Connect with us

झाबुआ

मोबाइल से ड्रग्स तक : नशे ने छीना बच्चों का बचपन

Published

on

नाबालिग बच्चों में बढ़ती नशे की लत : एक गंभीर वर्तमान समस्या
— एडवोकेट चंचल भंडारी

10 से 17 वर्ष के करोड़ों बच्चे नशे की चपेट में, परिवार और समाज पर गहरा असर

सोशल मीडिया, गलत संगत और आसान उपलब्धता बना रही बच्चों को शिकार


झाबुआ/प्रदेश। समाज के बदलते स्वरूप के साथ एक बेहद चिंताजनक सच्चाई सामने आ रही है—नाबालिग बच्चों में नशे की बढ़ती लत। जो समस्या कभी केवल वयस्कों तक सीमित मानी जाती थी, आज वह मासूम बच्चों के भविष्य को निगलती जा रही है। सिगरेट, गुटखा, तंबाकू और शराब तक ही नहीं, बल्कि गांजा, अफीम, हेरोइन, ड्रग्स, नशीली दवाइयाँ, व्हाइटनर, सॉल्यूशन, इंजेक्शन तथा मोबाइल-इंटरनेट की लत भी नशे के आधुनिक और खतरनाक रूप बन चुके हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में 10 से 17 वर्ष की आयु के 1.5 करोड़ से अधिक बच्चे किसी न किसी रूप में नशे की चपेट में हैं। यह प्रवृत्ति अब केवल शहरी नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेज़ी से फैल रही है, जो समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।

नशे की गिरफ्त में जाते बच्चे : प्रमुख कारण

नाबालिगों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे कई सामाजिक कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया, ओटीटी प्लेटफॉर्म, फिल्मों और वेब सीरीज़ में नशे को फैशन, स्टाइल और ताकत के प्रतीक के रूप में दिखाया जाना है, जिसका बच्चों के कोमल मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

दूसरा बड़ा कारण साथियों का दबाव और गलत संगति है। मित्र समूह में स्वीकार्यता पाने की चाह, जिज्ञासा, रोमांच और तनाव से बचने की कोशिश कई बच्चों को नशे की ओर धकेल देती है।

तीसरा कारण नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता है। सिगरेट, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का खुलेआम मिल जाना बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है।

चौथा और अहम कारण पारिवारिक वातावरण है। माता-पिता की व्यस्तता, संवाद की कमी, पारिवारिक कलह या घर में स्वयं नशे का माहौल बच्चों को इस दलदल में फंसा देता है। भावनात्मक खालीपन बच्चे गलत रास्तों से भरने की कोशिश करते हैं।

नशे के दुष्परिणाम : परिवार और समाज पर खतरा

नशे का प्रभाव बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर घातक होता है। यह उनकी पढ़ाई, याददाश्त, व्यवहार और भविष्य को अंधकारमय बना देता है। नशे की गिरफ्त में आया एक बच्चा केवल स्वयं नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए संकट बन जाता है।

आगे चलकर यही लत घरेलू कलह, आर्थिक संकट, अपराध, हिंसा, आत्महत्या, यौन शोषण, दुर्घटनाओं और कानून से टकराव जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म देती है। एक बच्चे का नशा पूरे परिवार की खुशियाँ छीन लेता है।

समाधान : सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए परिवार, स्कूल, समाज और सरकार—सभी को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी। माता-पिता को बच्चों से खुलकर संवाद करना चाहिए, उनके दोस्तों, व्यवहार और ऑनलाइन गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखनी चाहिए।

स्कूलों में नशा-विरोधी शिक्षा, काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम अनिवार्य किए जाने चाहिए। खेल, कला, योग, ध्यान और सकारात्मक गतिविधियाँ बच्चों को नशे से दूर रखने का मजबूत माध्यम बन सकती हैं। साथ ही सरकार

देश दुनिया की ताजा खबरे सबसे पहले पाने के लिए लाइक करे प्रादेशिक जन समाचार फेसबुक पेज

प्रादेशिक जन समाचार स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा मंच है यहाँ विभिन्न टीवी चैनेलो और समाचार पत्रों में कार्यरत पत्रकार अपनी प्रमुख खबरे प्रकाशन हेतु प्रेषित करते है।

Advertisement

Subscribe Youtube

Advertisement

सेंसेक्स

Trending

कॉपीराइट © 2025. प्रादेशिक जन समाचार

error: Content is protected !!