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झाबुआ

बस स्टैंड चौराहे पर ऐतिहासिक समय की छतरी हुई धराशायी

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नगरपालिका एवं ट्रेफिक पुलिस द्वारा नहीं दिया जा रहा ध्यान
झाबुआ। शहर के बस स्टैंड चौराहा, जिसका नाम छतरी चौराहा ऐतिहासिक समय से लगी छतरी के कारण रखा गया है। यह ऐतिहासिक समय की छतरी वर्षों से ट्रेफिक पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा देखरेख एवं रखरखाव नहीं करने से अचानक से धराशायी होकर चौराहे पर ही नीचे गिर गई।
उल्लेखनीय है कि बस स्टैंड चौराहे को मुख्य रूप से छतरी चौराहा ही कहा जाता है। यहां चौराहे पर ऐतिहासिक समय से लगी छतरी के कारण इसे छतरी चौक कहा जाता है। यातायात पुलिस एवं नगरपालिका द्वारा चौराहे पर पोल पर लगी छतरी की देखरेख एवं रखरखाव नहीं करने से छतरी पर धूल चढ़ने के साथ जर्जर होने से अचानक नीचे गिर गई। नियमानुसार यातायात पुलिस के जवानों को चौराहे पर खड़े होकर ड्यूटी करना चाहिए, लेकिन ट्रेफिक जवान अक्सर बस स्टैंड चौराहे पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास अपना दो पहिया वाहन पार्क कर मोबाईल से बतियाते रहते है और चौराहे पर अक्सर ट्राफिक जाम के नजारे देखने को मिलते है।
नई छतरी लगाकर सौंदर्यीकरण करवाया जाना आवश्यक
बस स्टैंड चौराहे पर चौवीसे घंटे छोटे एवं बड़े वाहनों के साथ पैदल लोगों का आवागमन लगा रहता है, ऐसे में यातायात पुलिस एवं नगरपालिका को छतरी चौराहे की पुरानी छतरी को बदलकर नई छतरी लगाए जाने के साथ चौराहे का सौंदर्यीकरण करवाया जाना भी अत्यंत आवश्यक है। इस मामले को पूर्व में भी मीडिया द्वारा मय फोटो समाचार के माध्यम से उजागर किया गया था, लेकिन इस ओर ना यातायात पुलिस का ध्यान जा रहा है और ना ही नगरपालिका प्रशासन ध्यान दे रहा है।

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