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झाबुआ

स्वास्थ्य विभाग द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम का बनाया जा रहा मजाक

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झाबुआ – स्वास्थ्य विभाग द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर अगले माह करीब एक वर्ष बीतने को है और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज दिनांक तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है और प्रथम अपील लगाने के बाद भी आवेदक को जानकारी नहीं दी जा रही है और इस तरह स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस अधिनियम को मजाक बनाया जा रहा है । प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है ।

जानकारी अनुसार 3 मार्च 2025 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जिले में एक आवेदक द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय से जानकारी मांगी गई है । प्राप्त आवेदन के अनुसार आवेदक ने धारा 6(1) के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत कर कार्यालय से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी तत्कालीन / बीएमओ पेटलावद से संबंधित शाखा/कार्यालय में पदस्थ प्रभारी/कर्मचारी द्वारा कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से लेकर वर्तमान तक की जानकारी उपलब्ध कराई जाए । तत्कालीन बीएमओ को किस दिन से प्रभार दिया गया था उस दिनांक से प्रभारी रहते हुए  दिनांक तक, (उनके कार्यकाल के दौरान) सामग्री खरीदी व बिलो के भूगतान व अन्य व्यय के बिल व भुगतान दस्तावेजो की सत्य प्रतिलिपी की मांग की है । साथ ही उक्त अवधि में किए गए कार्यों, आदेशों तथा अन्य प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी मांगी गई है । लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवेदक को समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई । तथा उक्त जानकारी के लिए आवेदक को कार्यालय के चक्कर लगवाए जा रहे हैं । तत्पश्चात आवेदक ने प्रथम अपील के अंतर्गत भी जानकारी की मांग की गई है । लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा फिर भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है । आवेदक द्वारा करीब तीन मार्च 2025 को आवेदन दिया था और अगले माह करीब एक वर्ष भी पूर्ण हो जायेगा । इस तरह स्वास्थ्य विभाग द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी उपलब्ध न कराकर इस अधिनियम का माखौल उड़ाया जा रहा है । प्रश्न है कि आखिर क्यों स्वास्थ्य विभाग द्वारा तत्कालीन बीएमओ के कार्यकाल की जानकारी नहीं दी जा रही है……? किसी आर्थिक लालच के कारण या फिर किसी दबाव के कारण या फिर अन्य कोई कारण….?

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