झाबुआ। आज कई कार्याे में आधार कार्ड जरूरी हो गया है, लेकिन झाबुआ जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है। जिनके पास है तो उनमें से अधिकाश के आधार कार्ड में कई त्रुटिया हैं। जिस कारण उन्हें कई योजनाओं से वंचित रहना पड़ता है। आधार कार्ड बनाने या सही कराने के लिए ग्रामीणों को जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। कारण अब आधार कार्ड कॉमन सर्विस सेंटर की बजाए कुछ चिंह्नित स्थानों पर बन रहे हैं। ग्रामीण जिला मुख्यालय आकर हो रहे परेशान नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए जिला मुख्यालय पर आधार कार्ड बनवाने और उसमें संशोधन कराने के लिए रात में आकर लाईने लगानी पड रही है। जिससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च हो रहा है। बडो के साथ आधार कार्ड में परिवार के छोटे बच्चों के नाम व जन्म तिथि मंें त्रुटी है तो रात के अंधेरे में बच्चों को लेकर भी आधार कें्रद्रो पर पहुंचना पड रहा है। दुर दर्राज के गांवों से आए लोगों को चिन्हित आधार कार्ड सेटरों पर आधार कार्ड बनाने या सुधारने के लिए काफी इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार बिना कार्ड बनवाए बैरंग ही लौटना पड़ता है। प्रदेश सरकार की तमाम योजनाओं जैसे रसोई गैस, बैंक खाता, राशन कार्ड, पेंशन, मनरेगा समेत आधार कार्ड को अनिवार्य किया गया है। अभी भी जिले में बडी संख्या में लोग ऐसे है जिनके आधार नहीं बन सके हैं तथा कई लोगों को आधार कार्ड में त्रुटिया है। पहले आधार कार्ड बनवाने का जिम्मा कॉमन सर्विस सेंटर के पास था, लेकिन अब सरकार ने यह जिम्मेदारी पोस्ट आफिस, बैंक, लोक सेवा केंद्र आदि को दे दी है। जिससे ऑफिस टाइम 10 बजे के बाद ही आधार बनवाने का कार्य भी शुरू होता है। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को आधार बनाने में दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। ना ही प्रशासन और ना ही जनप्रतिनिध ले रहे सुध आधार कार्ड बनाने के लिए जिले के 6 विकास खंडों में चिन्हित स्थानों पर आधार बनाने व त्रुटी सुधारने का कार्य किया जा रहा है, लेकिन लंबे अर्से से चल रहे इस कार्य में रोजाना केंद्रो पर जिस तरह की लाईने लग रही है उससे ऐसा प्रतित होता है कि या तो आने वाले लोगों के आधार कार्डो में सुधार नही हो रहा है या उन्हें चक्कर लगवाये जा रहे है। डुगरालालू के मुकेश डामोर ने बताया कि क्षेत्र के भोले भाले व अनपढ ग्रामीण अपनी परेशानियों को बताते भी नही है और जिस तरह उनका बताया जाता है वे गर्मी में भी भुखे प्यासे केंद्रो के चक्कर इस आस में लगा रहे है कि आज नही तो कल उनका काम हो जायेगा, लेकिन ग्रामीणों को हो रही इन परेशानियों को लेकर ना तो प्रशासन और ना ही जनप्रतिनिधि सुध ले रहे है। यही वजह है की ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को गांवों की बजाय जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। धन व समय की हो रही बर्बादी झाबुआ विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्र रंगपुरा के धनसिंह, प्रकाश, डुगरालालू के देवचंद, अमरसिंह, डुमपाडा की कमली, सुशीला ने बताया सुबह आधार कार्ड के लिए झाबुआ जिला मुख्यालय आए। घर का कामकाज छोड़कर आने जाने सहित समय व धन बर्बादी हो रही है। क्षेत्र के लोगों ने परेशानियों को देखते हुए शीघ्र ग्राम पंचायतो में आधार कार्ड सेंटर खुलवाने की मांग की है। नहीं मिली पेंशन विकास खंड के ग्राम डुमपाडा की देवली सोमला के आधार कार्ड में नाम गलत होने के कारण बीते दो वर्षाे से वृद्धा अवस्था पेंशन से वंचित हैं। देवली को क्या पता की नाम गलत होने से पेंशन नहीं मिल रही है। बुजुर्ग को झाबुआ आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे ही न जाने और गांव में कितने बुजुर्ग है जो इस तरह की समस्याओं से जूझ रहे होगे। गांवों में आधार कार्ड बनाने की कर चुके मांग ग्रामीणों के आधार कार्ड बनाने व त्रुटी सुधार को लेकर पूर्व जनपद अध्यक्ष शंकरसिंह भूरिया ने पूर्व में शासन, प्रशासन से गांवों में ही आधार केंद्र स्थापित किये जाने की मांग की थी, उनकी मांग पर संभागायुक्त ने प्रदेश के कलेक्टरों को गांवों में ही आधार केंद्र स्थापित किये जाने के निर्देश दिये थे, जिसके बाद कुछ स्थानों पर एक दो दिन आधार केंद्र संचालित किए भी गए, लेकिन उसके बाद भी आधार बनाने व त्रुटी सुधरवाने वालों की संख्या में कोई कमी नही आई है। भूरिया ने पुनः शासन प्रशासन से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को हो रही परेशानियों को दुर करने का आग्रह किया है, ताकि उन्हें भरी गर्मी में छोटे बच्चों को साथ आधार सेंटरों पर परेशान ना होना पडे।
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