यात्री किराए (बस) में करीब 30- 55 प्रतिशत बढ़ोतरी से विधार्थीगण परेशान व आमजन पर बढ़ा आर्थिक बोझ
विद्यार्थियों और रोजाना अप-डाउन करने वालों की बढ़ी परेशानी, यात्रियों में सरकार के प्रति नाराजगीझाबुआ। बस यात्री किराए में हुई करीब 50 प्रतिशत तक की बेतहाशा बढ़ोतरी ने आमजन की परेशानी बढ़ा दी है। रोजाना बसों से सफर करने वाले विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने-जाने वाले यात्रियों पर इसका सीधा अतिरिक्त […]
विद्यार्थियों और रोजाना अप-डाउन करने वालों की बढ़ी परेशानी, यात्रियों में सरकार के प्रति नाराजगी झाबुआ। बस यात्री किराए में हुई करीब 30-50 प्रतिशत तक की बेतहाशा बढ़ोतरी ने आमजन की परेशानी बढ़ा दी है। रोजाना बसों से सफर करने वाले विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने-जाने वाले यात्रियों पर इसका सीधा अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने लगा है। किराया बढ़ने के बाद यात्रियों में नाराजगी देखने को मिल रही है और कई लोग सरकार को कोसते नजर आ रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में बस किराए में इतनी बड़ी वृद्धि आम आदमी की जेब पर भारी पड़ेगी। खासकर वे विद्यार्थी और कर्मचारी जो प्रतिदिन झाबुआ सहित आसपास के क्षेत्रों से अप-डाउन करते हैं, उनके मासिक खर्च में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो जाएगी।
यदि किराया सूची पर गौर करें तो झाबुआ से इंदौर का किराया पहले करीब रू 190 था जो अब बढ़कर 300 रूपए हो गया है इसमें करीब पचास प्रतिशत वृद्धि हुई है जबकि झाबुआ से इंदौर व्यपारी वर्ग खरीदी के लिए जाते है वहीं कई विधार्थी उच्च शिक्षा हेतु इंदौर गये है उन्हें इस बेहताशा वृद्धि से घर आने पर विचार करना पड़ेगा । वही झाबुआ से बड़वानी और रतलाम का किराया लगभग दुगुना हो गया है । वही झाबुआ से राणापुर, मेघनगर, रामा , थांदला पिटोल आदि स्थानों पर बस किराया में 30 से 50 प्रतिशत वृद्धि हुई है । वही ज्यादा तर आर्थिक रूप से कमजोर लोग ही बसों में सफर करते है उनके लिए यह वृद्धि गरीबी में आटा गिला के समान है । अचानक बेतहाशा बस किराया बढ़ोतरी से यात्रीगण सकते में हैं ।
10-20 प्रतिशत वृद्धि होती तो समझ आता आम यात्रियों के अलावा विशेष रूप से विधार्थीगण का कहना है कि यदि सरकार किराया बढ़ाना चाहती थी तो 10 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि न्यायसंगत मानी जा सकती थी, लेकिन करीब 50 प्रतिशत तक किराया बढ़ाना आमजन के लिए परेशानी का सबब बन गया है। पहले से महंगाई की मार झेल रहे परिवारों को अब आवागमन के लिए अधिक राशि खर्च करनी पड़ेगी । कुछ विद्यार्थियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “रक्षाबंधन पर मोहन मामा का यह तोहफा लंबे समय तक याद रहेगा । विद्यार्थियों की चिंता—रोज का सफर होगा महंगा किराया बढ़ने का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों पर पड़ने की बात सामने आ रही है। कई विद्यार्थी प्रतिदिन बस से कॉलेज और स्कूल आते-जाते हैं। ऐसे में रोजाना किराए में कुछ रुपये की बढ़ोतरी भी महीने के अंत तक बड़ी राशि बन जाती है । विद्यार्थियों का कहना है कि सरकार को छात्र-छात्राओं और दैनिक यात्रियों के लिए किराए में राहत पर विचार करना चाहिए। डेली अप-डाउन वालों के लिए दोहरी मार झाबुआ से इंदौर, आलीराजपुर, रतलाम, धार सहित आसपास के क्षेत्रों में रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बढ़ा किराया बड़ी चुनौती बन गया है। नौकरी, व्यापार और पढ़ाई के लिए प्रतिदिन सफर करने वालों को अब अपनी मासिक आय का अधिक हिस्सा परिवहन पर खर्च करना पड़ेगा । यात्रियों की मांग है कि सरकार किराया वृद्धि की समीक्षा करे और विद्यार्थियों व डेली अप-डाउन करने वाले यात्रियों को राहत देने के लिए रियायती व्यवस्था पर विचार करे।
वही झाबुआ निवासी एंजल सीए की पढ़ाई इंदौर से कर रही ने कहा कि बस किराए में अचानक करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी विद्यार्थियों के लिए काफी परेशानी वाली है। उच्च शिक्षा इंदौर या अन्य जगह से कर विधाथीयो के आने-जाने वाले छात्रों के परिवारों पर इसका सीधा अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। साथ ही अब घर आने पर सोचना पड़ेगा । सरकार को विद्यार्थियों की परेशानी को देखते हुए किराया बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करना चाहिए। बीबीए इंदौर से कर रहे झाबुआ निवासी दिव्यांश ने कहा कि पहले ही पढ़ाई, किताबों और अन्य खर्चों का बोझ है, ऐसे में बस किराए में इतनी अधिक वृद्धि से खर्च काफी बढ़ गया है। किराया बढ़ाना जरूरी हो तो 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि उचित होती, लेकिन करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी आम विद्यार्थियों के हित में नहीं है। वही अन्य कालेज छात्र ओमी ने कहा कि बढ़े हुए किराए का सबसे ज्यादा असर डेली अप-डाउन करने वाले विद्यार्थियों पर पड़ेगा। कई छात्र मजबूरी में निजी वाहनों या अन्य साधनों का उपयोग करने को मजबूर हो सकते हैं। सरकार को विद्यार्थियों और आम यात्रियों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए किराया वृद्धि को कम करना चाहिए और छात्र वर्ग को राहत देनी चाहिए ।
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