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झाबुआ

ईओडब्ल्यू इंदौर ने जनजातीय कार्य विभाग झाबुआ के चार तत्कालीन अफसरों पर दर्ज की एफआईआर

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झाबुआ – आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) इंदौर ने जनजातीय कार्य विभाग झाबुआ में वर्ष 2013-14 से 2019-20 के अंतर्गत सामग्री खरीदी को लेकर करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार को लेकर विभाग के चार तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ करीब दो करोड़‌ 98 लाख 38 हजार सात सौ अठतीस रुपए की आर्थिक वित्तीय अनियमितताओं को लेकर एफआईआर दर्ज की है। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावासों, आश्रमों और स्कूलों में उपयोग होने वाली सामग्री की खरीदी में अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ कर बिना टेंडर प्रक्रिया और  दर निर्धारण के और संदिग्ध बिलों के आधार पर भुगतान कर शासन को करोड़ों का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है । ईओडब्ल्यू जांच में यह भी उजागर हुआ कि वर्ष 2015-16 से 2019-20 के दौरान स्टेशनरी, डस्टबिन, शू-स्टैंड, बर्तन जैसी सामग्री स्थानीय विक्रेताओं से बिना टेंडर प्रक्रिया के सामग्री खरीदी गई। भंडार क्रय नियमों की अनदेखी कर पद का दुरुपयोग किया गया और फर्जी व संदिग्ध बिलों के माध्यम से भुगतान कर दिया गया । वहीं 2014-15 से 2019-20 के बीच कई संस्थानों से प्रारूप अनुसार मांग-पत्र तक नहीं लिए गए। जिन मांग-पत्रों की जानकारी दी  गई, उन पर भी पालक समिति अध्यक्ष और विकासखंड शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए । ईओडब्ल्यू ने आरोपियों के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी)  तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं  के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

इन अधिकारियों पर हुई एफआईआर

ईओडब्ल्यू ने जिन अधिकारियों को आरोपी बनाया है, उनमें ये अफसर शामिल हैं।

  • प्रशांत आर्य – तत्कालीन सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, झाबुआ
  • भारत सिंह – तत्कालीन सहायक परियोजना प्रशासक (आदिवासी विकास), झाबुआ
  • अयूब खान तत्कालीन भंडार शाखा प्रभारी (लेखापाल), झाबुआ ।
  • राघवेंद्र सिसोदिया तत्कालीन बजट शाखा प्रभारी, जनजातीय कार्य विभाग, झाबुआ

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