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झाबुआ

जिला मलेरिया कार्यालय मे स्टोरकिपर की जुलगबंदी से डीएमओ कर रहे भ्रष्टाचार

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मलेरिया कीटनाशक के हजारों ड्रमों को राईट आफ के नाम पर भ्रष्ट तरिके से बेच कर भरी जेबे

उच्च स्तरीय जांच हो तो कई तथ्य आ सकते है सामने 

झाबुआ। जिले भर मे स्वास्थ्य सेवाओ को लकर जहा स्वास्थ्य विभाग सूर्खियां में बना हुआ रहता है वही इसी विभाग के एक अंग के रूप पृथक से डीडीओ पावर्स वाला जिला मलेरिया कार्यालय भी चुपचाप ही व्यापक भ्रष्टाचार करने को लेकर सूर्खियों में बना हुआ है। इस कार्यालय में जिला मलेरिया अधिकारी जो पिछले पांच सालों से अधिक समय से काम कर रहे है, भाजपाई नेताओं के अनुसार पूरी तरह कांग्रेसी मानसिकता वाले अधिकारी है, के द्वारा कथित रूप से कार्यालय के स्टोर किपर जो वास्तव में फिल्ड मे काम करने के लिये अर्थात एमपीडब्लु स्तर के कर्मचारी है, से मिल कर विभाग के लिये होने वाली खरीदी हो या प्रचार प्रसार का काम हो, दीवारों पर नारे लिखवाले का काम हो, या भंगार के नाम पर राईट आफ सामग्री बेचने का काम हो, या केन्द्र सरकार से आई मलेरिया कीटनाशक दवाई के हजारों ड्रमों को दो नम्बर मे 100-100 रूपये के नाम से बेचे जाने तथा उनका विधिवत राइटआफ नही करने जैसे कारनामे विभाग में चर्चा का विषय बने हुए है। जिला मलेरिया अधिकारी को सरकार से जहा नियमित विभागीय बजट मे सामग्री एवं आपूर्ति मद में लाखों की रकम प्रतिवर्ष मिलती है, उसमें केवल औपचारिक तौर पर टेडर की कार्यवाही करके भोपाल की एक ही फर्म से अलग अलग नाम से रेट्स बुलवा कर उन्हे बरसों से सामग्री प्रदाय का आदेश दिया जा रहा है और फर्म से 20 से 30 प्रतिशत कमीशन एडवांस मे ले लिया जाता है। वही जिला स्वास्थ्य समिति में भी इन्हे केन्द्र सरकार से मोटी रकम बजट के रूप में मिलती हे। जिसमें ये मच्छरदानियों के लिये कीटनाशक खरीदने, प्रचार प्रसार, के अलावा कई चिजों की खरीद, गेम्बुसिया मछली खरीदने, स्प्रे में काम करने वाले मजदूरों के लिये व्यवस्था आदि के अलावा गाईड लाईन के अनुसार खर्चे करना होते हे। वही मलेरिया माह में पूरे माह तक रथ का संचालन, एडवोकेसी कार्यशालाओं का आयोजन, मलेरिया के लिये प्रचार प्रसार,अखबारों में विज्ञापन आदि के नाम भी जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा सीएमएचओ से अनुमोदन करवा कर कलेक्टर से स्वीकृति लेकर बाला बाला भ्रष्टाचार करने में पीछे नही रहते। इस कार्य में मलेरिया कार्यालय मे इनके खास स्टोर किपर रहते है जिन्हे ये जेसा कहते है वेसा वे करते हे। मलेरिया माह मे वाहन के पीओएल के नाम भी काफी भ्रष्टाचार करने की बात चर्चा में है। बताया गया हे कि मलेरिया रथ मे हजारो का डिजल फुक दिया गया। और वाहन का एवरेज मात्र 4 किलो मीटर प्रति लीटर बताया गया है जबकि खराब से खराब पूराने वाहन भी 8 से 10 किमी का एवरेज देते है। जिला मलेरिया कार्यालय में पम्प पार्टस एवं पीतल के स्टीरीप पंप जो पूराने होकर मेघनगर गोदाम में रखे गये थे तथा बरसों पूराना वाहनों का एवं पंप पार्ट्स का सामन जो कम से कम एक टन के आसपास होना चाहिये उसे गुपचुप तरिके से कागजी समिति बना कर राईट आफ चिजो को ओने पौने दाम पर बेच दिया गया। क्विंटलों पूराना सामन किलो मे बताकर पीतल जेसी धातु की कीमत लेकर हजारो रूपयों का न्यारा व्यारा जिला मलेरिया अधिकारी एवं स्टोर किपर ने मिल कर कर डाला है। यदि वास्तव में पूराने सामान की जाच करवा कर इसके निलामी की कार्यवाही को देखा जावे तो चौकाने वाले तथ्य सामने आ सकते है। कुल मिला कर देखे तो वर्तमान में जिला मलेरिया अधिकारी एव स्टोर किपर की जोडी ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को विश्वास मे लेकर तथा उन्हे भ्रमित करके लाखों का गोलमाल मलेरिया विभाग में करने की चर्चायें बनी हुई है। यदि इस विभाग की पिछले पांच सालों की सभी खरीदी के रेकार्ड की उच्च स्तरीय जाच करवाई जावे तो तय हे कई ओर भी तथ्य सामने आसकते है। जिला मलेरिया अधिकारी डी एस सिसौदिया से मोबईल पर सपर्क करने की कोशिश की गई तो इन्होने मोबाइ्ल रीसिव नही करने पर स्वय जिला मलेरिया कार्यालय जाकर इनका पक्ष जानना चाहा तो इनका कहना हे कि - ’’

विभाग के मुखिया को ऐसी बातो से कोई लेना देना नही है तो आप लोगो को काहे की चिंता हो रही है

 डी एस सिसौदिया, जिला मलेरिया अधिकारी झाबुआ 


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