झाबुआ – वन विभाग की मनमानी कार्यशैली के किस्से अब जिले में जन चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं विभाग द्वारा निविदा प्रक्रिया से लेकर, सामग्री खरीदी , बिना जीएसटी बिलों का भूगतान व मनमाने दरों पर सामग्री खरीदी के किस्से अब आम हो गए हैं हाल ही में पता चला है कि पिटोल वनोपज चेकिंग पॉइंट पर ऑनलाइन टीपी के स्थान पर ऑफलाइन टीपी काटी जा रही है क्यों …. यह समझ परे है ।
वनोपज चेकिंग पॉइंट एक स्थान होता है जहाँ वनों से संबंधित उत्पादों (जैसे लकड़ी, लघु वनोपज, औषधीय पौधे आदि) की निगरानी और जाँच की जाती है। यह चेकिंग पॉइंट मुख्य रूप से अवैध कटाई, अवैध परिवहन और वन संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य है अवैध रूप से काटी गई लकड़ी और अन्य वनोपज के परिवहन को रोकने के लिए । प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना । वनोपज के व्यापार और परिवहन को सरकारी नियमों के तहत नियंत्रित करना। वैध वनोपज पर लगने वाले कर और शुल्क का संग्रह करना। इस प्रकार वन विभाग द्वारा वनपोज चैकिंग पाईट पर वाहनों की जाँच की जाती है आवश्यक परमिट और दस्तावेजों की पुष्टि की जाती है अवैध वनोपज जब्त करने की कारवाई की जाकर व दोषियों के खिलाफ कारवाई करना ।
वनमंडल में टीपी ऑनलाइन प्रणाली से ही जारी होना चाहिए। इस सिस्टम से वन विभाग के कार्यालयों में भौतिक रूप से उपस्थित हुए बिना लकड़ी, बांस और लघुवनोपज के लिए परिवहन अनुज्ञा पत्र (ट्रांजिट परमिट) जारी करने के लिए आनलाइन प्रक्रिया को अपनाना है । मैनुअल कागज आधारित ट्रांजिट सिस्टम का ऑनलाइन सिस्टम से बदलाव हुआ है । जानकारी अनुसार एनटीपीसी डेस्कटॉप आधारित वेब पोर्टल के साथ साथ मोबाइल एप्लीकेशन के रूप में उपलब्ध है इस व्यवस्था से वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से परिवहन अनुज्ञा पत्र परमिट या अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन पंजीयन और आवेदन जमा किए जा सकते हैं । शुल्क ई भुगतान के माध्यम से मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल से ऑनलाइन मोबाइल ऐप की मदद से राज्य की सीमाओं के बाहर तक निर्विघ्न आवाजाही हो सकती है । लेकिन सूत्रों का कहना है कि झाबुआ जिले के पिटोल बैरियर पर जहां से गुजरात की सीमा प्रारंभ पर होती है वहां पर अभी वन विभाग का वनोपज चेकिंग पॉइंट है जहां पर विभिन्न वनोपज परिवहन ट्रांजिट पास जारी करने के लिए ऑफलाइन पद्धति का इस्तेमाल किया जा रहा है जबकि ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से टीपी जनरेट की जाना चाहिए ।सूत्रों का यह भी कहना है कि इस चैकिंग पॉइंट पर वन विभाग के कुछ ही कर्मचारी आते हैं और कुछ कर्मचारी नौकरी पर होते हुए भी घर पर ही छुट्टी मनाते हैं जिसको लेकर जांच की आवश्यकता है । वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि ऑफलाइन पद्धति में कई बार वनोंपज युक्त वाहनों को टीपी के अभाव में राशि ले-देकर छोड़ा जा रहा है और इस तरह इस चैकिंग पॉइंट के माध्यम से विभागीय कर्मचारी अपनी जेबें गर्म करने में लगे हुए हैं और इस चेकिंग पॉइंट के माध्यम से शासन को हजारों / लाखों का राजस्व की हानि भी हो रही है जिसको लेकर विभाग मौन धारण किए हुए हैं । एक तरफ ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी अपने सभी शासकीय कार्यों के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से कार्य कर रहे हैं वहीं वन विभाग के कर्मचारी आज भी पुरानी पद्धति ऑफलाइन पद्धति के माध्यम से क्यों कार्य कर है यह भी समझ से परे है । आखिर क्या कारण है कि वन विभाग द्वारा पिटोल वनोंपज चेकिंग पॉइंट पर ऑनलाइन पद्धति के स्थान पर ऑफलाइन पद्धति से टीपी जनरेट की जा रही है । क्या शासन प्रशासन इस और ध्यान देगा या फिर यह विभाग यूं ही मनमानी करता रहेगा ।
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