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झाबुआ

आरटीआई में मांगी जानकारी एक माह बाद भी नहीं मिली, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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झाबुआ । जिले में स्वास्थ्य विभाग की मनमानी शैली व कर्मचारी द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम का मजाक बनाना जन चर्चा का विषय बन गया है । जहां विभाग का कर्मचारी दुर्गेश जोशी द्वारा विभिन्न आरटीआई की जानकारी समय सीमा में उपलब्ध न कराकर इस अधिनियम का माखौल बनाया जा रहा है और इस अधिनियम का किस तरह मजाक बनाया जा सकता है इस कर्मचारी से सीखना चाहिए ।

आवेदक द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी झाबुआ से जिले में पंजीकृत निजी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट एवं सोनोलॉजिस्ट की उपलब्धता, उनके पंजीयन तथा विभिन्न संस्थानों में पदस्थापना से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत स्वास्थ्य विभाग से मांगी गई थी। आवेदन देने के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आवेदक को जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली तथा आरटीआई आवेदनों के निराकरण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं । आवेदक का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग में आरटीआई से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से जुड़े कर्मचारी दुर्गेश जोशी द्वारा पूर्व में भी जानकारी उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती गई। तत्कालीन पेटलावद बीएमओ सुरेश कटारा के कार्यकाल से संबंधित जानकारी भी आरटीआई के माध्यम से मांगी गई थी, लेकिन उस समय भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई और करीब एक वर्ष बीत जाने के बाद भी वह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई । इसी प्रकार पूर्व में पीएफ (PF) से संबंधित जानकारी भी सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई थी, लेकिन आवेदक के अनुसार उक्त जानकारी भी निर्धारित समयावधि या आज दिनांक तक उपलब्ध नहीं कराई गई । इस तरह इस कर्मचारी द्वारा आरटीआई कानून का मजाक बनाया जा रहा है तो गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आती है । लगातार आरटीआई आवेदनों में जानकारी नहीं मिलने से आवेदक ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि निर्धारित समयावधि में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो इससे सूचना का अधिकार अधिनियम की भावना प्रभावित होती है। आवेदक ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने तथा जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा बरती जा रही लापरवाही को लेकर कारवाई की मांग की है तथा मांगी गई जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है।

अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन आरटीआई आवेदनों में देरी के संबंध में क्या कार्रवाई करता है और आवेदक को मांगी गई जानकारी कब तक उपलब्ध कराई जाती है।

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