झाबुआ
“आओ पता लगाएं” नगर पालिका में वह कौन अधिकारी है या इंजीनियर जो रिश्वत लेकर बेसमेंट की परमिशन दे रहा है
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विभागीय गलियों से यह भी पता चला है कि बेसमेंट की पमिशन नगर पालिका द्वारा संभवत नहीं दी जाती है। यदि नहीं तो किस आधार पर यह मकान मालिक जमीन खोदकर बेसमेंट बना रहा है। जब शहर के ही कुछ जागरूक नागरिक में इसकी शिकायत नगर पालिका अधिकारी को की तब उन्होंने इंजीनियर गणावा को निर्माण स्थल पर मौका मुआयना हेतु कहा इंजीनियर ने मौका मुआयना करने के बाद यह रिपोर्ट दी कि वहां पर बेसमेंट नहीं खोदा जा रहा है पुटिंग की जा रही है। जबकि देखने पर स्पष्ट नजर आ रहा है कि यहा एक बड़ा बेसमेंट तैयार किया जा रहा है ।
आखिर क्या कारण है कि नगर पालिका इंजीनियर द्वारा संबंधित निर्माण स्थल पर निर्माण रोकने के बजाय मकान मालिक का पक्ष लिया इस बात की गहराई का पता लगाया है तो पता चला कि यहां पर सब इस निर्माण स्थल पर सब कुछ सेटलमेंट हो गया। आओ पता लगाए नगरपालिका में कौन अधिकारी है या इंजीनियर है जो रिश्वत लेकर बेसमेंट की मौखिक परमिशन दे रहा है। इस तरह के अधिकारियों के आर्थिक हितों के कारण लोगों में सरकार के प्रति अविश्वास आता है अब तो बाजारों में यह बात सुनने को मिल रही है कि भाजपा की सरकार आते ही अधिकारी कर्मचारियों की सरकार आ गई है जहां अधिकारी कर्मचारी अपने मनमाने तरीके से काम करेंगे और आर्थिक लाभ को तवज्जो देते हुए जनहित के मुद्दों को नकार देंगे इसके अलावा आम नागरिक खोजेमा बोरा ने भी इस निर्माण कार्य को लेकर शिकायत की थी लेकिन आज तक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई लगता है नगरपालिका में सब कुछ अंधेर नगरी और चौपट राजा की तर्ज पर कार्य चल रहा है अन्यथा जो बेसमेंट खुदाई का काम नजर आ रहा है वह नगरपालिका इंजीनियर को नजर क्यों नहीं आया कहीं ना कहीं आर्थिक लाभ ….. शासन प्रशासन इस ओर ध्यान देकर इस तरह के मौखिक परमिशन पर कोई कार्रवाई होगी या फिर या अधिकारी अपने मनमाने तरीके से ही कार्य करते रहेंगे और प्रदेश में भाजपा की सरकार को रिश्वत के नाम पर कलंकित करते रहेंगे।