झाबुआ। भारतीय मजदूर संघ के देशव्यापी आह्वान पर सोमवार को जिला मुख्यालय झाबुआ में श्रमिकों एवं कर्मचारियों की विभिन्न न्यायोचित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया गया। जिले के विभिन्न विभागों, कर्मचारी संगठनों एवं श्रमिक संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर आंदोलन में भाग लिया। भारतीय मजदूर संघ के विभाग प्रमुख सौरभ पोरवाल, जिला अध्यक्ष मोहन प्रजापति एवं जिला मंत्री मेहरसिंह सोलंकी के नेतृत्व में श्रमिकों एवं कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर वैशाली सोलंकी को ज्ञापन सौंपा। देशभर में एक साथ आयोजित इस आंदोलन के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार का ध्यान श्रमिकों, कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, दैनिक वेतनभोगियों एवं योजना कर्मियों की लंबित समस्याओं की ओर आकर्षित कराया गया। देशव्यापी 11 सूत्रीय प्रमुख मांगें भारतीय मजदूर संघ की प्रमुख मांगों में राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन ₹30,000 प्रतिमाह करना, ESIC की वेतन सीमा ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 करना, न्यूनतम EPS पेंशन ₹7,500 प्रतिमाह प्लस VDA करना, EPF की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹30,000 करना तथा बोनस पात्रता सीमा ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 करना प्रमुख है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी, आशा, NHM, मिड-डे-मील सहित योजना कर्मियों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, ठेका एवं संविदा कर्मचारियों को समान काम का समान वेतन, श्रम संहिताओं में आवश्यक संशोधन, ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा ₹40 लाख तथा बैंक कर्मचारियों के लिए 5-Day Work Week लागू करने की मांग की गई है। मध्यप्रदेश की 57 सूत्रीय मांगों में प्रमुख कर्मचारी हितों के मुद्दे.. मध्यप्रदेश की 57 सूत्रीय मांगों में वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण, वेतन विसंगति, पदोन्नति, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य सेवा लाभ से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। दैनिक वेतनभोगी एवं विनियमित कर्मचारी: 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके दैनिक वेतनभोगियों को नियमित/विनियमित कर अनुकंपा, उपादान, अवकाश नगदीकरण एवं सातवें वेतनमान का लाभ देने तथा आकस्मिकता निधि से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की मांग । नगर निकाय कर्मचारी: वर्षों से कार्यरत सफाई कर्मचारियों एवं अन्य दैनिक वेतनभोगियों को नियमित कर उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा एवं सेवा लाभ देने की मांग । अतिथि शिक्षक एवं संविदा कर्मचारी: लंबे समय से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों को सेवा निरंतरता, अनुभव का लाभ एवं भविष्य की सुरक्षा देने तथा संविदा नीति-2023 को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग। शिक्षक एवं शिक्षा विभाग: शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याओं के निराकरण के साथ शिक्षकों को TET परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त रखने की मांग प्रमुखता से रखी गई। पंचायत कर्मचारी: पंचायत सचिवों को समयमान वेतनमान, विभाग में संविलियन, आयुष्मान योजना का लाभ एवं पंचायत समन्वय अधिकारी के पद पर पदोन्नति तथा रोजगार सहायकों को पंचायत सहायक सचिव के पद पर आमेलित करने की मांग। स्वास्थ्य विभाग: संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों को उचित सेवा लाभ, आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि तथा NHM में आउटसोर्स कर्मचारियों को पुनः संविदा में लेने की मांग। ऊर्जा विभाग के आउटसोर्स कर्मचारी: लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित भर्ती में अनुभव एवं आयु सीमा में छूट, जोखिम भत्ता तथा ठेकेदार के माध्यम से भुगतान समाप्त कर कंपनी से सीधे वेतन भुगतान की मांग। राजस्व एवं कोटवार कर्मचारी: पटवारियों के वेतनमान/ग्रेड-पे में सुधार तथा कोटवारों के मानदेय में वृद्धि, समय पर भुगतान एवं सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग। नगरीय निकाय एवं पेंशनर: दैनिक वेतनभोगी एवं विनियमित कर्मचारियों को नियमित/विनियमित कर सातवें वेतनमान एवं चिकित्सा सुविधा देने तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं पेंशनरों के हितों की रक्षा की मांग की गई। सौरभ पोरवाल ने कहा—“यह मेहनतकशों के सम्मान और भविष्य का आंदोलन है” भारतीय मजदूर संघ के विभाग प्रमुख सौरभ पोरवाल ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक विभाग या कर्मचारी वर्ग तक सीमित नहीं है। यह देश और प्रदेश के मेहनतकश श्रमिकों, कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, दैनिक वेतनभोगियों, योजना कर्मियों एवं असंगठित श्रमिकों के सम्मान, अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की सुरक्षा की आवाज है। उन्होंने कहा कि वर्षों से सरकार और समाज की व्यवस्था को मजबूती से चलाने वाले कर्मचारियों एवं श्रमिकों के भविष्य को असुरक्षित नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार को लंबित मांगों पर केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध एवं ठोस निर्णय लेना चाहिए। पोरवाल ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ राष्ट्रहित, उद्योगहित और श्रमिकहित के समन्वय की विचारधारा के साथ कार्य करता है। श्रमिकों की समस्याओं का समाधान संवाद एवं सकारात्मक सहयोग से हो, यह संगठन की प्राथमिकता है। लेकिन मांगों पर उचित निर्णय नहीं होने की स्थिति में संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से देशव्यापी 11 सूत्रीय तथा मध्यप्रदेश की 57 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता रहे उपस्थित ज्ञापन कार्यक्रम में आंगनवाड़ी संघ से गंगा गोयल, संविदा कर्मचारी संघ से प्रशांत शर्मा एवं प्रकाश धाकड़, राज्य कर्मचारी संघ से प्रकाश पालीवाल एवं गजराज दातला, शिक्षक संघ से अनिल कोठारी, संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ से डॉ. वासुदेव पाटीदार, कोटवार संघ से प्रेमसिंह बारिया, पेंशनर संघ से गणेश उपाध्याय, डॉ. मिश्रा एवं गोपालकृष्ण शर्मा, बिजली आउटसोर्स से दिनेश पाटीदार एवं राजेश परमार, रोजगार सहायक संघ से भारत सिंह राठौर, वनवासी ग्रामीण मजदूर संघ से सुनील मचार एवं राधूसिंह भाभोर, रसोइया संघ से सुरजी भगौरा सहित विभिन्न कर्मचारी एवं श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी तथा सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। ज्ञापन का वाचन शिक्षक संघ के अनिल कोठारी एवं राज्य कर्मचारी संघ के प्रकाश पालीवाल ने किया। कार्यक्रम के अंत में आंगनवाड़ी संघ की गंगा गोयल ने उपस्थित सभी पदाधिकारियों, श्रमिकों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट किया कि श्रमिक एवं कर्मचारी हितों से जुड़े इन मुद्दों के समाधान तक संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज लगातार बुलंद करता रहेगा
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