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झाबुआ

भैंसाकराय में विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया तालाब निर्माण के कारण परेशानी ग्रामीणों को भुगतना पडेगी

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झाबुआ/रामा– जिले के रामा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम भैंसाकराय गांव में करोड़ों रुपये की लागत से बने तालाब की घटिया गुणवत्ता अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन चुकी है ।  पहली ही बारिश में वेस्ट वियर टूट गया, कांक्रीट बिखर गई, और पानी का रिसाव शुरू हो गया । साथ ही वाल की खराबी के कारण तालाब लगभग खाली हो गया है विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया तालाब निर्माण के कारण गर्मी के दिनों में परेशानी ग्रामीणों को देखना पड़ेगी । वही विभाग अब भी ठेकेदार पर क्यों मेहरबान है तीन तीन पत्र जारी होने के बाद भी फर्म को लेकर नियमानुसार ब्लैक लिस्टेड की कार्यवाही , विभाग करेगा या नहीं….. जांच का विषय है ।

दरअसल विभाग को तालाब की खराब गुणवत्ता की जानकारी पहले से थी । रानापुर उपसंभाग ने 24 अक्टूबर को और झाबुआ कार्यालय ने 11 सितंबर को ठेकेदार की लापरवाही की रिपोर्ट भेजी थी फिर भी दो माह तक कोई सुधार नहीं हुआ ।‌ अब कार्यपालन यंत्री विपिन पाटीदार ने 27 अक्टूबर को ठेकेदार प्रजापति कंस्ट्रक्शन, रावटी को अंतिम नोटिस जारी किया है । इस तरह के गुणवत्ता विहीन कार्य के लिए विभाग का सब इंजीनियर जिम्मेदार है जिसने विभागीय इस्टीमेट और डाईंग अनुसार सरीये और कांक्रीट पर ध्यान नहीं दिया । विभाग बार बार मरम्मत की बात कर रहा है प्रश्न अब भी वही है कि क्या कांक्रीट कार्य में इस्टीमेट में सरीये और कांक्रीट को लेकर जो दर्शाया गया है उस अनुसार कार्य होगा या नहीं ।

31 अक्टूबर को जारी हुआ नोटिस, सुधार न करने पर होगी कार्रवाई

कार्यपालन यंत्री विपिन पाटीदार द्वारा 31 अक्टूबर को जारी पत्र क्रमांक 3036/खेली/2025-26 में स्पष्ट लिखा गया है कि बड़ी भैंसाकराय तालाब के एप्रन एंड वेस्ट वियर हिस्से में तकनीकी खामियां पाए गयी  हैं पहले भी निर्देश दिए गए थे, लेकिन ठेकेदार द्वारा अब तक सुधार कार्य नहीं किया गया । विभाग ने चेतावनी दी है कि सात दिन के भीतर मरम्मत कार्य प्रारंभ न करने पर अनुबंध की धारा 29 के अंतर्गत सुरक्षा निधि जब्त कर , विभाग स्वयं कार्य कराएगा और उसका खर्च ठेकेदार से वसूला जाएगा । तीन बार पत्र जारी करने के बाद भी विभाग फर्म या ठेकेदार पर ब्लैक लिस्टेड की कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है। प्रशन अब भी वही है कि गारंटी अवधि में मरम्मत के बाद, गारंटी अवधि समाप्त होने पर कुछ भी होता है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा…. विभाग या ठेकेदार…? चूंकि कांक्रीट इस्टीमेट अनुसार नहीं हुई है ।

विभाग को पहले से थी जानकारी, लेकिन कार्रवाई में देरी
पत्रों से यह साफ होता है कि विभाग को निर्माण की खामियों की जानकारी सितंबर माह से थी… 11 सितंबर और 24 अक्टूबर दोनों तारीखों पर उपखंड स्तर से सूचना भेजी गई थी… फिर भी दो महीने तक सुधार कार्य नहीं हुआ । तालाब स्लूस वाल के खराब होने के कारण खाली हो गया । अब गर्मी के दिनों में ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ेगा । इससे विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे है । सब इंजीनियर ने तालाब निर्माण के दौरान समय समय पर मानीटरीग की होती तो शायद यह सब न होता। यदि समय रहते पहले की रिपोर्ट पर कार्रवाई होती तो न पानी का नुकसान होता और न जनता का भरोसा टूटता ।

ग्रामीणाें का कहना है…

“अगर विभाग ने पहले ही गंभीरता दिखाई होती तो लाखों लीटर पानी बहने से बच जाता… मरम्मत हो जाए तो ठीक, लेकिन जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए…” इतना सब कुछ होने के बाद भी विभाग द्वारा फर्म या ठेकेदार को लेकर क्यों कारवाई नहीं की जा रही है यह चिंतन का विषय है ।

जिला प्रशासन का मौन भी समझ से परे है

भैंसाकराय तालाब की गुणवत्ता विहीन कार्य प्रणाली के कारण वेस्ट वेयर का हिस्सा गिर गया और कांक्रीट में भी बड़े बड़े पत्थरों का उपयोग और कांक्रीट में सरीये भी डिजाइन अनुसार नहीं नजर आ रहे हैं और वाल की खराबी से तालाब खाली होने की कगार पर है फिर भी मूलभूत सुविधाएं में से सबसे अहम पानी के लिए अब ग्रामीणजन को परेशान होना पड़ेगा । इतना सब होने के बाद भी जिला प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है ।


भैंसाकरई तालाब के संबंध में विभाग ने ठेकेदार को पहले भी नोटिस जारी किया था, परंतु अब अंतिम नोटिस जारी कर दिया गया है… ठेकेदार को सात दिन की समयसीमा दी गई है, यदि ठेकेदार द्वारा मरम्मत का कार्य नहीं किया जाता है तो विभाग द्वारा उस कार्य को कराया जाएगा जिस पर होने वाला व्यय ठेकेदार की जमा राशि से वसूला जाएगा । गारंटी अवधि में सुधार कार्य कराना ठेकेदार की जिम्मेदारी है ।

विपिन पाटीदार, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग, झाबुआ

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