सनातन धर्मप्रेमी एवं गौ-भक्तों को गौ-माता की सेवा और रक्षा का दिलवाया संकल्प महाकालिका माता मंदिर परिसर में गीता जयंती समारोह समिति द्वारा किया जा रहा पांच दिवसीय गौमाता कथा का भव्य आयोजन झाबुआ। स्थानीय नेहरू मार्ग स्थित महाकालिका माता मंदिर परिसर में 16 से 20 दिसंबर तक प्रतिदिन रात 8 से 10 बजे तक गीता जयंती समारोह समिति द्वारा जिले में प्रथम बार श्यामा श्याम की लाडली वेदलक्षणा गौ-माता की दिव्य कथा का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें एशिया की सबसे बड़ी गौशाला पथमेड़ा से पधारे क्रांतिकारी गौ-संत श्री गोशरणानंदजी सरस्वती महाराज के मुखारविन्द से कथा का वाचन हो रहा है। प्रथम दिन व्यास पीठ पर विराजमान कथा वाचक गोशरणानंद सरस्वतीजी ने गौ-माता की महिमा, वेद, पुराणों और शास्त्रांे में गौमाता के वर्णन और सनातन धर्म में नौ माताओं तथा भागवत कथा एवं भागवत गीता के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही उपस्थित समस्त धर्मप्रेमीजनों और गौ-भक्तों को गौ-माता की आजीवन सेवा और रक्षा का संकल्प दिलवाया। प्रथम दिन 16 दिसंबर, मंगलवार रात 8 बजे क्रांतिकारी गौ-संत श्री गोशरणानंदजी सरस्वती महाराज का व्यास पीठ पर विराजमान होने के बाद कथा से पूर्व पुष्पमालाओं से आत्मीय स्वागत गीता जयंती समारोह समिति के वरिष्ठ सदस्यों में किशोर बोरसे, कन्हैयालाल राठौर, मनोज सोनी, शेषनारायण मालवी, प्रदीप सोलंकी, वरिष्ठजनो में गोपालसिंह चौहान, पं. गणेप्रसाद उपाध्याय, पं. घनश्यामदास बैरागी, रमेशचन्द्र मालवी, भेरूसिंह सोलंकी, छोगालाल मालवीय, युवा सदस्यों में विनय वर्मा, प्रांशु शाह, मीडिया प्रभारी दौलत गोलानी, कान्हा अरोड़ा, गौरव नीमा, मातृ शक्ति में अनिला बेस आदि ने किया। व्यास पीठ पर लड्डू बाल गोपाल, श्री कष्टभंजनदेव एवं गौमाता की सुंदर प्रतिमा विराजमान की गई। जिसकी पूजन क्रांतिकारी गौ-संत श्री गोशरणानंदजी सरस्वती महाराज ने की। कथा स्थल पर सुंदर मंच निर्माण के साथ भक्तों के बैठने के लिए कुर्सियों एवं गादी की व्यवस्था की गई है। कथा वाचक का अभिनंदन बाद संगीतमय गौमाता की कथा आरंभ हुई। कथा में गौमाता की महिमा का बखान करते हुए प्रथम दिवस संतश्री श्री गोशरणानंदजी महाराज ने बताया कि आज ब्रम्हलीन परम् पूज्य दंडी स्वामी श्री मोहनानंद सरस्वजीती की परम् दिव्य कृपा से झाबुआ की पावन धरती पर गौ-माता की कथा का आयोजन किया जा रहा है। गौ-माता सनातन धर्म में अत्यंत ही पूजनीय है। गौमाता ठाकुरजी की लाड-दुलारी होकर सनानत धर्म में वेद, पुराण, शास्त्रों में भी गौ-माता का उल्लेख किया गया है। गौ-माता की पूजा, सेवा करने से मानव अपने जीवन का कल्याण करने के साथ मोक्ष का भागी बनकर परम् धाम की भी प्राप्ति कर सकता है। गौ-माता को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिया गया है क्रांतिकारी संत ने अपने ओजस्वी वाणी में कहा कि गौ-माता कोई साधारण पशु नहीं है, अपितु उसे राष्ट्रीय माता का दर्जा दिया गया है। आज बड़ी ही चिंता का विषय है कि देश में गौवंश की निर्मम हत्या की जा रहंी है एवं उसका मांस विक्रय किया जा रहा है, ऐसे नितकृष्ट लोग घोर पाप के भागी होकर सनातन धर्म एवं सरकार को गौमाता की रक्षा के लिए विशेष कानून बनाने की आवश्यकता है। गौ-माता का अपमान सनातन धर्म को कतई बर्दाशत नहीं करना है, इसलिए हम सभी को संकल्प लेना है कि हम आजीवन गौ-माता की सेवा और रक्षा करेंगे, उसे पशु नहीं मानकर माता मानते हुए उसे लाड-दुलार करेंगे। गौमाता की प्रतिदिन पूजा करने के साथ गौशाला में जाकर गौ-आहार करवाएंगे। जिस स्थान पर गौशाला में गौमाताओं की सेवा होती है, वह धरती पवित्र होकर गौ-सेवा करने वाला मनुष्य पुण्य का भागी बनता है। गौमाता के दूध से लेकर गौबर और मूत्र भी पवित्र गोशरणानंद सरस्वतीजी महाराज ने बताया कि गौ-माता का दूध तो अमृत के समान है। इसके साथ ही गौ-माता के गौबर से कंडे बनने के साथ इसका उपयोग हम पर्यावरण शुद्धिकरण के लिए करेंगे। कंड़ों पर विभिन्न भोजन सामग्री बनाने भी बनानते है। शास्त्रों में गौ-माता के मूत्र से स्नान करने को साक्षात गंगा में स्नान करने के समान पवित्र माना गया है, इसलिए हम यह भी संकल्प ले कि हम दूध पीएंगे, तो गौ-माता का दूध पीएंगे और गौ-उत्पाद निर्मित सामग्रीयों का दैनिक दिनचर्या में उपयोग करेंगे। नौ माताओं का उल्लेख किया संतश्री ने सनानत धर्म में नौ-माताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि पहली माता गौ-माता है। जिसकी पूजा करने से भगवान प्रसन्न होने से हमारे पाप कर्मों का भी क्षय होता है। गौमाता के गौमूत्र से कई बिमारियों का भी उपचार होता है। जब तक गौमाता का सम्मान नहीं होगा, तब तक विश्व का कल्याण होना संभव नहीं है। प्रत्येक हिन्दू मंदिरों में जब आरती की जाती है तो आरती के बाद सनानत धर्म की जय के साथ गौमाता की जय भी कहा जाता है, अर्थात गौ-माता की पूजा भगवान की पूजा करने के समान ही है। समधुर भजनों की दी प्रस्तुति कथा वाचक गोशरणानंदजी महाराज ने कथा के मध्य ‘श्रीमन नारायण-नारायण हरि-हरि, जय गौमाता … जय-जय गौमाता …’ जैसे भजनों का भक्तजनों ने भरपूर आनंद लेते हुए जमकर तालियां बजाई। गोशरणानंदजी महाराज ने भागवत कथा और भागवत गीता को मनुष्य जीवन के कल्याण का प्रमुख ग्रंथ बताया एवं कहा कि प्रत्येक सनातनी को प्रतिदिन भावगत गीता के एक श्लोक का पाठ अवश्य करना चाहिए। भागवत में जीवन का सार होने के साथ इसके श्रवण मात्र से पापों की निर्जरा होती है। गौ-माता की आरती कर प्रसादी वितरण हुआ कथा का सफल संचालन गीता जयंती समारोह समिति के वरिष्ठ सदस्य राधेश्याम परमार ‘दादुभाई’ ने किया। प्रथम दिन कथा की विश्रांति पर गौ-माता की सामूहिक आरती कर गौ-भक्त हिमांशु एवं प्रदीप की ओर से सभी भक्तजनों को फल प्रसादी के रूप में वितरित किया गया। यह कथा 20 दिसंबर, शनिवार तक चलेगी। गीता जयंती समारोह समिति ने शहर की समस्त धर्मप्रेमी जनता एवं गौ-भक्तों से गौमाता कथा में अधिकाधिक संख्या में पधारकर धर्मलाभ लेने हेतु अपील की गई है।
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