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झाबुआ

आओ पता लगाए :- आखिर क्यों वन विभाग द्वारा निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री जैम पोर्टल के माध्यम से उच्च दरों पर खरीदी थी…..?

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झाबुआ – वन विभाग की मनमानी कार्यशैली के किस्से , अब तो जिले में आम बात हो गई है जहां हमने पूर्व में बताया था कि किस प्रकार इस विभाग द्वारा 6-7 रुपए प्रति किलो वाली सामग्री 30 रुपए प्रति किलोग्राम में खरीदी थी । वही पूर्व में बिना जीएसटी वाली फर्म से भी विभिन्न बिलों के माध्यम से लाखों की खरीदी की थी और टैक्स चोरी की थी । वही हाल ही में पता लगा है कि वन विभाग द्वारा वष 2023-24 में जेम पोर्टल के माध्यम से विभिन्न सामग्री खरीदी तो गई थी लेकिन बिलों में कंपनी या क्वालिटी का उल्लेख नहीं होने से , ऐसा प्रतीत होता है कि निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री की खरीदी गई थी और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंच गया था संपूर्ण खरीदी जांच का विषय है ।

जानकारी अनुसार वन विभाग द्वारा वर्ष 2023- 24 में जेम पोर्टल के माध्यम से गांव सिलकुआ जिला धार की किसी फर्म से ट्रैकिंग शूज की खरीदी की गई थी । इस फर्म के बिल में ट्रैकिंग शूज किस कंपनी का है यह नहीं दर्शाया गया था । साथ ही साथ एचएसएन कोड भी नहीं दर्शाया गया , जो इस बात को दर्शाता है कि यह सामग्री किसी लोकल कंपनी की है । करीब 30 नंग ट्रैकिंग शूज खरीदी गए थे जिसके लिए करीब 1 लाख 11 हजार का भुगतान संबंधित फर्म को किया गया था इस प्रकार एक जोड़ शूज रू 3700 की दर से खरीदा गया था । बाजार में लोकल कंपनी के ट्रैकिंग शूज ₹ 1700 की दर में उपलब्ध हैं । वही इस विभाग द्वारा वर्ष 2023-24 में भी इसी फर्म से ब्लैंकेट खरीदी गए थे और करीब 30 नंग ब्लैंकेट की खरीदी की गई थी इस बिल में भी ब्लैंकेट को लेकर कोई कंपनी या क्वालिटी कुछ भी नहीं दर्शाया गया था और न ही एचएसएन कोड । तो ऐसा माना जा सकता है कि किसी लोकल कंपनी के ही खरीदे गए होंगे । इस सामग्री के लिए विभाग ने 31470 का भुगतान किया था याने 1049 रुपए प्रतिनंग की दर  से खरीदा गया था जबकि बाजार में इस तरह के लोकल कंपनी के ब्लैंकेट 300 से ₹400 की दर में बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं । वहीं विभाग द्वारा इसी फर्म से ग्लव्स की खरीदी भी की गई । वह भी 30 नंग खरीदे गए थे और इस ग्लव्स खरीदी बिल में भी किसी भी कंपनी या क्वालिटी को लेकर कोई उल्लेख नहीं था और नहीं हैं एचएसएन कोड दर्शाया गया था । जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह भी किसी लोकल कंपनी का ही है । इस 30 नंग ग्लव्स के लिए 35940 का भुगतान किया गया याने करीब 1198 प्रति नग की दर से खरीदा गया  था । जबकि ग्लव्स 200 से ढाई सौ रुपए की दर पर बाजार में आसानी से उपलब्ध है । वहीं विभाग द्वारा ब्लोअर किस कंपनी का खरीदा गया तथा एचएसएन कोड क्या है कोई जानकारी बिल में उपलब्ध नहीं है और करीब 43800 का एक ब्लोअर खरीदा गया है । वही फायर एक्सटिंगयूशर  भी खरीदे गए हैं जिसमें कंपनी या क्वालिटी को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है और करीब 4700 की दर से जैम पोर्टल के माध्यम से खरीदी की गई थी ।  वहीं विभाग द्वारा ब्रश कटर भी खरीदा गया है तथा कंपनी  को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है और करीब 27000 रुपए प्रति नग की दर से खरीदा गया है वही यही ब्रश कटर वन विभाग द्वारा कुक्षी जिला धार की किसी फर्म से भी ब्रश कटर खरीदा गया है  इंदौर की फर्म द्वारा 12% जीएसटी वसूला गया है वहीं इसी सामग्री को लेकर कुक्षी जिला धार की फर्म द्वारा 18 पर्सेंट जीएसटी वसूला गया है इस प्रकार एक ही सामग्री के दो अलग-अलग फर्मो ने अलग-अलग जीएसटी वसूले गए हैं । यह भी जांच का विषय है इस प्रकार इस विभाग द्वारा पूर्व में मनमाने तौर पर खरीदी की गई है। लेकिन क्या यह सामग्री विभाग में पहुंची या नहीं यह भी जांच का विषय है । वही आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा इस तरीके की खरीदी को लेकर लोकायुक्त में शिकायत करने की बात भी कही है साथ ही किसी कंप्यूटर बाबू के कार्य प्रणाली को लेकर भी लोकायुक्त में शिकायत की बात कही है । देखना यह दिलचस्प होगा शासन प्रशासन इस तरह की कार्यप्रणाली को लेकर क्या कारवाई करता है या फिर यह विभाग यूं ही मनमानी करता रहेगा और प्रशासन को चुना लगाता रहेगा…..?

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