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झाबुआ

अहंकार का विसर्जन ही क्षमा हैँ- पूज्या महासती प्रज्ञा जी

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झाबुआ -आज संसार में कोई धर्मवीर है ,कोई कर्मवीर है ,कोई दया वीर है, कोई शूरवीर हे,परंतु आज संवत्सरी महापर्व है आज हमें क्षमावीर बनना है|कषाय4 प्रकारकेहोतेहैं:_क्रोध ,मान ,माया, लोभ।हमारे कषाय किस स्तर के हे इस पर हमें विचार करना हे|आज के दिन कोई जैन व्यक्ति यदि क्षमापना नहीं करें तो उसका जैनत्व पतित हो जाता है।व्यक्ति का क्रोध क्षण भर में आकर समाप्त हो जाता है,वह देर तक स्थिर नहीं रहता है।अंतगढ़ दशा सूत्र में जिन रानियो का वर्णन आया है ,उन्होंने कठिन तप किया और दीर्घकाल तक तप किया। उसके बाद वे सिद्ध ,बुद्ध और मुक्त हुई। उक्त वचन संयम उपवन वर्षावास हेतु रुनवाल बाजार स्थित महावीर भवन पर विराजित पूज्या महासती प्रज्ञा जी महाराज साहब ने पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन संवत्सरी महापर्व पर धर्म सभा में कहे| महासती प्रज्ञा जी ने आगे कहा कि बाह्य और अभ्यांतर तप की आराधना करने वाले जीव के लिए ये दोनों तप मोक्ष मार्ग के लिए साधक बनते हैं ।व्यक्ति को अपने भीतर के दोषों का अवलोकन करना चाहिए ।तभी उसकी आराधना निर्मल होंगी| आज के दिन हमें आत्म निंदा करने का शुभ अवसर उपस्थित हुआ है। आज हमें सभी को क्षमा करना है। सभी से क्षमायाचना करना हे|क्षमा आत्मा का आंतरिक गुण है। कोई व्यक्ति हमारी इच्छा के प्रतिकूल व्यवहार कर रहा हो,हमारा अहित कर रहा हो,
हमारा अपकार कर रहा हो, हमारा प्रतिकार करता हो तो हमें शांति से सहन करना ही क्षमा हैँ |क्षमा एवं क्षमापना में अंतर है।क्षमा वर्तमान से जुड़ी है, क्षमापना अतीत से जुड़ी हुई है। क्षमा संवर है, क्षमापना तप है।क्षमा मांगना एवं क्षमा करना सरल नहीं बहुत कठिन है।
अहंकार का विसर्जन ही क्षमा है।यदि हमारे मन ,वचन, काया से किसी को पीड़ा हुई हो, तो उससे हमे क्षमा मांग लेना चाहिए।किसी की निंदा करके हमें कर्म नहीं बांधना चाहिए।
आज हमें प्रतिक्रमण के पश्चात 84 लाख जीवायोनियों से क्षमा मांगना चाहिए। 5स्थावरो से क्षमा याचना करना चाहिए। तिर्यनच पंचेंद्रीय जीवो से भी क्षमा मांगना चाहिए।साथ ही जिसके साथ हमारी बोलचाल बंद है, हमारा मनमुटाव हे उनसे भी हमें क्षमा मांगना चाहिए, तभी हमारा क्षमापना पर्व मनाना सार्थक होगा। धर्म सभा में साध्वी हितज्ञा जी महाराज साहब ने क्षमापना पर्व का पावन संदेश बहुत ही सुंदर स्तवन के माध्यम से प्रस्तुत किया| साध्वी सोम्यप्रभा जी महाराज साहब ने अंतगढ़दशासूत्र का वाचन किया और उसमे वर्णित रानियों के तप का विस्तृत विवेचन बहुत ही अहोभाव के साथ किया |प्रवचन के पश्चात विश्व शांति एवं मानव मात्र के कल्याण के लिए साध्वी मंडल की निश्रा में शांति धुन की गई |

करीब 15 तपस्वीयो ने 8 उपवास ( अठाई ) के प्रत्याख्यान लिए

तपस्या के क्रम में महासती प्रज्ञा जी के मुखारविंद से श्रीमती आरती कटारिया ने 10 उपवास के प्रत्याख्यान लिए । महासती प्रज्ञा जी की पावन प्रेरणा से पर्युषण पर्व के दौरान श्री संघ में चल रही सामूहिक अठाई तप की तपस्या के क्रम मे पूनमचंद्र कटकानी 8 उपवास,राजेंद्र रुनवाल 8 उपवास,श्रीपाल कटारिया 8 उपवास,दीपक कटारिया 8 उपवास,अंकित कटारिया 8 उपवास,पंकज व्होरा 8 उपवास,तनिष्क कटकानी 8 उपवास,विजय कटकानी 8 उपवास,चन्दनमल कटकानी 8 उपवास , शुभम चौधरी 8 उपवास,आदित्य कटारिया 8 उपवास,निरंजना गांधी 8 उपवास,अर्हम घोड़ावत 8 उपवास,पिंकी कटकानी 8 उपवास,मनस्वी घोड़ावत ने 8 उपवास के प्रत्याख्यान लिए | आज की प्रभावना के लाभार्थी राजकुमारी अशोक कुमार कटारिया परिवार रहा |तप अनुमोदना के क्रम में अठाई तप कर रहे तपस्वियों का बहुमान तपस्या की बोली लगाकर धर्म सभा में श्री संघ की ओर से किया गया | दोपहर में धार्मिक प्रतियोगिता आयोजित की गई| संवत्सरी महापर्व पर धर्म आराधना सुबह 5:45 बजे राइसी प्रतिक्रमण से प्रारंभ हुई, 6:45बजे ज्ञानशाला लगी, सुबह 8:30 से 10:30 शास्त्र वचन व्याख्यान हुए, व्याख्यान पाश्चात् पापो की आलोचना की गई | दोपहर में धार्मिक प्रतियोगिता आयोजित की गई| शाम को देवसीय प्रतिक्रमण पुरुष वर्ग ने मेन बाजार स्थानक पर एवं महिला वर्ग ने रुनवाल बाजार स्थित महावीर भवन पर संवत्सरी प्रतिक्रमण कर सभी जीवों से खमत खमावना किया |

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