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झाबुआ

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन समाज की सती मंडल का नगर में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश हुआ ।

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झाबुआ – जिन शासन गौरव आचार्य प्रवर पूज्य गुरुदेव श्री उमेश मुनि जी म.सा अणु के शिष्य बुद्ध पुत्र प्रवर्तक देव पूज्य  जिनेंद्र मुनि म सा की आज्ञानुवर्ती पूज्या श्री प्रज्ञा जी म सा ,  हितज्ञा जी म सा, सौम्यप्रभा जी म सा , निष्ठा जी म सा , पूर्णता जी महाराज साहब आदि ठाणा- 5 का झाबुआ नगर में चातुरमासिक मंगल प्रवेश उत्साह,उमंग, उल्लास और हर्ष के वातावरण में पूर्ण सादगी के साथ अणु उमेश-गुरु जिनेन्द्र के जयकारों के बीच हुआ । पूज्या महासती जी  की अगवानी हेतु नवयुवक मंडल एवं बालिका मंडल के सदस्य शहर से 7 किलोमीटर दूर ग्राम फुटिया अल सुबह पहुंचे । सती मंडल की प्रवेश यात्रा सकल जैन श्री संघ की उपस्थिति में कल्याणपुरा मार्ग से प्रवेश करते हुए दिलीप गेट,बस स्टैंड, मेंन रोड होते हुए रुनवाल बाजार स्थित श्री महावीर भवन पर पहुंची । प्रवेश यात्रा में अणु आराधना मंडल और चंदना बहू मंडल की श्राविकाएं अपने मण्डल के ड्रेस कोड में शामिल हुई । प्रवेश यात्रा रुनवाल बाजार स्थित महावीर भवन पर पहुंचकर धर्म सभा में परिवर्तित हुई । धर्म सभा को संबोधित करते हुए पूज्या महासती व प्रज्ञा जी म सा ने फरमाया की प्रवर्तक श्री जी और गुरुणी मैया की कृपा से आपकी विनती स्वीकार हुई और झाबुआ श्री संघ को इस चातुर्मास का लाभ प्राप्त हुआ है । आप सभी का उत्साह बहुत ही अच्छा है यह उत्साह पूरे चातुर्मास के दौरान सभी को बनाए रखना है और यथाशक्ति ज्ञान आराधना व तप आराधना जरूर करना है और चातुर्मास को सार्थक बनाना है धर्म सभा में चंदना बहू मंडल और सलोनी कटकानी ने स्वागत गीत के माध्यम से सती मंडल का अभिनंदन किया ।  विदित है की तीर्थंकर भगवान की आज्ञा के अनुसार जैन साधु – साध्वी वर्षाकाल में चातुर्मास के लिए चार माह एक स्थान पर विराजते हैं और स्वयं धर्म आराधना करते हैं और श्रावक- श्राविकाओं को जिनवाणी के माध्यम से धर्म का मार्ग बताते हैं श्री संघ के सचिव राजेंद्र कटकानी ने बताया की पूज्या महासती जी एवं सती मंडल की पावन निश्रा में वर्षावास में 4 माह प्रतिदिन प्रवचन, प्रतिक्रमण, ज्ञानचर्चा एवं अन्य धार्मिक गतिविधियां होंगी । सभा का संचालन श्री संघ अध्यक्ष प्रदीप रुनवाल ने किया । श्री रुनवाल ने बताया कि साध्वी जी म सा के वैराग्य की शुरुआत झाबुआ से ही हुई थी और आज प्रथम पृथक चातुर्मास की शुरुआत भी झाबुआ श्री संघ  से हुई है संयम रुचिका पूज्या महासती श्री संयमप्रभा जी झाबुआ मैं विराजित थे तब पूज्या श्री प्रज्ञा जी म सा के परिजन ने झाबुआ में ही 12 वर्ष की उम्र में गुरूणि संयम प्रभा जी म सा को सोप दिया था ।

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