झाबुआ – जिले में जल संसाधन विभाग और ठेकेदारों के आपसी गठजोड़ से बनाए जा रहे बैराजों में दरारें पड़ रही है जहां पूर्व में रामा ब्लाक की ग्राम पंचायत आंबा के ग्राम भैंसाकराय में करीब 3 करोड की लागत से बनाए गए बैराज का वेस्ट वेयर का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया था वहीं जिले के ग्राम पंचायत झकेला अंतर्गत गांव खरडूछोटी में 3 करोड की लागत से निर्मित बैराज में एक माह के भीतर ही दरारे आ गई है । इस विभाग की लगातार विभागीय लापरवाही और ठेकेदारों से मिलीभगत के कारण गुणवत्ता विहीन कार्य किया जा रहा है जिससे बैराजों में दरारें नजर आने लगी है ।
जिले के रामा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत आंबा के ग्राम भैंसाकराय में जल संसाधन विभाग द्वारा करीब 2.90 करोड़ की लागत बैराज निर्माण किया गया । तालाब का निर्माण संभवत वर्ष 2024 में ही पूर्ण हुआ है इसका निर्माण कार्य रतलाम की फर्म प्रजापति इंटरप्राइजेस द्वारा किया गया । तालाब निर्माण के प्रथम बारिश में ही घटिया निर्माण की पोल खुल गई और वेस्ट वेयर की कांक्रीट का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है इस कांक्रीट को देखा तो नजर आया कि बड़े बड़े पत्थरों मे रेत सीमेंट का माल डाला गया है और कांक्रीट में सरीये का उपयोग भी नाममात्र ही नजर नहीं आ रहा है । जिससे इसकी गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिन्ह है। इस वेस्ट वेयर में नियमानुसार कांक्रीट हुआ है या नहीं …..जांच का विषय है बहुत ही कम मात्रा में गिट्टी का उपयोग हुआ है। देखने में ऐसा प्रतीत होता है कि नदी के बंडे या बड़े बड़े पत्थर में सीमेंट डालकर कांक्रीट किया गया है। गुणवत्ता हीन निर्माण कार्य के कारण यह हिस्सा भरभरा कर गिर गया है । इस गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य की शिकायत भी EOW और मप्र शासन को लिखित रूप में हुई है
जल संसाधन विभाग के इस बैराज का शुभारंभ स्थानीय विधायक ने जूल माह में निर्मला भूरिया ने किया था। इससका निर्माण कार्य मई में शुरू होकर जून माह में एक ही महीने में पूरा कर लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि कार्य पूरा होने के एक माह के भीतर ही बैराज में जगह-जगह जगह-जगह दरारें पड़ने लगी है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। ग्रामीणों ने इसे भष्टाचार की भेंट चढ़ने और घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप लगाया है। यह बैराज 280 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित करने के उद्देश्य से सापन नदी पर बनाया गया है। आम आदमी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष (एसटी विंग) मुनसिंह अजनार ने आरोप लगाया कि बैराज स्थल पर कोई साइन बोर्ड नहीं लगाया गया है और निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से यह बैराज एक माह में तैयार किया गया। इससे आसपास के सात से अधिक गांव के किसानों को लाभ मिलना था, लेकिन अब इसकी गुणवत्ता पर संदेह है। ग्रामीण अमरसिंह राठौड़, शैतान, शंकर, बालू और नानू सहित अन्य किसानों ने भी वैराज में दरारों की पुष्टि करते हुए इसकी जांच और संबंधित ठेकेदारों पर कारवाई की मांग की है