Connect with us

झाबुआ

चार साल के कार्यकाल का अंत, झाबुआ थाना प्रभारी की कार्यशैली पर उठे सवाल

Published

on


दुर्व्यवहार, कथित हठधर्मिता और वाहन चोरी की घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा कार्यकाल; आवेदनों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा जरूरी
झाबुआ। झाबुआ थाना प्रभारी का करीब चार साल का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही उनकी कार्यशैली को लेकर कई सवाल चर्चा में हैं। उनके कार्यकाल के दौरान कथित हठधर्मिता, दुर्व्यवहार और शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर असंतोष की बातें सामने आती रही हैं। अब उनके कार्यकाल में हुई कार्रवाई और पुलिसिंग की समीक्षा किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। वही उन्हें अब जिले में ही काली देवी थाना प्रभारी बनाया गया है ।‌
बताया जाता है कि थाना प्रभारी के व्यवहार को लेकर पुलिस अधीक्षक को मौखिक रूप से भी अवगत कराया गया था। इसके बावजूद शिकायतकर्ताओं की समस्याओं का किस स्तर पर निराकरण हुआ, यह जांच का विषय है। वहीं, एक व्यक्ति पर जालसाजी और ठगी के आरोपों के मामले में कार्रवाई करने के बजाय उसे कथित संरक्षण दिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। आरोप है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कई लोग उसके कथित छलावे का शिकार हुए। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही हो सकती है।
वरिष्ठ अधिकारियों की बात भी नहीं मानी?
राजवाड़ा चौक पर लाइटिंग को लेकर हुए विवाद के दौरान भी थाना प्रभारी की कार्यशैली चर्चा में रही। आरोप है कि इस मामले में उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी के निर्देशों को भी अपेक्षित महत्व नहीं दिया। यदि ऐसा हुआ है, तो यह पुलिस विभाग की अनुशासनात्मक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वाहन चोरी की घटनाओं पर भी उठे सवाल
थाना प्रभारी के कार्यकाल में झाबुआ शहर में दोपहिया वाहन चोरी की घटनाएं भी चिंता का विषय रहीं। इन घटनाओं पर पुलिस की कार्रवाई, चोरी गए वाहनों की बरामदगी और अपराधों की रोकथाम के प्रयासों का आकलन किया जाना जरूरी है। यह भी देखा जाना चाहिए कि चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए गए।
जनप्रतिनिधि से बातचीत भी रही चर्चा में
विधायक कमलेश्वर डोडियार के साथ थाना प्रभारी की कथित सख्त बातचीत का मामला भी चर्चा में रहा। जनप्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों के बीच संवाद में मर्यादा एवं संयम बनाए रखना प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कितने आवेदनों पर हुई कार्रवाई, जवाब जरूरी
थाना प्रभारी के करीब चार साल के कार्यकाल में थाने पर प्राप्त आवेदनों और शिकायतों में से कितनों पर कार्रवाई हुई, कितने आवेदन लंबित रहे और कितने मामलों में शिकायतकर्ताओं को न्याय मिला—इन बिंदुओं की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है। उनका कार्यकाल दो पुलिस अधीक्षकों के कार्यकाल के दौरान रहा, जबकि वर्तमान पुलिस अधीक्षक का कार्यकाल जारी है।
अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी उनके कार्यकाल की शिकायतों, पुलिसिंग व्यवस्था और लंबित आवेदनों की समीक्षा करते हैं या नहीं। पुलिस की कार्यशैली का वास्तविक मूल्यांकन आरोपों से नहीं, बल्कि शिकायतों पर हुई कार्रवाई, अपराध नियंत्रण और आम नागरिकों के प्रति व्यवहार के आधार पर होना चाहिए।

देश दुनिया की ताजा खबरे सबसे पहले पाने के लिए लाइक करे प्रादेशिक जन समाचार फेसबुक पेज

प्रादेशिक जन समाचार स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा मंच है यहाँ विभिन्न टीवी चैनेलो और समाचार पत्रों में कार्यरत पत्रकार अपनी प्रमुख खबरे प्रकाशन हेतु प्रेषित करते है।

Advertisement

Subscribe Youtube

Advertisement

सेंसेक्स

Trending

कॉपीराइट © 2025. प्रादेशिक जन समाचार

error: Content is protected !!