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झाबुआ

विश्व मांगल्य सभा की जनजाति कल्याण विभाग की प्रथम जिला स्तरीय बैठक—जोश, जागरूकता और जनसहभागिता के साथ ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न

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झाबुआ-  झाबुआ स्थित पूर्व सांसद कार्यालय आज एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जहां विश्व मांगल्य सभा के जनजाति कल्याण विभाग की प्रथम जिला स्तरीय बैठक जबरदस्त उत्साह, सांस्कृतिक भावनाओं और सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ आयोजित हुई। पूरे जिले से जनजाति समाज सहित अन्य समाजों के भाई-बहनों की उमड़ी भारी भीड़ ने स्पष्ट संदेश दिया कि— जनजाति मातृत्व, संस्कार और संस्कृति के संरक्षण का नया अध्याय शुरू हो चुका है।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय संयोजिका श्रीमती मंजूषा ताई द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। प्रमुख अतिथि का भव्य स्वागत शाल, श्रीफल और माला पहनाकर अनु डामोर ने किया। सभा की परंपरा के अनुरूप सभी उपस्थितजन का स्वागत विश्व मांगल्य सभा के दुपट्टे पहनाकर किया गया, जिससे पूरे सभागार में गरिमा और उत्साह का वातावरण बन गया।

प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती सूरज डामोर ने प्रस्तावना देते हुए कहा कि विश्व मांगल्य सभा पिछले 15 वर्षों से देश के लगभग हर राज्य समेत 9 विदेशी देशों में मातृत्व जागरूकता, संस्कार निर्माण और जनजातीय समाज के सांस्कृतिक उत्थान के लिए अथक कार्य कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा— “मां संस्कारित होगी तो आने वाली पीढ़ी भी संस्कारित होगी, और वही समाज को नई दिशा देगी।”

कार्यक्रम में जोश भरते हुए पूर्व सांसद श्री गुमान सिंह डामोर ने अपने प्रखर संबोधन में कहा कि जनजाति समाज सदियों से संस्कृति, पूर्वजों की पूजा और प्रकृति को सर्वोपरि मानकर चलता आया है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर शिक्षा और संस्कार दोनों को अपनाना ही समाज को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

मुख्य वक्ता श्रीमती मंजूषा ताई का प्रभावशाली उद्बोधन सभा का केंद्रबिंदु रहा। उन्होंने कहा—
“आज के समय में सुसंस्कृत माता का होना सबसे बड़ा सामर्थ्य है। जिस घर में संस्कारवान माता होगी, वहीं से शिवाजी जैसे वीर, राष्ट्रभक्त और चरित्रवान बालक जन्म लेते हैं। हमारा लक्ष्य है कि देशभर में जनजाति माताएं संस्कार और संस्कृति की ध्वजवाहक बनें।” उन्होंने यह भी बताया कि जनजाति समाज सूर्य, धरती, वृक्ष, बाबा-देव और माता वनदेवी की पूजा जैसी अनोखी परंपराओं से सदैव जुड़ा रहा है, और यही संस्कृति समाज की असली पहचान है। उन्होंने आगामी सामाजिक अभियानों और जनजाति कल्याण विभाग की विस्तृत कार्ययोजना पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में सुश्री रुक्मणी वर्मा और श्रीमती रेखा शर्मा ने भी दमदार तरीके से अपने विचार रखे और जनजाति समाज में नारी शक्ति, शिक्षा एवं संस्कार की महत्ता का संदेश दिया। अंत में आभार प्रदर्शन चंदनबाला शर्मा, संयोजिका – विश्व मांगल्य सदाचार सभा, मेघनगर द्वारा किया गया।  कार्यक्रम उत्साह भरे माहौल में सम्पन्न हुआ, जहां सभी उपस्थित भाई-बहनों ने संगठन के कार्यों को और अधिक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने हेतु समिति गठन कर मजबूत सहयोग का संकल्प लिया।

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