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झाबुआ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्री विजयादशमी उत्सव के अवसर पर पथ संचलन निकला l

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प्रत्येक स्वयंसेवक को पंच परिवर्तन को अपने मैं आत्मसात करना है……. श्री भूषण भट्ट

हाटपिपलिया. (वत्सल आचार्य मनोज अरोड़ा की खास रिपोर्ट). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बड़ावदा खण्ड के मंडल हाटपिपलिया का पथ संचलन रविवार को गांधी चौक से निकला l संचलन में बड़ी संख्या में बाल ,तरुण, किशोर एवं वृद्ध स्वयंसेवक सम्मिलित हुए l
इस अवसर पर पर्यावरण कार्य के विभाग संयोजक श्री भूषण भट्ट ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा विजयादशमी उत्सव पराक्रम एवं शौर्य का प्रतीक है| यह शक्ति की उपासना का पर्व हैl भारत सदियों से पराक्रमी होने के बाद भी गुलाम क्यों हुआ, हमने शक्ति की उपासना करना छोड़ दिया l अपना आत्मभाव स्व को भूला दिया था lभट्ट ने कहा गुलामी की वेदना ने डॉ हेडगेवार जी के मन में देश की स्वतंत्रता एवं उसके बाद हिंदू समाज को संगठित करने अनुशासित करने का संकल्प लेकर1925 में विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना करी l प्रारंभ में संघ का उपहास उड़ाया गया l लेकिन सतत कार्य के आधार पर संघ निरंतर प्रगति करता रहा । संघ पर तीन प्रतिबंध लगे, लेकिन संघ का स्वयंसेवक सदैव तटस्थ रहा l

संघ ने हिंदू समाज को जागृत करने का कार्य किया l हमारा उद्देश्य राष्ट्र को परम वैभव पर पहुंचाना है l
100 वर्ष की संघ यात्रा में व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र का निर्माण करना है l
भट्ट ने स्वयंसेवको से आव्हान किया कि प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने परिवार में पंच परिवर्तन का पालन करना है, स्व का जागरण यह देश मेरा है, यहां की संस्कृति मेरी है| सामाजिक समरसता सभी हिन्दू मेरे बंधु हैं का भाव के साथ पर्यावरण संरक्षण करने इस धरती मां को प्रदूषण से बचाने का संकल्प लेना है l अपने परिवार की प्राचीन संयुक्त परिवार भाव को स्थापित करना है राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी नागरिक कर्तव्यों का पालन करना है l हम सब को यह विचार करने की आवश्यकता है कि जो प्रण हमने किया है जो उद्देश्य हमारे सामने है उसे प्राप्त करने के लिए हम कितना कार्य कर रहे है । जिस गति से हम प्रयास कर रहे वो क्या पर्याप्त है इस गति से और इस प्रमाण से क्या हमारा उद्देश्य लक्ष्य की पूर्ति हो जाएगी क्या।
हमारा कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण हिंदू समाज है ऐसा कौन पत्थर दिल हिन्दू होगा जो हमारी आत्मीय वाणी , नम्रता पूर्ण व्यवहार शब्दों को सुनने से इंकार कर देगा। इसलिए हमें अपने पंच प्रण संकल्पों और अपनी विचारों को लेकर हिंदू समाज के प्रत्येक परिवार तक इस शताब्दी वर्ष में पहुंचना है।तभी हमारी शताब्दी वर्ष की सार्थकता सिद्ध होने वाली है l
इस अवसर पर मंच पर भगवताचार्य पं.देवीलाल शर्मा, मंडल कार्यवाह लखनसिंह सिसौदिया उपस्थित थे l

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