आखिर क्यों :- ड्रग इंस्पेक्टर , कलेक्टर के निर्देशों का पालन करने में असमर्थ है और 181 पर दर्ज शिकायत के एवज में झूठी जानकारी प्रेषित कर , शासन को गुमराह कर रही है
झाबुआ – जिले में ड्रग इंस्पेक्टर की मनमानी कार्यशाली और झूठी जानकारी प्रेषित करना, जन चर्चा का विषय बनती जा रही है जहां एक और ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा कलेक्टर के निर्देशों का पालन भी नहीं कर रही है वहीं दूसरी ओर सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायत के एवज में झूठी जानकारी प्रेषित कर , शासन को भी गुमराह कर रही है आखिर शासन प्रशासन मौन क्यों हैं ।
जानकारी अनुसार कलेक्टर नेहा मीना द्वारा 19 फरवरी मंगलवार को नारकोटिक्स एवं अन्य नशीली दावों के नियंत्रण एवं रोकथाम हेतु नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन की बैठक ली गई थी । जिसमें कलेक्टर द्वारा ड्रग इंस्पेक्टर को मेडिकल दुकानों की जांच किए जाने के निर्देश दिए गए थे । साथ ही किसी भी मेडिकल दुकानों पर बिना डॉक्टर की स्लिप के दवाई नहीं दिए जाने के निर्देश दिए गए थे ।लेकिन ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा इन आदेशों का पालन आज दिनांक तक नहीं किया गया । जबकि इन मेडिकल दुकानों का नियमानुसार निरीक्षण किया जाए , तो कई खामियां देखने को मिल सकती हैं जैसे ड्रग लाइसेंस किसी और के नाम का और संचालन कोई और कर रहा है बिना डॉक्टर की स्लिप के दवाइयां दी जा रही है आदि अनेक खामियां निरीक्षण के दौरान देखी जा सकती है । लेकिन ड्रग इंस्पेक्टर की लचीली कार्यप्रणाली , इन दिनों जिले में जन चर्चा का विषय बनती जा रही है विशेष रूप से कलेक्टर के निर्देशों का पालन न करने के लिए ।
इसके अलावा एक आवेदक ने 20 जनवरी 2025 को ड्रग लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन अंतर्गत संपूर्ण कागजी खानापूर्ति व नियमों की प्रकाशित प्रति , सूचना के अधिकार अधिनियम अंतर्गत आवेदन दिया था । ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा 15 फरवरी को पत्र के माध्यम से आवेदक को राशि जमा करने हेतु कहा गया । आवेदक ने 20 फरवरी को राशि जमा कर दी । लेकिन 20 फरवरी के बाद आज एक माह बीत जाने के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।इस दौरान आवेदक कई बार विभागीय कार्यालय पर भी पहुंचा । लेकिन ड्रग इंस्पेक्टर अपने कार्यालय पर नहीं थी । कई बार फोन कोल भी किए और वहाटसप मेसेज भी किया। लेकिन इस अधिकारी द्वारा कोई रिप्लाई नहीं किया गया । और जानकारी राशि जमा करने के बाद भी उपलब्ध नहीं कराई । इसके अलावा आवेदक ने नवंबर 2024 में सीएम हेल्पलाइन पर भी मेडिकल दुकानों के संचालक को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी तब भी ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा हेल्पलाइन पर झूठी जानकारी देकर शासन को गुमराह किया । पुनः आवेदक ने 20 जनवरी 2025 को शिकायत दर्ज कराई है लेकिन फिर ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा संभवतः झूठी जानकारी उपलब्ध कराकर शासन को गुमराह किया जा रहा है । जबकि आवेदक का कहना है कि इस शिकायत को लेकर उसके पास पूर्ण साक्ष्य उपलब्ध है लेकिन फिर भी ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा इन बातों को नजर अंदाज किया जा रहा है जो गहन चिंतन का विषय है । इस तरह की तानाशाह पूर्ण कार्य प्रणाली को ध्यान में रखते हुए, आवेदक ने राज्य सूचना आयोग से शिकायत को लेकर गुहार लगाई है तथा यह मांग की है कि ड्रग इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच की जाना चाहिए तथा सूचना के अधिकार अधिनियम अंतर्गत नियमानुसार पेनल्टी लगाने की मांग भी की है । क्या शासन प्रशासन इस और ध्यान देकर ड्रग इंस्पेक्टर की तानाशाह कार्य प्रणाली और कलेक्टर के निर्देशों का पालन न करने को लेकर, कोई उच्च स्तरीय जांच करेगा या फिर यह अधिकारी यूं ही मनमानी करती रहेगी……?
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