झाबुआ – झाबुआ थाना प्रभारी रमेश चंद्र भास्करे की मनमानी कार्यशाली के चर्च आए दिन सुनने को मिल रहे हैं विगत जून 2024 में शिकायतकर्ता ने जालसाजी व ठगी को लेकर शिकायती आवेदन दिया था कारवाई न होने पर मुख्यमंत्री तक को पत्र भेजा गया था वही विगत दिनों ही आपसी लेन-देन के मामले में भी डराने धमकाने को लेकर जनसुनवाई में आवेदन आया था । हाल ही में जनजाति विकास मंच के जिला संयोजक संजय सोलंकी द्वारा झाबुआ थाना प्रभारी पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने हेतु शिकायती पत्र , स्पीड पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा है तथा पद से हटाने की मांग की है ।
जानकारी अनुसार झाबुआ जिला एक जनजाति बहुल क्षेत्र है जहां सामाजिक कार्यकर्ता विकट परिस्थितियों में समाजहित के लिए कार्य करते हैं वर्तमान में इस क्षेत्र में धर्मान्तरण जैसे कई गंभीर समस्या तेजी से बढ़ रही है जिसे रोकने के लिए समाज एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रशासनिक सहयोग की अपेक्षा रखते है । इसी कड़ी में जनजाति विकास मंच के सदस्यगण मुख्यमंत्री जी के झाबुआ आगमन पर शिकायत पत्र देना चाहते थे। लेकिन संभव नहीं हो सका । तब जनजाति विकास मंच के जिला संयोजक ने झाबुआ टीआई भास्करे पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को शिकायती आवेदन स्पीड पोस्ट के माध्यम से पहुंचाया। शिकायती आवेदन में बताया कि झाबुआ थाना प्रभारी रमेश चंद्र भास्करे एवं एसआई जितेंद्र चौहान द्वारा सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ, लगातार अभद्र व्यवहार कर रहे है न केवल उन्हें थानों से धक्के मार कर बाहर निकलते हैं बल्कि झूठे मामलों में फसाने एवं एफआईआर दर्ज करने की धमकी भी देते हैं । इसके अतिरिक्त धर्मांतरण एवं लव जिहाद में संलिप्त व्यक्तियों को इन अधिकारियों द्वारा संरक्षण प्रदान किया जा रहा है तथा भ्रष्टाचार कर ऐसे मामलों को दबाया जा रहा है । इसी तरह के मुद्दों को लेकर जनजाति विकास मंच ने मुख्यमंत्री को स्पीड पोस्ट किए आवेदन में ओर भी कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा ,इन अधिकारियों के विरुद्ध निम्नलिखित घटनाएं दर्ज की गई ।
1.वर्ष 2015 राणापुर थाना अंतर्गत धर्मांतरण के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करने पर धर्मांतरण करने वालों को संरक्षण दिया गया एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं पर ही एफआईआर दर्ज की गई ।
2.वर्ष 2017 में झाबुआ कोतवाली पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्णकालिक कार्यकर्ता को जबरन थाने में बैठकर प्रताड़ित किया गया।
3.19 अगस्त 2024 ( झाबुआ कोतवाली ) -एक ईसाई पादरी पर, हिंदू महिला के शोषण की शिकायत पर एफआईआर दर्ज तक नहीं की गई । बल्कि सामाजिक कार्यकर्ताओं को ही धमकाकर थाने से भगा दिया गया ।
4. 27 दिसंबर 2024 ( झाबुआ कोतवाली) – सामाजिक कार्यकर्ताओं पर जबरन एफआईआर दर्ज की गई ।
5.18 मार्च 2025 ( पारा चौकी ) – पूरे गांव द्वारा धर्मांतरण कराने वालों पर कार्रवाई करने की मांग पर थाना प्रभारी ने स्पष्ट रूप से मना कर दिया एवं आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज करने की धमकी दी ।
6. वर्ग विशेष के दबाव में हिंदू युवाओं को सामान्य सोशल मीडिया पोस्ट पर भी डराने ,धमकाने एवं कार्रवाई की धमकी दी जाती है ।
7. सीएम हेल्पलाइन शिकायतों पर दबाव – फरियादियों को पुलिस द्वारा डरा धमकाकर शिकायत वापस लेने के लिए मजबूर किया जाता है एवं शिकायत वापस लेने पर अपराधियों को खुली छूट दी जाती है ।
8. अवैध वसूली में संलिप्तता – एक आदिवासी महिला की शिकायत पर ईसाई पादरी के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय , उसके ही परिवार पर एफआईआर दर्ज कर दी गई ।मामला न्यायालय में लंबित है
उपरोक्त घटनाओं के माध्यम से जनजाति विकास मंच के जिला संयोजक ने आऱोप लगाते हुए स्पष्ट किया है कि झाबुआ कोतवाली थाना प्रभारी रमेश चंद्र भास्करे एवं एसआई अपने पदों का दुरुपयोग कर रहे हैं तथा जनजाति समाज एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के हितों के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं । जनजाति विकास मंच झाबुआ ने मांग की है कि थाना प्रभारी रमेशचंद्र भास्करे एवं एसआई जितेंद्र चौहान को अविलंब झाबुआ से हटाया जाए तथा इस क्षेत्र में धर्मांतरण करने, लव जिहाद एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले पुलिस अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए व जनजाति क्षेत्र में विधि एवं व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु निष्पक्ष अधिकारियों की नियुक्ति की जाए । इस आवेदन की प्रतिलिपि भी म.प्र शासन के गृह विभाग व एडीजी ला एंड आर्डर , म.प्र शासन को भी दी गई है। इसके अलावा हाल ही में कुछ दिनों पूर्व ही जनसुनवाई में अनावेदक अजय भूरिया द्वारा झाबुआ थाना प्रभारी रमेश चंद्र भास्करे द्वारा आपसी लेनदेन के मामले में डराने व धमकाने को लेकर जनसुनवाई में आवेदन दिया था। विगत जून 2024 में भी ठगी व धोखाधड़ी करने वाले शख्स को लेकर शिकायती आवेदन दिया गया था । लेकिन थाना प्रभारी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की व आपसी लेनदेन का मामला कहकर पल्ला झाड़ लिया था । जबकि वह शख्स पूर्व में कई लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुका है । क्या शासन प्रशासन इस ओर ध्यान देगा या फिर यह सब कुछ यूं ही चलता रहेगा…..?
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