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झाबुआ

मकर सक्रांति पर्व को लेकर शहर में सुबह से लेकर देर शाम तक चलता रहा पतंगबाजी का दौर

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बच्चों और युवाओं ने पतंग उड़ाने तो महिलाओं ने गली-मौहल्लों में गिल्ली-डंडे खेलने का आनंद लिया
पतंग-डोरो की दुकानों पर दिनभर रहीं भीड़
झाबुआ। मकर सक्रांति पर्व का उत्साह शहर में 14 जनवरी, बुधवार को दिनभर देखने को मिला। बच्चें एवं युवाओं ने इस दिन सुबह से ही अपने घरों की छतों एवं खुले मैदानों में जाकर पतंग उड़ाने का आनंद लिया तो महिलाएं एवं बालिकाएं दोपहर बाद गली-मौहल्लों में गिल्ली-डंडे खेलते हुए देखी गई। बाजार में दिनभर पतंग-डोरो की दुकानों पर भीड़ रहीं। इस बार चायना-नायलान के धागों के उपयोग, बिक्री एवं भंडारण पर शासन-प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने से इनका उपयोग लोगों ने कम ही किया वहीं बाजार में व्यवसाईयों के यह धागे नदारत ही रहे।
मकर सक्रांति पर्व पर सुबह से ही बच्चें एवं युवा घरों की छतों पर चढ़ गए। कई युवाओं ने खुले मैदान में जाकर पतंगबाजी करने का आनंद लिया। छतों पर डीजे पर फिल्मी गाने बजाते हुए पतंगबाजी करने का जमकर आनंद लिया। एक-दूसरे की पतंग काटने पर ‘वो चले काटी होय’ की आवाज भी लगाई। सुबह से लेकर देर शाम तक आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सराबोर रहा। बच्चें और युवाओं में पतंग छगाने के क्रेज के साथ शहर एवं आसपास के गांवों के निर्धन बच्चांे में पतंग लूटने को लेकर होड़ मची। पतंग कटने पर बड़ी-बड़ी लकड़ियां लेकर बच्चों की टोलियां पतंग लूटने में मशगुल रहीं।
इस बार उत्साह दुगुना रहा
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष मकर सक्रांति पर कलेक्टर द्वारा स्थानीय अवकाश घोषित करने एवं न्यायालय (कोर्ट) का भी अवकाश होने से एक ओर जहां व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद ररखकर पतंग उड़ाने का खूब आनंद लिया। वहीं शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों और अभिभाषकों न भीे इस दिन को यादगार बनाते हुए पतंग उड़ाने के साथ पर्यटल स्थलों पर जाकर समूह में पार्टी करने का लुत्फ उठाया।। बाजार में प्रतिदिन की तुलना में रौनक कम रहीं। रोज की तुलना में दुकाने भी कम खुली। केवल पतंग-धागों की दुकानों पर अधिक भीड़ देखने को मिली।
भाव में वृद्धि के बावजूद बिक्री अच्छी रहीं
पतंग-धागा व्यवसायी उमेश एवं विक्की सोलंकी ने बताया कि उनकी दुकान पर पतंग 5 से लेकर 500 रू. तक की अलग-अलग कागज, पन्नी की पतंगों के साथ कपड़े से बनी चिल पतंग, तिरंगा, अंडा आकृति, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऑपरेशन सिंदुर वाली पतंगों की मांग अधिक रहीं। वहीं धागों में 120 से 1800 रू. तक के धागों की वैराईटियां रहीं। मकर सक्रांति पर्व पर पतंग-धागों का उठाव जमकर हुआ। पिछले वर्ष की तुलना इस वर्ष भाव अधिक होने के बावजूद इसका बिक्री पर कोई असर देखने को नहीं मिला। पिछली बार की तुलना में इस बार बिक्री दुगुनी रहीं।
पारंपरिक खेल गिल्ली-डंडे खेले गए
इस दिन विशेषकर महिलाओं और बालिकाओं ने समूह में गली-मौहल्लों में पारंपरिक गिल्ली-डंडे खेले। लोगों ने मकर सक्रांति पर्व की एक-दूसरे को सोशल मीडिया पर एवं प्रत्यक्ष भी शुभकामनाएं प्रेषित की। इस दिन गौ-सेवा करने के साथ दान-पुण्य का क्रम भी दिनभर चला। लोगांे ने गौ-शालाओं में गौमाताओं को आहार करवाया। वहीं निर्धन और जरूरतमंदों को दान-पुण्य कर पुण्य लाभ अर्जन किया गया। इस दिन लोगों ने तिल से बने व्यंजनों में तिल-पपड़ी, तिल के लड्डू ग्रहण करने के साथ बाजार में गजक, आगरा के पेठे और एवहरफ्रेश, होटलों पर गुलाब जामुन, रस्स गुल्ले, नमकीन, मिठाईयों की भी जमकर बिक्री हुई।

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