झाबुआ – झाबुआ थाना प्रभारी रमेश भास्करे की मनमानी कार्यशाली के साथ-साथ डराने एवं धमकाने को लेकर, आवेदक अजय भूरिया ने जनसुनवाई में थाना प्रभारी पर आरोप लगाते हुए एसपी को आवेदन दिया और झाबुआ पुलिस की इस तानाशाह कार्यप्रणाली से निजात दिलाने की मांग की है ।
आवेदक अजय भूरिया निवासी बिजीया डूंगरी ने 25 मार्च मंगलवार को जनसुनवाई मे आवेदन देते हुए झाबुआ थाना प्रभारी पर डराने और धमकाने का आरोप लगाया । आवेदक ने बताया कि उसने तेरसिंह पिता कालू सोलंकी निवासी कुशलपुरा जिला धार से ₹ 3 लाख उधार लिए थे । इसी कारण कालू सोलंकी धार ने मेरे खिलाफ पुलिस कोतवाली झाबुआ में आवेदन दिया था आवेदन के एवज में झाबुआ पुलिस ने मुझे राशि लौटाने को कहा । तब मै स्वयं आवेदक अजय भूरिया थाने पर राशि एक लाख रूपए लेकर गया और बाकी राशि किस्तों में देने की बात कही । लेकिन इसी दौरान थाना प्रभारी रमेश भास्करे के सामने सब इंस्पेक्टर जितेंद्र चौहान द्वारा मुझे एक थप्पड़ मारा और मानसिक रूप से काफी प्रताड़ित किया और परेशान किया । वही पुलिस ने पूरी राशि लौटने की बात कही और राशि न देने के एवज में जेल भेजने की बात तक कहीं । जबकि आवेदक का कहना है कि थाना प्रभारी को कोई हक नहीं है कि पैसे लेनदेन के मामले में मुझ प्रार्थी को परेशान करना । आवेदक ने आवेदन में यह भी बताया कि पैसे दिलाने का काम कोर्ट का है । इसके अलावा थाना प्रभारी द्वारा मेरे घर के लोगों को पकड़कर थाने में ले जाकर बंद करने की बात भी कहीं और इसके अलावा थाना प्रभारी द्वारा फोन पर भी मुझे राशि लोटाने को लेकर डराया और धमकाया जा रहा है । जबकि राशि लौटाने को लेकर मेने 6 माह का समय देने की बात कही । वहीं थाना प्रभारी भास्करे द्वारा तत्काल रुपए देने को लेकर डराया व धमकाया जा रहा है और मुझे लगातार परेशान किया जा रहा है जिससे मे और परिवार पूर्ण रूप से डरें हुए हैं और सहमे हुए हैं । इस प्रकार आवेदक अजय भूरिया ने आवेदन के माध्यम से थाना प्रभारी झाबुआ रमेश भास्करे की कार्यप्रणाली से अवगत कराते हुए , राशि लौटाने को लेकर परेशान न किए जाने की बात आवेदन के माध्यम से कही ।
जबकि इसी तरह के आपसी लेनदेन के एक मामले में 10 जून 2024 को आवेदक ने पुलिस कोतवाली झाबुआ में आवेदन दिया था तब पुलिस द्वारा 6 माह तक उस आवेदन को लेकर जांच ही करती रही । पुलिस उस आवेदन के मामले में धोखाधड़ी करने वाले के बयान तक दर्ज नहीं कर पाई और 12 फरवरी 2025 को पुलिस कोतवाली झाबुआ द्वारा पत्र के माध्यम से आवेदक को सूचना दी गई , कि इस तरह के मामले आपसी लेनदेन होकर दीवानी किस्म का होना पाया गया है अतः आप अनावेदक के विरुद्ध न्यायालय में वाद प्रस्तुत करें । यदि हम दोनों ही मामले पर गौर करें , तो दोनों ही मामले आपसी लेनदेन के होकर दीवानी किस्म के है । वही एक मामले में पुलिस लगातार अनावेदक के विरुद्ध प्रताड़ित करने वाली कारवाई अपना रही है वहीं दूसरी ओर पुलिस द्वारा आपसी लेन देन का मामला की बात कहकर आवेदन से पल्ला झाड़ लिया है । इस तरह दोहरीनीति के आधार पर झाबुआ पुलिस काम कर रही है जो चिंतन का विषय है क्या पुलिस कप्तान इस और ध्यान देंगे और झाबुआ थाना प्रभारी की इस कार्यप्रणाली को लेकर कोई जांच करेंगे या फिर यह सब कुछ यूं ही चलता रहेगा….?
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