झाबुआ – श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा द्वारा समाज अंतर्गत वर्षीतप कर रहे तपस्वीयो के तप अनुमोदना कार्यक्रम का आयोजन साध्वी श्री पंकज श्री जी आदि ठाणा -3 के पावन सानिध्य में लक्ष्मी बाई स्थित तेरापंथ सभा भवन पर किया गया । कार्यक्रम में विशेष रूप से रायपुरिया से वर्षीतप तपस्वी अर्चना कोटडिया भी सम्मिलित हुई । कार्यक्रम में साध्वी वृंद द्वारा तप के महत्व के बारे में विस्तृत रूप से समझाया और तप को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग भी बताया ।
तप अनुमोदना कार्यक्रम शुक्रवार रात्रि 8.30 स्थानीय तेरापंथ सभा पर साध्वी वृंद के सानिध्य में प्रारंभ हुआ । तप अनुमोदन विशेष रूप से श्रीमती सुशीला कोठारी , सोनिया कोठारी व रायपुरिया से अर्चना कोटड़िया के तप को लेकर की गई । सर्वप्रथम तेरापंथ महिला मंडल झाबुआ द्वारा गीतिका के माध्यम से कार्यक्रम की शुरुआत की । साध्वी शालीन प्रभा जी ने गीतिका के माध्यम से तप के महत्व को प्रतिपादित किया। महिला मंडल अध्यक्ष पुखराज चौधरी ने शब्दों के माध्यम से तपस्वीयों का अभिनंदन किया । साध्वी शारदा प्रभा जी ने उपस्थित जनों को बताया कि जैन धर्म में तपस्या आत्मशुद्धि ,कर्म निर्जरा के लिए की जाती है। तपस्या करने के लिए संकल्प बल, मनोबल, आत्मबल की अपेक्षा होती है। तप ज्योति है, तप साधना है, तप उपासना है, तप औषधि है और मोक्ष मंदिर का सोपान है । तप करना किसी आश्चर्य से कम नहीं। अपनी जीभ को वश में करना इतना भी सरल नहीं होता और फिर आठ दिन, पंद्रह दिन और कोई-कोई तो तीस दिन से भी आगे निराहार रहकर तप कर रहे है । जैनधर्म में सदा से तप का बहुत महत्व है। छोटे बड़े हर उम्र के श्रावक आत्म निर्जरा के लक्ष्य के साथ स्वेच्छा से तपस्या को अंगीकार करते हैं । साध्वी शारदा प्रभा जी ने यह भी बताया कि सुशीला कोठारी विगत 8 वर्षों से लगातार वर्षितप कर रही हैं । वहीं रायपुरिया की अर्चना कोटडिया का यह प्रथम वर्षीतप है वहीं सोनिया कोठारी द्वारा एक दिन छोड़कर एकासन तप लगातार किए जा रहे है । तत्पश्चात ज्ञानशाला के नन्हे बालक वीरम और पोती रिद्धि- सिद्धि ने भी अपनी दादी की तप की अनुमोदना मुक्तक के माध्यम से की । सुशीला कोठारी के बड़े पुत्र विशाल कोठारी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज इस तप अनुमोदना कार्यक्रम में आप सभी को अनुमोदना के रूप में किसी को उपवास ,तो किसी को आयंबिल तप, तो किसी को एकासन तप करना है तभी सही रूप में आपकी अनुमोदना होगी । तपस्या करके ही आप सही तरीके से भेंट दे सकते हैं । छोटे पुत्र वैभव कोठारी ने मुक्तक के माध्यम से मां की ममता व सहनशीलता व सहिष्णुता को परिभाषित किया । महिला मंडल सदस्यों द्वारा नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से तपस्वी के तप की अनुमोदना की । तपस्वी सोनिया कोठारी ने अपनी सास सुशीला कोठारी के वर्षीतप की अनुमोदना करते हुए सुंदर गीतिका के माध्यम से की और अपनी सांस को ही अपना प्रेरणा स्त्रोत बताया । तेरापंथ सभा अध्यक्ष मितेश गादिया और सचिव विपिन भंडारी ने शब्दों की व्याख्या करते हुए तप को ही मोक्ष का मार्ग बताया ।
साध्वी पंकज श्रीजी धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि तप के सेवन से ही देह की ममता का त्याग, रसना जय व कषाय जय से कर्म क्षय होता है। कर्मक्षय से आत्मा शुद्ध आत्मा बन अजरामर मुक्ति प्राप्त करती है । जैन धर्म में तपस्या (तप) का बहुत महत्व है, क्योंकि यह आत्म-शुद्धि, कर्मों की निर्जरा और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है। यह आत्म-अनुशासन, संयम और कठोर साधना का प्रतीक है. तपस्या से मन और आत्मा को शुद्ध किया जा सकता है, जिससे व्यक्ति अपने असली स्वरूप को प्राप्त कर सकता है । तपस्या से कर्मों को नष्ट किया जा सकता है । तपस्या मोक्ष (मुक्ति) की ओर ले जाती है, जो जैन धर्म का अंतिम लक्ष्य है. जैन धर्म में तपस्या का अर्थ है इच्छाओं पर नियंत्रण रखना और संयम से रहना । जैन धर्म में तपस्या को शारीरिक, वाचिक और मानसिक तप में विभाजित किया गया है । साध्वी श्री ने यह भी बताया की इच्छाओं को वश में करना ही सबसे बड़ा धर्म है जैन दर्शन कहता है । इच्छाएं आज तक कभी भी किसी की पूरी नहीं हुई है और जब तक हम इच्छाओं के दास हैं तब तक पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकते हैं उन्होंने यह भी कहा कि स्वर्ग के देवो के पास तप करने की शक्ति नहीं है । वह चाह कर भी तप को धारण नहीं कर सकते हैं मनुष्य ही तप के माध्यम से कर्मों को नष्ट कर सकता है आत्मा पर चढ़े कर्मों के मेल को निखारने का एकमात्र साधन तप है । कार्यक्रम में तेरापंथ सदस्य दीपक चौधरी, प्रीति चौधरी ने तप अनुमोदना की । तत्पश्चात तेरापंथ महिला मंडल सदस्यों द्वारा वर्षीतप तपस्वी सुशीला कोठारी, प्रीति कोटडिया व तपस्वी सोनिया कोठारी को उपहार भेंट कर तप की अनुमोदना की । कार्यक्रम का सफल संचालन साध्वी शारदा प्रभा जी ने किया व आभार प्रीति चौधरी ने माना ।
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