झाबुआ -जिले के मेघनगर थाना क्षेत्र के संजेली नानिया साथ जंगल में 6 दिसंबर को हुई गौकशी की घटना के बाद व साक्ष्य होने के बाद भी शासन द्वारा बीट प्रभारी के अलावा अब तक वन विभाग के जिम्मेदारो पर कोई कड़ी कारवाई न होना , हिंदु समाज में जन चर्चा का विषय बनता जा रहा है । प्रशासन द्वारा मात्र फेर-बदल कर इतिश्री की जा रही है जबकि सूक्ष्म रूप से जांच की जाए तो कई कर्मचारियों पर निलंबन की गाज गिर सकती है
थांदला रेंज के मेघनगर सब रेंज के बीट क्रमांक 74 व 75 में हुई गोकशी की घटना के बाद वन विभाग के आला अधिकारी व कर्मचारी पर कोई भी जांच या कारवाई न होना, हिंदू समाज में जन चर्चा का विषय बन रहा है । वहीं मेघनगर रेंज के बीट क्र 74 व 75 में बड़े पैमाने पर लंबे समय से गौ हत्या कर उसका व्यवसाय किये जाने के आरोप हिंदू संगठन लगा चुका है तथा सोशल मीडिया पर कई फोटो वायरल भी हुए । इसी कड़ी में 31 दिसंबर को विश्व हिन्दू परिषद गौ रक्षा क्षेत्र प्रमुख सोहन विश्वकर्मा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा तथा ज्ञापन के माध्यम से गोकशी का संरक्षण देने वाले रेंजर और डिप्टी रेंजर के निलंबन, अवैध विघुत कनेक्शन देने वालो पर कारवाई की मांग की गई । वही विहीप गौर-क्षा क्षेत्र प्रमुख के नेतृत्व में इंदौर कमीशनर और डीआईजी को भी पूरे मामले से अवगत कराया था तब कहीं प्रशासन ने मेघनगर टीआई , थांदला एसडीओपी व मेघनगर एसडीएम को हटाया था । यह जरूर है कि वन विभाग के बीट प्रभारी सुरेश गुंडिया को भी निलंबित किया गया है ।
सोहन विश्वकर्मा ने इंदौर में सीएम को गोकशी कांड की जानकारी दी
हाल ही में विश्व हिन्दू परिषद गौरक्षा क्षेत्र प्रमुख सोहन विश्वकर्मा ने इंदौर में प्रदेश के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर , मेघनगर वन परिक्षेत्र में हुई गौ-वध सहित जंगल में मिले गौवंश के अवशेषों की जानकारी से अवगत कराया है । सीएम को बताया कि कितने बड़े स्तर पर गायों का वध किया जा रहा था यह भी बताया कि मृत गायों के अवशेष विहीप को दूर दूर तक मिले हैं तथा जमीन में अंदर तक खून उतरा है । विहिप जिलाध्यक्ष आजाद प्रेमसिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रकरण को गंभीरता से लिया है और उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है । यदि सब बातों पर गौर किया जाए तो वन विभाग के मेघनगर सब रेंज में पदस्थ रेंजर , डिप्टी रेंजर और पूरा अमला भी इसके लिए जवाबदार है । जबकि सिर्फ बीट प्रभारी को ही निलंबित किया गया है । या तो डिप्टी रेंजर द्वारा अपने वन परिक्षेत्र में समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया होगा या फिर जानकर अनजान बन रहे हैं या फिर आर्थिक लालच की दृष्टि से शासन प्रशासन को इस गौहत्या के बारे में जानकारी नहीं दी । जबकि हिन्दू संगठन ने लंबे समय से इस क्षेत्र में गौहत्या का आरोप लगाया है । वही वन विभाग के तत्कालीन प्रभारी डीएफओ ने रिलीव होने के पहले डिप्टी रेंजर को उपकृत करते हुए उड़नदस्ता प्रभारी बनाया है । जबकि इस तरह के आदेश में संभवतः इंदौर कार्यालय में पदस्थ सीसीएफ की भी सहमति होती होगी । जांच व कारवाई करने के बजाय उपकृत करने की कार्यशैली समझ से परे है । चर्चा चौराहों पर चल रही है कि गौकशी के इतने सबूत मिलने के बाद भी मेघनगर डिप्टी रेंजर को उपकृत करना , वन विभाग के तत्कालीन प्रभारी डीएफओ की कार्य शैली को दर्शाता है वहीं सीसीएफ द्वारा भी इस ओर कोई ध्यान नहीं देना , भी जन चर्चा है । खैर अब तक प्रशासन द्वारा गोकशी कांड में सिर्फ फेर-बदल किए जा रहे हैं जबकि इस तरह के मुद्दों पर तत्काल जांच और निलंबन की कार्यवाही होना चाहिए , ऐसी चर्चा चौराहों पर है । इस पूरी कार्यप्रणाली में वन विभाग के मेघनगर सब रेंज के आला अधिकारी और कर्मचारी मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं । देखना यह दिलचस्प होगा कि गौकशी कांड में आने वाले दिनों में वन विभाग के आला अधिकारियों पर जांच और कार्यवाही कब होगी…?
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