झाबुआ
भारतीय सनातन हिन्दू संस्क्रति में पर्यावरण को देवतुल्य स्थान दिया गया है- पूज्य दिव्येशकुमार जी
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दिव्येशकुमार जी ने हाथी पावा पहाडी पर मोरों के चुगने के लिये बनाये गये चबुतरे पर अनाज डाल कर पक्षियों के आहार प्रदान किया ।
इस अवसर पर उन्होने हाथीपावा के टेकरी पर वृक्षारोपण भी किया ।
इस अवसर पर उन्होने पर्यावरण संरक्षण के लिये नगरवासियों विशेष कर गुड मार्निंब क्लब के सदस्यों द्वारा वृक्षों को जीवित रखने के लिये प्रतिदिन पानी पीलाने के कार्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि विश्व की प्राचीनतम् संस्क्रति भारतीय सनातन हिन्दू संस्क्रति में पर्यावरण को देवतुल्य स्थान दिया गया है। यही कारण है कि पर्यावरण के सभी अंगों को जैसे जल, वायु, भूमि को देवताओं से जोड़ा गया हैं, देवता ही माना गया है। हिन्दू दर्शन में मूल ईकाई जीव में मनुष्य में पंच तत्वों का समावेश माना गया है। मनुष्य पांच तत्वों जल, अग्नि, आकाश, पृथ्वी और वायु से मिलकर बना । भारतीय पौराणिक ग्रंथों, ज्योतिष ग्रंथों व आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार ग्रहों व नक्षत्रों से संबंधित पौधों का रोपण व पूजन करने से मानव का कल्याण होता है। आम लोगों को इन वृक्षों के वैज्ञानिक, आध्यात्मिक, ज्योतिषीय व आयुर्वेदिक महत्व के बारे में पता होना चाहिए, जिससे प्रति पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले । यह एक उत्तम कार्य होगा आने वाली पीढ़ी और संस्क्रति संरक्षण के लिए।पूज्य श्री ने हाथीपावा टेकरी के विभिन्न दर्शनीय स्थानों का भी अवलोकन किया तथा स्वयं ने हाथीपावा पहाडी के नीचे के जंगलों का अवलोकर करके इसे प्रकृर्ति का वरदान बताया । उन्होने ध्यान केन्द्र, सहित विभिन्न स्थानों का अवलोकन किया ।उन्होने पक्षियों की सेवा के लिये क्लब के सदस्यों द्वारा प्रति दिन 15 किलो अनाज की व्यवस्था करके मुक पक्षियों के लिये किये जारहे कार्यो की मुक्त कंठ से प्रशांसा भी की ।