झाबुआ। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम मध्य भारत प्रांत (भोपाल) व जिला झाबुआ ने राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने तथा इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के संरक्षण की मांग की है। इस संबंध में परिषद ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मध्यप्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तैयार कर जिला कलेक्टर के माध्यम से अपनी मांग रखी है । रैली के माध्यम से ज्ञापन देने पहुंचे, जिसका नेतृत्व पूर्व सांसद गुमानसिंह डामोर ने किया । ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर सुनिल डावर को दिया गया । परिषद के अनुसार, अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की 30 अगस्त 2026 को राजस्थान के भीलवाड़ा में आयोजित बैठक में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसी प्रस्ताव के आधार पर यह मांग उठाई गई है। जलियांवाला बाग जैसी ऐतिहासिक घटना ज्ञापन में बताया गया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जनजातीय समाज ने देश की आजादी के लिए अनेक बलिदान दिए। इनमें मानगढ़ धाम की घटना का विशेष ऐतिहासिक महत्व है। 17 नवंबर 1913 को संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में चल रहे भगत आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेजी शासन ने मानगढ़ पहाड़ी पर भीषण गोलीबारी की थी। इस नरसंहार में बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग मारे गए थे। परिषद ने इस घटना को जलियांवाला बाग हत्याकांड के समान महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान मिलना चाहिए। जनजातीय अस्मिता और संस्कृति का प्रतीक ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि भगत आंदोलन केवल अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष नहीं था, बल्कि यह जनजातीय समाज की पारंपरिक संस्कृति, आस्था, सामाजिक मूल्यों और अस्मिता की रक्षा का भी आंदोलन था। संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में चले इस अहिंसक स्वाधीनता आंदोलन ने राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्रों में स्वतंत्रता की चेतना को मजबूत किया। परिषद का कहना है कि स्वतंत्रता के बाद भी मानगढ़ धाम को वह राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल पाई, जिसका यह ऐतिहासिक स्थल हकदार है। जनजातीय समाज के बलिदान और स्वतंत्रता आंदोलन में उसके योगदान को इतिहास की पुस्तकों में भी समुचित स्थान दिया जाना आवश्यक है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी कर चुके हैं दौरा ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर को मानगढ़ धाम का दौरा किया था तथा वर्ष 2022 में आयोजित मानगढ़ धाम की गौरव यात्रा के दौरान बलिदानी वीरों और जनजातीय समाज की विरासत को नमन किया था। इसी प्रकार राष्ट्रपति ने भी 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचकर जनजातीय बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। परिषद ने बताया कि मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक महत्व के अध्ययन के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सेवानिवृत्त निदेशक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय दल ने भी अध्ययन कर सरकार को शोध आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। तीन राज्यों से सहयोग की अपील वनवासी कल्याण परिषद ने मांग की है कि मानगढ़ धाम को बिना विलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए तथा इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण एवं विकास सुनिश्चित किया जाए। साथ ही राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश सरकार से इस दिशा में सहयोग करने की अपील की गई है । परिषद ने तीनों राज्यों के स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में मानगढ़ धाम के गौरवशाली इतिहास को उचित स्थान देने तथा जनजातीय समाज के बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में उसके योगदान को व्यापक स्तर पर सामने लाने की मांग भी की है। परिषद का मानना है कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने से देश के स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण अध्याय को उचित पहचान मिलेगी और आने वाली पीढ़ियां जनजातीय वीरों के बलिदान से परिचित हो सकेंगी ।
ज्ञापन देने के अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम झाबुआ के कैलाश भाबर , मनोज अरोरा, भूपेश सिंगोड आदि अनेक सदस्य उपस्थित थे ।
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