Connect with us

झाबुआ

अमेरिका में भारतीय वैज्ञानिक डॉ. अल्केश हाड़ा को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रथम पुरस्कार

Published

on

जराइल से अ

बाल्टीमोर (मैरीलैंड), अमेरिका। मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जगत में अपनी पहचान बनाने वाले भारतीय वैज्ञानिक डॉ. अल्केश हाड़ा ने अमेरिका में आयोजित सोसाइटी ऑफ नेमेटोलॉजिस्ट (SON 2026) की वार्षिक अंतरराष्ट्रीय बैठक में अपने शोध की उत्कृष्ट प्रस्तुति देकर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। इसके अलावा उन्हें सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रतिष्ठित N. A. Cobb Foundation Travel Award से भी सम्मानित किया गया।

सोसाइटी ऑफ नेमेटोलॉजिस्ट विश्व का प्रमुख वैज्ञानिक संगठन है, जो पौध-परजीवी निमेटोड (Plant-Parasitic Nematodes) और उनसे संबंधित अनुसंधान के क्षेत्र में कार्यरत वैज्ञानिकों को एक मंच प्रदान करता है। इस वर्ष आयोजित SON 2026 सम्मेलन में अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्पेन, इजराइल, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, भारत सहित अनेक देशों के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। सम्मेलन में विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों, जैसे कि यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सिस्टम, यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा, यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया, आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, नॉर्थ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी, टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी, वागेनिंगेन यूनिवर्सिटी (नीदरलैंड) सहित अनेक अग्रणी संस्थानों के वैज्ञानिकों ने अपने नवीनतम शोध प्रस्तुत किए तथा वैज्ञानिक विचार-विमर्श में भाग लिया।
ऐसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच पर इजराइल का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय वैज्ञानिक डॉ. अल्केश हाड़ा का प्रथम पुरस्कार प्राप्त करना न केवल उनके लिए बल्कि मध्य प्रदेश और भारत के लिए भी गर्व की बात है।

वर्तमान में डॉ. अल्केश हाड़ा इजराइल के Agricultural Research Organization (ARO) – Volcani Institute में पोस्टडॉक्टोरल वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। वे प्रोफेसर सिगल ब्राउन-मियारा के शोध समूह में पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले रूट-नॉट निमेटोड (Meloidogyne spp.) पर अत्याधुनिक आणविक अनुसंधान कर रहे हैं।

निमेटोड के इफेक्टर प्रोटीनों पर किया महत्वपूर्ण शोध

SON 2026 सम्मेलन में डॉ. हाड़ा ने Meloidogyne javanica के MAP-1 परिवार के इफेक्टर प्रोटीनों पर आधारित अपना नवीन शोध प्रस्तुत किया। उनके अध्ययन में MjMAP19 और MjMAP40 नामक दो इफेक्टर प्रोटीनों की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण किया गया।

इफेक्टर ऐसे विशेष प्रोटीन होते हैं जिन्हें निमेटोड पौधों की कोशिकाओं में छोड़ते हैं ताकि वे पौधे की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकें और सफलतापूर्वक संक्रमण स्थापित कर सकें। डॉ. हाड़ा और उनकी टीम ने आधुनिक आणविक जीवविज्ञान, कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी, जीन अभिव्यक्ति विश्लेषण तथा RNA इंटरफेरेंस जैसी तकनीकों की सहायता से यह दर्शाया कि ये MAP-1 इफेक्टर निमेटोड की परजीविता तथा पौध प्रतिरक्षा को दबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उनके निष्कर्ष भविष्य में पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ निमेटोड प्रबंधन तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन और कृषि सुरक्षा पर भी कर रहे हैं शोध

डॉ. हाड़ा का वर्तमान शोध केवल निमेटोड इफेक्टर तक सीमित नहीं है। वे यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ता तापमान रूट-नॉट निमेटोड की जीवविज्ञान, संक्रमण क्षमता, भौगोलिक वितरण तथा जीन अभिव्यक्ति को किस प्रकार प्रभावित करता है।

उनकी टीम विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों से प्राप्त निमेटोड आबादियों की आणविक स्तर पर तुलना कर यह समझने का प्रयास कर रही है कि भविष्य में बदलती जलवायु परिस्थितियों में कृषि फसलों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।

अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं शोध

डॉ. हाड़ा के शोध कार्य 40 से अधिक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं तथा कई शोध प्रकाशन के लिए स्वीकार किए जा चुके हैं। उनके प्रमुख शोध विषयों में निमेटोड इफेक्टर जीवविज्ञान, कार्यात्मक जीनोमिक्स, RNA इंटरफेरेंस, ट्रांसक्रिप्टोमिक्स तथा जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में पौध-निमेटोड परस्पर क्रियाओं का अध्ययन शामिल है।

उनका शोध विश्वभर के वैज्ञानिकों द्वारा कृषि फसलों को निमेटोड से होने वाले नुकसान को कम करने के संभावित उपायों के रूप में देखा जा रहा है।

छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक बनने तक का सफर

डॉ. अल्केश हाड़ा का जन्म मध्य प्रदेश के रंभापुर क्षेत्र के छोटे से गांव किशनपुरा में हुआ। उनकी प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा शासकीय विद्यालय, रंभापुर झाबुआ से हुई। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा साधन बनाया।

उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) में स्नातक तथा जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से जैव प्रौद्योगिकी में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

इसके बाद उन्होंने नेशनल कॉलेज तथा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के संयुक्त शैक्षणिक एवं अनुसंधान कार्यक्रम के अंतर्गत पीएचडी पूरी की। उनके पीएचडी शोध को उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए वर्ष 2021 में Commendable Ph.D. Award से सम्मानित किया गया।

पीएचडी के बाद उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली में रिसर्च एसोसिएट के रूप में कार्य किया और वर्तमान में इजराइल के प्रतिष्ठित वोल्कानी इंस्टीट्यूट में पोस्टडॉक्टोरल वैज्ञानिक के रूप में शोधरत हैं।

सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर जताया गर्व

डॉ. हाड़ा की सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि उनकी पूरी शैक्षणिक यात्रा लगभग सरकारी विद्यालयों, सरकारी विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक वित्तपोषित अनुसंधान संस्थानों से पूरी हुई है।

इस उपलब्धि पर उन्होंने कहा—
“मैंने अपनी अधिकांश शिक्षा सरकारी विद्यालयों, सरकारी विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक धन से संचालित अनुसंधान संस्थानों से प्राप्त की है। इसलिए मेरा मानना है कि समाज ने मेरी शिक्षा में जो निवेश किया है, उसका सर्वोत्तम प्रतिफल मुझे अपने वैज्ञानिक कार्यों के माध्यम से किसानों, कृषि और समाज को लौटाना चाहिए। यही मेरे शोध का सबसे बड़ा उद्देश्य है।”

युवाओं के लिए प्रेरणा

ग्रामीण पृष्ठभूमि, शासकीय विद्यालयों में पढ़ाई, भारत के सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों से उच्च शिक्षा, इजराइल में अत्याधुनिक शोध और अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त करना डॉ. अल्केश हाड़ा की मेहनत, लगन और वैज्ञानिक उत्कृष्टता का प्रमाण है।

उनकी यह उपलब्धि न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो गांव के सरकारी विद्यालय से निकलकर भी विश्व के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक मंचों तक पहुंचा जा सकता है।

देश दुनिया की ताजा खबरे सबसे पहले पाने के लिए लाइक करे प्रादेशिक जन समाचार फेसबुक पेज

प्रादेशिक जन समाचार स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा मंच है यहाँ विभिन्न टीवी चैनेलो और समाचार पत्रों में कार्यरत पत्रकार अपनी प्रमुख खबरे प्रकाशन हेतु प्रेषित करते है।

Advertisement

Subscribe Youtube

Advertisement
झाबुआ8 hours ago

अमेरिका में भारतीय वैज्ञानिक डॉ. अल्केश हाड़ा को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रथम पुरस्कार

थांदला1 day ago

अस्पताल में पानी की शिकायत मिलते ही तत्काल पहुंचे एसडीएम भास्कर गाचले, टैंकरों से जलापूर्ति कराकर मरीजों को दिलाई राहत

झाबुआ2 days ago

बच्चों, दिव्यांगजनों एवं महिलाओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने हेतु न्यायपीठ बाल कल्याण समिति झाबुआ और चालक-परिचालक संघ की संयुक्त बैठक आयोजित

DHAR2 days ago

मेरा युवा भारत’ (MY Bharat) राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2026: धार के युवाओं के लिए प्रतिभा प्रदर्शन का सुनहरा अवसर, 15 जुलाई तक करें आवेदन

राणापुर2 days ago

अवैध शराब परिवहन के विरुद्ध झाबुआ पुलिस की बड़ी कार्रवाई
60.3 बल्क लीटर अंग्रेजी शराब एवं कार सहित कुल ₹6.89 लाख का मशरूका जब्त

सेंसेक्स

Trending

कॉपीराइट © 2025. प्रादेशिक जन समाचार

error: Content is protected !!