मेघनगर – तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण के सुशिष्य मुनि कोमल कुमार व मुनि सिद्धार्थ कुमार की पावन निश्रा में बस स्टैंड क्षेत्र में श्री अणु जैन स्वाध्याय भवन पर अभिनव सामायिक फेस्टीवल का आयोजन हुआ । जिसमें समस्त जैन समाज और आसपास के चोखले ने अपनी सहभागिता दी । इस आयोजन का उद्देश्य है आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक जागरण को सुदृढ़ बनाना ।
रविवार सुबह करीब 9.30 बजे मुनिश्री कोमल कुमार जी ने अभिनव सामायिक फेस्टीवल (उत्सव विश्व मैत्री का ) प्रारंभ की । जिसमें उपस्थित जनों ने सामूहिक रूप से सामायिक का पच्खाण किया । मुनिश्री ने सामायिक को पांच भागों में विभक्त करते हुए, प्रथम में नमस्कार महामंत्र का सामूहिक जाप हुआ । दूसरे क्रम में नमस्कार महामंत्र के पांच पदों पर , विभिन्न केन्द्रों पर विभिन्न रंगों का ध्यान कराया गया । तिसरे में स्वाध्याय कराया और अगले क्रम में मंगल भावना का उच्चारण किया गया और अंतिम में काय गुप्ती का अभ्यास किया गया । तत्पश्चात मुनिश्री कोमल कुमार जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कि सामायिक केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, संयमित और सकारात्मक दिशा देने का सशक्त माध्यम है । सामायिक कैसे करना चाहिए । तब मुनिश्री ने बताया कि… समया धम्म मुदाहरे मुणे……याने सामायिक में समता का अभ्यास करें । आवेश या गुस्सा तभी आता है जब सामायिक का अभ्यास नहीं किया जाता है। सामायिक का अभ्यास करने वाले परिवार में कभी कलह नहीं होगा । जो व्यक्ति सामायिक का अभ्यास करता है वह सहनशील बन जाता है वह हमेशा समभाव में रहेगा । और जो व्यक्ति सामायिक का सार नहीं समझते है उनके जीवन में अशांति बनी रहती है । सामायिक एक ऐसी साधना है जो व्यक्ति को मोक्ष के निकट ले जा सकती है । जीवन में उतार चढाव आते रहते हैं पर जिसके जीवन में समता की साधना है वह शांति से उन उतार चढाव को आसानी से पार कर लेता है । समता के बिना परिवार में अशांति और कलह पैदा होता है । सामायिक अपनी आत्मा की साधना है । सामायिक 48 मीनीट की होती है इसमें समता का अभ्यास करने से इसका असर 24 घंटे तक रहता है और हर स्थिति में व्यक्ति सम रह सकते हैं । इसलिए रोजाना कम से कम एक सामायिक करने का प्रयास करना चाहिए । सामायिक की साधना कर हम अपने मन , वचन और काया को स्थिर रख सकते हैं । सामायिक में हम पापकारी प्रवृत्तियो का त्याग कर देते हैं और समभाव में रहकर साधना करते हैं । जो व्यक्ति नियमित सामायिक की साधना करता है वह अपने जीवन में कई बदलाव ला सकता है जैसे कोई क्रोध , राग-द्वेष , कलह आदि पर नियंत्रण पा सकता है । मुनिश्री ने कहा कि भगवान महावीर ने भी पूनिया श्रावक की सामायिक की प्रशंसा की थी चूंकि वह पूर्ण रूप से शुद्ध भाव से की थी तथा उनकी सामायिक अमूल्य थी ।
स्थानकवासी संप्रदाय से विनोद बाफना ने….नैतिकता में सुर सरिता में जन-जन मन पावन हो..संयममय जीवन हो….. गीत के माध्यम से बताया कि सामायिक की साधना कर हम संयममय जीवन जी सकते हैं यदि हमें जीवन शांतिमय बनाना है तो सामायिक की साधना करनी चाहिए । विमल बाफना ने भी आचार्य श्री तुलसी के पंक्तियां…निज पर शासन , फिर अनुशासन को लेकर अपनी बात कही । पेटलावद तेरापंथ सभा से दिलीप भंडारी ने कहा कि तीर्थंकरो की कृपा के बिना संतों का समागम नहीं मिलता है साधु साध्वी पैदल विहार कर , तीर्थंकरो की वाणी के माध्यम से जन जन का कल्याण करते हैं । कल्याण पूरा तेरापंथ सभा से प्रदीप पिपाडा ने कहा कि मेघनगर निवासी महेशचंद अमित मेहता परिवार को गुरु और संघ के प्रति निष्ठावान बताया । बोरी तेरापंथ सभा से लालचंद गांधी ने भी अपनी बात कही ।
महिला मंडल से श्वेता मेहता ने पंक्तियां के माध्यम से आगुंतकों का स्वागत किया और शब्दों के माध्यम से अभिवादन किया । कार्यक्रम का सफल संचालन मुनि सिद्धार्थ कुमार जी ने किया और आभार अमित मेहता ने माना । कार्यक्रम में स्थानीय जैन समाज के अलावा आसपास झाबुआ , कल्याणपुरा , बोरी , पेटलावद , बामनिया आदि क्षेत्रों से श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे ।
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