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झाबुआ

क्षत्रीय भावसार समाज द्वारा माँ हिंगलाज जयंती हर्षोल्लास से मनाई गई

माँ दक्षिणी महाकालिका मंदिर परिसर में माता के समक्ष की महाआरती

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झाबुआ।

क्षत्रीय भावसार समाज झाबुआ द्वारा चैत्र कृष्ण पक्ष की तेरस तिथि पर माता हिंगलाज की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। नगर के श्री दक्षिणी महाकालीका माता मंदिर परिसर स्थित माँ हिंगलाज मंदिर पर झाबुआ नगर का भावसार समाज एकत्रित हुआ। यहां विधि विधान से माता हिंगलाज की पूजा अर्चना और महा आरती की गई। इस अवसर पर समाज की महिलाओं द्वारा मंगलगीत गाए गए।

समाज सदस्य अंबरीष भावसार ने बताया पौराणिक कथा अनुसार जब माता सती ने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए थे। उस समय भगवान महादेव ने दुखी और क्रोधित हो माता के पार्थिव शरीर को उठाकर तांडव किया था, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता के पार्थिव शरीर के टुकड़े किए। माता के पार्थिव शरीर के अंग धरती पर जहाँ – जहाँ गिरे। ऐसे सभी 52 स्थान पर वर्तमान में माता के 52 शक्तिपीठ स्थापित है।  इन सब में सबसे प्रधान शक्तिपीठ वर्तमान में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगुल नदी के निकट एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। यह वही स्थान बताया है, जहाँ माता सती का ब्रह्म रंध्र ( सिर का ऊपरी हिस्सा )  गिरा था। धार्मिक दृष्टि से यह तप और साधना का प्रमुख केंद्र है। उल्लेखनीय है की माता हिंगलाज,  क्षत्रीय भावसार समाज सहित देशभर के विभिन्न क्षत्रिय समाजो की भी प्रधान देवी है।

हिंगलाज जयंती समारोह में समाज के श्री कीर्ति  भावसार, श्री नंदकिशोर भावसार, श्री दौलत भावसार , श्री बालकृष्ण भावसार, श्री किशोर भावसार, श्री शेलेन्द्र भावसार , श्री संतोष भावसार, श्री धर्मेंद्र चावड़ा, श्री दीपक भावसार सहित समाज के सभी युवा,  महिलाएं और बच्चे सम्मिलित हुए।

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