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कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के  पेयजल आरक्षण, सिंचाई और जल चोरी पर कार्रवाई के संबंध में निर्देश

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धार, 16 अक्टूबर 25।
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की अध्यक्षता में जल उपयोगिता समिति की बैठक में जिले के पेयजल, सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सिंचाई के साथ-साथ नगरीय निकायों और उद्योगों की आवश्यकता अनुसार पानी आरक्षित किया जाए। उन्होंने मांडू के मालीपुरा स्थित सागर तालाब को पेयजल उपयोग हेतु आरक्षित करने के निर्देश दिए। साथ ही पेयजल चोरी पर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए संबंधित निकायों को बायलज़ तैयार करने को कहा।बैठक में सीईओ अभिषेक चौधरी सहित विभाग के अभियंतगण उपस्थित थे।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024-25 में जिले की सभी सिंचाई परियोजनाओं (वृहद, मध्यम और लघु) से रबी सिंचाई उपलब्धि 1,61,635 हेक्टेयर रही, जो निर्धारित लक्ष्य का 89.54 प्रतिशत है। जिले में कुल 5,14,893 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 3,78,332 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई, जो 75.23 प्रतिशत उपलब्धि दर्शाती है। कुओं से 52,970 हेक्टेयर, नलकूपों से 1,55,997 हेक्टेयर और नदी-नालों से 16,730 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की गई।

धार जिले में जल संसाधन विभाग के दो संभागीय कार्यालय — धार और मनावर — कार्यरत हैं। जिले में कुल 353 सिंचाई योजनाएं (वृहद, मध्यम और लघु) संचालित हैं, जिनकी रूपांकित सिंचाई क्षमता 2,14,841 हेक्टेयर है। इनमें चार वृहद योजनाएं, एक मध्यम परियोजना (प्रेसराइज्ड पाइप्ड माइक्रो उद्वहन योजना) और अनेक लघु परियोजनाएं शामिल हैं। इन सभी योजनाओं की कुल जीवित जल भराव क्षमता 638.61 मिलियन घनमीटर है, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 727.52 मिलियन घनमीटर तक पहुंच गई है।

कलेक्टर मिश्रा ने बताया कि आगामी वर्ष 2025-26 के लिए रबी सिंचाई का लक्ष्य 1,81,751 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। वृहद योजनाओं में मान परियोजना से रबी फसल हेतु 15,000 हेक्टेयर, ऊंकारेश्वर परियोजना से 71,207 हेक्टेयर, जोबट परियोजना से 13,000 हेक्टेयर और माही उपबांध परियोजना से 6,600 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव है।

बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि म.प्र. सहभागिता सिंचाई अधिनियम 1999 के तहत जिले में जल उपभोक्ता संस्थाओं का विधिवत निर्वाचन कर गठन किया गया है। नहरों की सफाई एवं रखरखाव के लिए शासन द्वारा प्रतिवर्ष राशि आवंटित की जाती है। कलेक्टर ने सभी संस्था अध्यक्षों से कहा कि रबी सिंचाई शुरू होने से पहले नहरों की सफाई पूरी करें और आवश्यकता पड़ने पर किसानों से जनसहयोग लें।

उन्होंने निर्देश दिया कि पेयजल हेतु आरक्षित जल का यदि संबंधित निकाय उपयोग नहीं करते हैं, तो उसका राजस्व विभाग को जमा कराना अनिवार्य होगा। कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व में पेयजल जलापूर्ति के बदले देय राजस्व राशि समय पर जमा नहीं की गई है, जिसे शीघ्र जमा कराया जाए।

अंत में कलेक्टर ने मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को निर्देश दिए कि जल संसाधन विभाग से बिना अनुमति किसी भी किसान को तालाबों या नहरों से उद्वहन हेतु विद्युत संयोजन प्रदान न किया जाए, ताकि निर्धारित कृषकों की जलापूर्ति बाधित न हो।

कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि “जल संसाधन का बेहतर प्रबंधन जिले की प्राथमिकता है। पेयजल की सुरक्षा, सिंचाई की अधिकतम उपलब्धता और जल चोरी पर नियंत्रण, तीनों पर सख्ती से अमल किया जाएगा।”

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