झाबुआ – जिले के रामा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत आंबा के ग्राम भैंसाकराय में जल संसाधन विभाग द्वारा करीब 2 करोड़ 90 लाख की लागत से बनाए गए तालाब के गुणवत्ता हीन व घटिया निर्माण की पोल खुलने के बाद भी शासन प्रशासन द्वारा कोई जांच व कारवाई न करना , जनचर्चा का विषय है ।
रामा विकासखण्ड के ग्राम भैंसाकराय में जल संसाधन विभाग द्वारा करीब 3 करोड़ की लागत से बनाए गए तालाब के घटिया निर्माण की पोल एक वर्ष में ही खुल गई और वेस्ट वेयर का एक हिस्सा गुणवत्ता के अभाव में भरभरा कर गिर गया । जब इस टूटे हुए हिस्से पर गौर किया गया तो विभागीय इंजीनियर, ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत का नजारा देखने को मिला , इस वेस्ट वेयर के टूटे हिस्से में गिट्टी की जगह नदी के कच्चे बोल्डर का उपयोग कर कांक्रीट कार्य किया गया , जो संभवतः एक मिसाल है । वही कांक्रीट कार्य , ड्राइंग डिजाइन अनुसार नहीं नजर आया , याने संभवतः गिट्टी कार्य जो एमबी में दर्शया गया और धरातल पर जो नजर आ रहा है उसमें काफी भिन्नता देखने को मिली । साथ ही इस वेस्ट वेयर के कांक्रीट कार्य में सरिया का उपयोग नाम मात्र का किया गया है । जिससे इस वेस्ट वेयर की गुणवत्ता प्रभावित हुई और पहली ही बारिश में भरभरा कर गिर गया । इस तरह के घटिया निर्माण के लिए विभाग के इंजीनियर और एसडीओ विशेष रूप से जवाबदार है जिन्होंने समय समय पर मानीटरीग नहीं की होगी और ठेकेदार द्वारा मनमानी पूर्वक कांक्रीट कार्य किया या फिर सांठगांठ कर काम किया गया । इस घटिया निर्माण कार्य को लेकर विगत माह में सर्किट हाउस पर हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी मौखिक रूप से कैबिनेट मंत्री को अवगत कराया गया था साथ ही साथ जिला प्रशासन को भी इस घटिया निर्माण के लेकर जानकारी दी गई थी । लेकिन अब तक शासन प्रशासन द्वारा ठेकेदार और विभाग पर कोई भी जांच , संभवत प्रारंभ नहीं की गई या फिर जांच को भी प्रभावित करने का प्रयास किया गया है । वही चौराहे पर जनचर्चा का विषय है कि तालाब के घटिया निर्माण कार्य की पोल खुलने के बाद भी शासन प्रशासन मौन धारण किए हुए हैं । यह चिंतनीय है । यह भी जन चर्चा है कि विभाग के आला अधिकारी और इंजीनियर को इस तरह के कांक्रीट कार्य में नदी के कच्चे बोल्डर को गिट्टी के रूप में उपयोग करने को लेकर किसी भी पुरूस्कार से नवाजा जाना चाहिए । और इस तरह की नवीन पद्धति को लेकर भी सम्मानित किया जाना चाहिए ।
श्रृंगेश्वर धाम के लिए स्वीकृत राशि भी कहीं घटिया निर्माण की भेंट न चढ़ जाए ।
जिले में आस्था का प्रमुख केन्द्र श्रृंगेश्वर धाम को विकसित करने को लेकर केबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया के विशेष प्रयासो से 6 करोड़ 28 लाख के मेगा प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई है । इस प्लान में विशाल घाट, सीढीयो का निर्माण, आकर्षक पर्यटन , सांस्कृतिक पहचान, नदी संरक्षण आदि को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट तैयार किया गया है जिसकी क्रियावन एजेंसी जल संसाधन विभाग है । चौराहों पर चर्चा का विषय है कि जिस विभाग द्वारा 3 करोड़ की लागत से बनाए गए तालाब का वेस्ट वेयर 1 वर्ष में ही गिर गया है वह इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट पर किस तरह काम करेगा , यह चिंतन का विषय है । विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से कहीं यह प्रोजेक्ट भी घटिया निर्माण की भेंट न चढ़ जाए ।
अगले अंक में और भी बहुत कुछ
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