मेघनगर। शहर की जनसमस्याओं और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर 9 जून को संदीपनी स्कूल में आयोजित कलेक्टर की विशेष जनसुनवाई में दिए गए आवेदन पर तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नागरिकों में निराशा और असंतोष का माहौल है। लोगों का कहना है कि जनसुनवाई का उद्देश्य आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान है, लेकिन जब समय पर कार्रवाई नहीं होती तो इसकी उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सिंह सोनगरा ने जनसुनवाई में कलेक्टर को विस्तृत आवेदन सौंपकर शहर की आठ प्रमुख समस्याओं और जनहित से जुड़ी मांगों से अवगत कराया था। इन समस्याओं का समाधान होने पर हजारों नागरिकों को सीधा लाभ मिल सकता है, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर अमल होता दिखाई नहीं दिया।
जनसुनवाई में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
रेलवे ओवरब्रिज की जर्जर सड़क व बंद स्ट्रीट लाइटें: लंबे समय से खराब सड़क और बंद लाइटों के कारण रात में दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
सार्वजनिक शौचालय का अभाव: शहर के प्रमुख चौराहों पर सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से लोग खुले में शौच और पेशाब करने को मजबूर हैं, जिससे महिलाओं और युवतियों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
जर्जर सड़कें: मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना के तहत बनी कई सड़कें गारंटी अवधि के बावजूद बदहाल हैं और मरम्मत नहीं हो रही।
अस्पताल में सुविधाओं की कमी: शासकीय अस्पताल में शुगर और बीपी मरीजों के लिए एनसीडी क्लीनिक शुरू करने तथा मरीजों के परिजनों के लिए पेयजल एवं शौचालय की व्यवस्था की मांग की गई।
साईं चौराहा यात्री प्रतीक्षालय की बदहाली: नियमित साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
जन औषधि केंद्र बंद: आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था द्वारा संचालित जन औषधि केंद्र एक वर्ष से अधिक समय से बंद है, जिससे गरीब मरीजों को सस्ती दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं।
निर्माणाधीन सड़क से उड़ रही धूल: स्तलाम-फुलमाल मार्ग निर्माण अधूरा होने से बिसाजन माता मंदिर से तेजाजी मंदिर तक धूल का गुबार बना रहता है। निर्माण पूरा होने तक नियमित पानी का छिड़काव कराने की मांग की गई।
रेलवे क्रॉसिंग पर फुटओवर ब्रिज की आवश्यकता: रेलवे लाइन के कारण शहर के चार वार्ड अलग हो गए हैं। अस्पताल, स्कूल और घनी आबादी तक पैदल आने-जाने वाले हजारों लोगों, विशेषकर स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जनसुनवाई की प्रभावशीलता पर उठ रहे सवाल
शहरवासियों का कहना है कि जनसुनवाई तभी सार्थक मानी जाएगी, जब उसमें प्राप्त शिकायतों और सुझावों पर समयबद्ध कार्रवाई हो। तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी किसी भी मांग पर प्रगति नहीं दिखने से लोगों में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर जनसुनवाई में दिए गए आवेदनों का क्या होता है। साईं चौराहे पर व्यवसाय करने वाले धर्मेंद्र पाटीदार और शैलेश पटेल, जितेंद्र जैन ने बताया कि यहां पर शौचालय की व्यवस्था न होने से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, पूर्व में एक शौचालय यहां पर बना था जिसे नगर परिषद ने डिस्मेंटल कर दिया मगर महीना बीत जाने के बाद भी उसका निर्माण नहीं कराया।
कलेक्टर से की अपील
नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जनहित से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई कर मेघनगर की हजारों आबादी को राहत प्रदान की जाए। शैक्षणिक सत्र शुरू होने ओर रेलवे द्वारा रेल लाइन क्रासिंग को बंद करने से स्कूली विद्यार्थियों को स्कूल आने जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लिहाजा जिला प्रशासन रेलवे के साथ सामंजस स्थापित कर फुट ओवर ब्रिज की सौगात दिला देता है तो यह हजारों लोगों को राहत देने वाला मुद्दा शामिल होगा।