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झाबुआ

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए चार कुर्सी भी नहीं लगा पाया महिला एवं बाल विकास विभाग

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झाबुआ – चाहे सार्वजनिक मंच हो या हो चुनावी रैली या कोई शासकीय कार्यक्रम मंच पर से सभी नेता और अधिकारी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए गुणगान करते ही रहते हैं। सभी का मानना है कि लोकतंत्र के लिए पत्रकारों की महती भूमिका होती, पत्रकार ही है जो शासन और जनता के बीच की कड़ी है। पर इस कड़ी की स्थिति कुछ ऐसी है कि सिर्फ बातों में ही उनकी महत्ता बताई जाती है परंतु धरातल पर स्थितियां बड़ी गंभीर हैं। महिला बाल विकास विभाग झाबुआ द्वारा स्थानीय पुलिस सामुदायिक भवन में आयोजित नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम में ही कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब पत्रकारों को आमंत्रित करने के बावजूद भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए चार कुर्सियां भी महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नहीं जुटाई जा सकी। जो भी पत्रकार वहां पहुंचे वह बाहर से ही कवरेज कर वापस निकल गए या उन्होंने कार्यक्रम में भागीदारी ही नहीं की। कुछ सौभाग्यशाली पत्रकारों को बैठने के लिए स्थान भी प्राप्त हुआ , पर बाकी सबको निराशा ही हाथ लगी। अधिकारियों को सारे गणित ज्ञान पता है बस इतना नहीं पता कि बुलाने के बाद सम्मान भी करना पड़ता है । जो विभाग लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की अनदेखी कर रहा है तो वह विभाग शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा रहा है या नहीं….. यह अंदाजा लगाया जा सकता है । जिला मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में लापरवाही देखने को मिल रही है तो ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित शासकीय योजनाओं का प्रचार प्रसार का अंदाजा लगाया जा सकता है । वही कार्यक्रम के लिए जनसंपर्क विभाग द्वारा आमंत्रण भी दिया गया था । लेकिन फिर भी महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही देखने को मिली । शायद यह विभाग इस कार्यक्रम का प्रचार प्रसार नहीं करना चाहता है । वही झाबुआ जिले के पत्रकारों की विनम्रता ही इसका कारण है कि वह आसानी से उपलब्ध होकर शासन की योजनाओं का प्रचार प्रसार करते रहते हैं जिले के पत्रकारों की सौम्यता ही उनके लिए अभिशाप बनती जा रही है। गौर करने लायक बात यह है कि शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पत्रकार अपनी कलम घिसता रहता है उसके लिए एक कुर्सी की व्यवस्था भी प्रशासन को कितनी भारी पड़ती है उसकी बानगी आज देखने को मिली। बुजुर्ग कहा करते थे जहां सम्मान नहीं वहां जाना नहीं। लगता है पत्रकारों को भी इस वाक्य का अनुसरण आवश्यक हो गया है।

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