहीं दे सकते है, जबकि यह आदेश शिक्षा अधिकारी के आदेश से होना था। यह तो गनीमत रही की कुछ ही समय बाद ही प्रशासनिक स्तर से ही इस पद का दायित्व प्रशाशनिक स्तर पर प्राचार्य के पद पर अरुण मिश्रा जो की बड़वानी से स्थांतरित होकर दिनाक 18 अगस्त 2025 पदस्थ हुए। इसके पर्व बीईओ अपने नियम कानून चलाने मे लगे रहे है। शिक्षा विभाग में जिला मुख्यालय पर ऐसे कुछ अधिकारी वर्षों से जमे हुए हैं, जो अपने प्रभाव और सामाजिक व राजनीतिक साठ गांठ से उपजी शक्ति का उपयोग अपने गृह नगर में जमे रहने तथा येन केन प्रकरेण पदोन्नति पाकर अपना हित साधने में लगे हए हैं। ऐसे अधिकारी नियम कायदों को ताक में रखकर मानवांछित गतिविधियों को अंजाम देते हैं।

*अंदर ही अंदर विभागीय विरोध जारी*

नाम न छापने की शर्त पर शिक्षक तो यहां तक बताते हैं कि इस मलाई दार पद खंड शिक्षा अधिकारी  झाबुआ का बनते ही इन्होंने अपनी बाजीगरी दिखाना शुरू कर दिया, इसी दौरान मुख्यालय पर स्थित रातीतलाई माध्यमिक शाला के प्राचार्य रविंद्र सिंह सिसोदिया सेवानिवृत हो गये। शासकीय नियम अनुसार उक्त शाला पर किसी सेवा निवृत्त पर तत्काल व्यवस्था संचालन के लिए संस्था के किसी वरिष्ठ तथा अनुभवी कर्मचारी को प्रभारी प्राचार्य बनाया जाता है लेकिन बैरागी ने अपने अधिकारों व कथित लालसा मे माध्यमिक शाला रातितलाई में एक कनिष्ठ तथा अनुभवहीन महिला शिक्षिका को प्रभारी प्राचार्य पद पर बैठा दिया गया। खंड शिक्षा अधिकारी बैरागी द्वारा नियुक्ति को लेकर बैरागी का रवैया पक्षपात पूर्ण है।

दबाव में कर रहा है कार्य…?

बीईओ बैरागी अपने पद का दुरूपयोग करना बखूबी जानते है, इसलिए अपने आदेश का पालन स्कूल मे प्राचार्य के रूप मे नियुक्त अरुण मिश्रा को आज भी करवा रहे है। जानकारी  के मुताबिक श्री मिश्रा एक शिफ्ट रातीतलाई स्कूल में प्राचार्य की करते है ओर दूसरी शिफ्ट कार्यालय में ए.ओ. के पद की। इस दौरान प्रभारी प्राचार्य भी स्कूल मे अपनी भूमिका निभाती है। अरुण मिश्रा की अनुपस्थिति में वह जूनियर को ही अपना दायित्व देकर जा रहे हैं इससे ऐसा प्रतीत होता है कि वह भी के दबाव में कार्य कर रहे हैं.? शिक्षा जगत से जुड़ा एक नारा है उसमें कहा गया है कि पढ़ोगे तो आगे बढ़ोगे लेकिन यह नारा विटामिन एम की खुराक के आगे यह नारे सारे फेल
नजर आ रहे है।

जिम्मेदार बोले…

पीएम श्री एकीकृत शासकीय बालक उच्चतर  माध्यमिक विद्यालय रातीतलाई के प्राचार्य से जब पूछा गया कि आपकी अनुपस्थिति में किसे चार्ज दे जाते हैं तो उन्होंने भी कहा कि श्री जैन को दायित्व सौंप कर मुझे 2.30 बजे के लगभग कार्यालय में ए.ओ. का चार्ज भी मेरे पास तो मुझे वहां भी जाना होता है।


रातीतलाई स्कूल में किसको चार्ज देकर जाते हैं यह मुझको पता नहीं, मेरे नालेज में अभी नहीं है, वही कार्यक्षेत्र में आदेश नहीं आता है इन दोनों को मैं दिखवा लेती हुं।
सुप्रिया बिसेन सहायक आयुक्त अधिकारी

झाबुआ 1-  आदेश जारी करना उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता बावजूद उसके फरफान जारी किया गया।
झाबुआ 2-  झाबुआ बीईओ जय नारायण बैरागी की मनमानी से शिक्षक परेशांन*
झाबुआ 3-   पीएम श्री एकीकृत शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रातीतलाई
6झाबुआ 4-  माध्यमिक विद्यालय रातीतलाई प्राचार्य के रूप मे नियुक्त अरुण मिश्रा

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