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झाबुआ

हैंडपंप संधारण निविदा में लेबर व परिवहन शामिल, फिर भी ग्रामीणों से मजदूर और भुगतान की मांग

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राणापुर ब्लॉक के चर्च फलिये में करीब एक वर्ष से खराब पड़े दो हैंडपंप, पेयजल के लिए परेशान ग्रामीण
झाबुआ। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप संधारण का कार्य ठेकेदार पद्धति से कराया जाता है। इसके लिए जारी निविदा में संधारण कार्य के साथ मजदूरी एवं सामग्री परिवहन का खर्च भी शामिल होने का उल्लेख है। इसके बावजूद राणापुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत भूरी माटी के डूंगरा रोड स्थित चर्च फलिये में करीब एक वर्ष से खराब पड़े दो हैंडपंपों का संधारण नहीं होने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार के मैकेनिक ने हैंडपंप सुधारने के लिए मजदूरों की व्यवस्था करने और उनका भुगतान करने की शर्त रखी है। इससे विभागीय व्यवस्था और निविदा की शर्तों के पालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक साल से बंद हैं दोनों हैंडपंप, पेयजल के लिए परेशानी
ग्राम पंचायत भूरी माटी के डूंगरा रोड स्थित चर्च फलिये के दोनों हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़े हैं। इनमें पानी नहीं आने के कारण फलिये के रहवासियों को पेयजल के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण राजेश नारू, मगन माली एवं सोहन अमलीयार ने बताया कि दोनों हैंडपंप करीब एक वर्ष से बंद हैं। इस संबंध में पीएचई विभाग को मौखिक रूप से सूचना देने के बावजूद अब तक संधारण कार्य नहीं किया गया।
मैकेनिक ने कहा- मजदूरों की व्यवस्था और भुगतान ग्रामीण करें
ग्रामीणों के अनुसार, सोमवार को ठेकेदार का मैकेनिक हैंडपंप संधारण करने की बात कहने पहुंचा, लेकिन उसने शर्त रखी कि संधारण कार्य के लिए मजदूरों की व्यवस्था ग्रामीणों को करनी होगी और उनका भुगतान भी ग्रामीणों को ही करना पड़ेगा। मैकेनिक ने स्वयं संधारण कार्य करने की बात कही। इस स्थिति से ग्रामीण असमंजस में हैं कि जब हैंडपंप संधारण की निविदा में मजदूरी एवं परिवहन सहित कार्य कराने का प्रावधान है, तो फिर मजदूरों की व्यवस्था और उनके भुगतान की जिम्मेदारी ग्रामीणों पर क्यों डाली जा रही है?
निविदा की शर्तों के पालन पर उठे सवाल
हैंडपंप संधारण कार्य की निविदा में संपूर्ण कार्य लेबर एवं परिवहन सहित स्वीकृत होने की बात सामने आई है। ऐसे में ग्रामीणों से अलग से मजदूरों की व्यवस्था और भुगतान की मांग किए जाने के आरोपों की जांच आवश्यक है। यदि निविदा की शर्तों के अनुसार मजदूरी एवं परिवहन का खर्च ठेकेदार के कार्य में शामिल है, तो ग्रामीणों से अतिरिक्त राशि या श्रम की मांग किए जाने का औचित्य स्पष्ट होना चाहिए । वही राणापुर ब्लाक के ठेकेदार की मनमानी का आलम यह है कि मजदूरी नहीं देने पर संधारण कार्य ही नहीं करवाया जा रहा है
अब सवाल यह है कि करीब एक वर्ष से बंद पड़े दोनों हैंडपंपों का संधारण कब होगा? क्या पीएचई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मौके की स्थिति का निरीक्षण कर ग्रामीणों को राहत दिलाएंगे और निविदा की शर्तों के अनुसार संधारण कार्य सुनिश्चित करेंगे? फिलहाल चर्च फलिये के ग्रामीणों को हैंडपंप चालू होने का इंतजार है।

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